दशक बाद केरल में कांग्रेस की वापसी, वी.डी. सथीसन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, UDF का भव्य शक्ति-प्रदर्शन 

केरल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वडस्सेरी दामोदरन सथीसन (वी.डी. सथीसन) ने सोमवार को तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में केरल के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, और इस तरह CPI(M) के दिग्गज नेता पिनराई विजयन के एक दशक लंबे शासन का औपचारिक अंत हो गया।

शपथ समारोह: राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी

राज्यपाल राजेंद्र वी. अर्लेकर ने सुबह करीब 10 बजे सेंट्रल स्टेडियम में सथीसन और उनके मंत्रिमंडल को शपथ दिलाई। समारोह में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामैया, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जैसे कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी उपस्थित रहे। विपक्षी खेमे से भी पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन, CPM राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन और BJP के राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर मंच पर मौजूद रहे।

21 सदस्यीय मंत्रिमंडल: विविधता का संतुलन

सथीसन के साथ 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने भी शपथ ली। इस कैबिनेट में 14 पहली बार मंत्री बने नेता, दो महिलाएं और अनुसूचित जाति समुदाय के दो प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं। मंत्रिमंडल में रमेश चेन्निथला, सनी जोसेफ, के. मुरलीधरन, पी.के. कुन्हालिकुट्टी, शिबु बेबी जॉन और बिंदु कृष्णा समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं। IUML को कैबिनेट में पांच स्थान मिले हैं।

UDF की ऐतिहासिक जीत

9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में UDF ने 140 सदस्यीय सदन में 102 सीटें जीतकर शानदार जीत दर्ज की। कांग्रेस अकेले 63 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, जो राज्य में उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। IUML ने 22 सीटें हासिल कीं।

कौन हैं वी.डी. सथीसन?

1 मई 1964 को एर्नाकुलम (कोच्चि) के नेट्टूर में जन्मे सथीसन पेशे से वकील हैं। वे 2001 से लगातार पारावूर विधानसभा क्षेत्र से छह बार MLA चुने जा चुके हैं। इस बार भी उन्होंने पारावूर से 20,600 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।  वर्षों तक सथीसन को केरल की कांग्रेस राजनीति में सबसे तीक्ष्ण बुद्धि के नेता के रूप में जाना जाता था, तथ्यों पर उनकी पकड़, तर्कों में स्पष्टता और विधानसभा में विरोधियों को चुनौती देने की उनकी क्षमता सराहनीय रही। उन्हें ‘ग्रीन MLA’ के रूप में भी जाना जाता था, क्योंकि पर्यावरण मुद्दों पर उन्होंने हमेशा कड़ा रुख अपनाया।  2021 में UDF की करारी हार के बाद कांग्रेस हाई कमान ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया और उन्होंने पिनराई विजयन सरकार को मजबूत विपक्ष की चुनौती दी।

आगे का कार्यक्रम

नवनिर्वाचित MLA 21 मई को शपथ लेंगे, स्पीकर का चुनाव 22 मई को होने की संभावना है, राज्यपाल का नीतिगत अभिभाषण 29 मई को और राज्य बजट 5 जून तक पेश किए जाने की उम्मीद है।  केरल की जनता ने एक दशक बाद वामपंथी सरकार को सत्ता से हटाकर कांग्रेस नीत UDF पर विश्वास जताया है। अब सारी निगाहें इस बात पर होंगी कि सथीसन सरकार विकास, रोजगार और सुशासन के मोर्चे पर कितना खरा उतरती है।​​​​​​​​​​​​​​​​

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