एयर इंडिया हादसा, पायलट के हाथ थे कंट्रोल पर, चश्मदीद के खुलासे से जाँच में नया मोड़

मृतकों के परिजन रोमिन वाहोरा के बयान ने पायलट सुसाइड थ्योरी को दी चुनौती, नए तकनीकी साक्ष्य भी कर रहे हैं समर्थन, एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 हादसे को लेकर एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पिछले साल 12 जून 2025 को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के महज़ 32 सेकंड बाद बोइंग 787 ड्रीमलाइनर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में विमान के 242 में से 241 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए थे, साथ ही ज़मीन पर भी 19 लोगों की जान गई थी। अब इस दुर्घटना में अपने भाई, तीन साल की भतीजी और मौसी को खोने वाले रोमिन वाहोरा के बयान ने जाँच को नई दिशा दे दी है।

“स्टीयरिंग की तरह पकड़े थे हाथ”

रोमिन वाहोरा ने बताया कि वह बीजे मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मॉर्चरी में अपनी भतीजी का पार्थिव शरीर तलाश रहे थे, तभी कैप्टन सुमीत सभरवाल का शव वहाँ लाया गया। “मैं कैप्टन सुमीत के शव के पास कुछ ही फ़ीट की दूरी पर था जब उन्हें अंदर लाया गया,” उन्होंने कहा। उनके अनुसार कैप्टन का शव बैठे हुए की मुद्रा में था और “उनके हाथ किसी कार की स्टीयरिंग जैसे एक हैंडल पर थे।”  डेली मेल को दिए साक्षात्कार में वाहोरा ने कहा कि उन्होंने मॉर्चरी के अंदर जो दृश्य देखे, वे “कभी नहीं भुलाए जा सकते।” उनके बयान को विशेषज्ञ महत्वपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि यह इस बात की ओर संकेत करता है कि कैप्टन सभरवाल अंतिम क्षणों तक विमान को बचाने की कोशिश में लगे थे न कि जानबूझकर दुर्घटना कराने में।

हादसे की पृष्ठभूमि

12 जून 2025 को दोपहर 1:38 बजे एयर इंडिया फ्लाइट 171 अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए 230 यात्रियों और 12 चालक दल के सदस्यों के साथ रवाना हुई। उड़ान भरने के लगभग 40 सेकंड बाद बोइंग 787 ड्रीमलाइनर के दोनों इंजन बंद पड़ गए और विमान बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल पर जा गिरा। विमान में मौजूद 242 लोगों में से केवल एक यात्री — 40 वर्षीय ब्रिटिश-भारतीय नागरिक विश्वासकुमार रमेश — बच पाए।

पायलट सुसाइड थ्योरी बनाम तकनीकी खराबी

प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट में पाया गया कि उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद ही दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच “RUN” से “CUTOFF” पोजिशन पर आ गए, जिससे दोनों इंजन एक-एक सेकंड के अंतर में बंद हो गए। ब्लैक बॉक्स की आवाज़ में एक पायलट दूसरे से पूछता सुना गया — “तुमने फ्यूल क्यों काटा?” — जिसके जवाब में दूसरे ने कहा, “मैंने नहीं काटा।”

इंडिया की सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन (SMF) के विशेषज्ञों ने अपने विश्लेषण में पाया कि RAT (Ram Air Turbine) फ्यूल स्विच के CUTOFF पोजिशन पर आने से 2.5 सेकंड पहले ही तैनात हो गई थी। यह इस बात का संकेत है कि विमान के उड़ते ही कोई तकनीकी खराबी उत्पन्न हुई, न कि पायलट के किसी जानबूझकर कदम के कारण हादसा हुआ।  इसके अलावा फरवरी 2026 में एयर इंडिया के एक अन्य बोइंग 787-8 में लंदन हीथ्रो से बेंगलुरु की उड़ान से पहले ज़मीन पर ही फ्यूल स्विच दो बार RUN से CUTOFF पोजिशन पर चली गई, जिसके बाद उस विमान को जाँच के लिए ग्राउंड कर दिया गया।

FAA की पुरानी चेतावनी और एयर इंडिया की चूक

सात साल पहले, दिसंबर 2018 में अमेरिकी Federal Aviation Administration (FAA) ने बोइंग 787-8 सहित कुछ विमानों के फ्यूल कटऑफ स्विच में संभावित खराबी की चेतावनी देते हुए एक विशेष बुलेटिन जारी किया था। यह बुलेटिन सलाहकारी था, अनिवार्य नहीं — और एयर इंडिया के अपने ही बयानों के अनुसार, सुझाई गई जाँच कभी नहीं की गई।

जाँच की समयसीमा पर दबाव

ICAO के नियमों के तहत हादसे के 12 महीने के भीतर अंतिम जाँच रिपोर्ट प्रकाशित करनी होती है। हादसा 12 जून को हुआ था, यानी समयसीमा दो महीने से भी कम बची है। अभी तक कोई अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

पायलट संगठनों का विरोध

इंडिया कमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन (ICPA) ने पायलट सुसाइड की थ्योरी की कड़े शब्दों में निंदा की है। संगठन ने कहा कि बिना पुख्ता सबूत के इस तरह की अटकलें लगाना नैतिक पत्रकारिता का घोर उल्लंघन है और पायलटों के पेशे की गरिमा को ठेस पहुँचाता है।

निष्कर्ष

एयर इंडिया क्रैश की जाँच अभी जारी है। एक तरफ चश्मदीद गवाह का बयान और दूसरी तरफ तकनीकी विशेषज्ञों के नए साक्ष्य — दोनों मिलकर पायलट सुसाइड थ्योरी को कमज़ोर करते दिख रहे हैं। अब सारी निगाहें AAIB की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो अगले दो महीनों में आनी है।​​​​​​​​​​​​​​​​

यह भी पढ़ें: दशक बाद केरल में कांग्रेस की वापसी, वी.डी. सथीसन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, UDF का भव्य शक्ति-प्रदर्शन 

यहां से शेयर करें