बंगाल चुनाव या जंग: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. ए.पी. सिंह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर जमकर निशाना साधा है। एक विशेष चर्चा और प्रेस इंटरैक्शन में उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी अपने मूल नारे ‘मां, माटी, मानुष’ से पूरी तरह भटक चुकी हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल कांड के बाद राज्य में महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा पूरी तरह समाप्त हो गया है। सिंह ने कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि यहां तक कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) जांच करने गए न्यायाधीशों को भी बंधक बनाने की घटनाएं सामने आई हैं।
डॉ. ए.पी. सिंह ने टीएमसी की तुष्टिकरण की राजनीति पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जहां अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ, वहीं बंगाल में बाबरी मस्जिद की रेप्लिका बनाने की कोशिश की जा रही है, जो विभाजनकारी सोच को बढ़ावा देता है। कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की रेप्लिका बनाने का ऐलान किया था, जिसके बाद टीएमसी ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया। सिंह ने इसे टीएमसी की वोट बैंक पॉलिटिक्स का हिस्सा बताया।
उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा ममता बनर्जी को 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए ‘एडवांस’ बधाई देने पर भी कटाक्ष किया और कहा, “ये नेता सिर्फ वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं।” सिंह ने ममता बनर्जी द्वारा रेप पीड़ितों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि महिला की गरिमा को पैसों से नहीं तौला जा सकता।
वरिष्ठ वकील ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 33 प्रतिशत महिला आरक्षण बिल की सराहना की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस पहल से महिलाओं को सशक्तिकरण मिल रहा है, जबकि बंगाल में स्थिति उलट है। अंत में उन्होंने भविष्यवाणी की कि ममता बनर्जी को चुनाव हारना चाहिए और विपक्ष में बैठकर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से सीखें कि महिलाओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।
सनोज मिश्रा मामले में सत्य की जीत: ए.पी. सिंह ने कोर्ट का शुक्रिया अदा किया
इसी दौरान डॉ. ए.पी. सिंह ने फिल्म डायरेक्टर सनोज मिश्रा के मामले में भी बड़ी राहत की घोषणा की। उन्होंने बताया कि दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट की सेशन जज श्रेया अरोड़ा मेहता ने FIR नंबर 372/25 (थाना नबी करीम) में सनोज मिश्रा को सारे आरोपों से डिस्चार्ज कर दिया है और बाइज्जत बरी कर दिया है। सिंह ने कहा, “सत्य परेशान हुआ, पराजित नहीं हुआ।”
सनोज मिश्रा, जिन्होंने ‘द मणिपुर डायरी’ और ‘द वेस्ट बंगाल डायरी’ जैसी फिल्में बनाई हैं, ने मीडिया से कहा कि पिछले साल उन पर झूठा रेप का केस दर्ज किया गया था। मीडिया ने मसाला जोड़कर खबरें चलाईं, लेकिन एक साल के अंदर कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। मिश्रा ने मीडिया बंधुओं से अपील की कि अब कम से कम इस खबर को भी उसी तवज्जो से चलाएं, जिससे उनकी गिरफ्तारी की खबरें चली थीं, ताकि लोगों के दिमाग से गलतफहमी दूर हो सके।
पृष्ठभूमि और ताजा संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों की सरगर्मी चरम पर है। आरजी कर कांड अभी भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और ममता सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची हुई है। हुमायूं कबीर का बाबरी मस्जिद रेप्लिका वाला विवाद (दिसंबर 2025) राज्य की राजनीति में नया तीखापन लाया था। अखिलेश यादव ने हाल ही में ममता को बधाई देते हुए भाजपा के खिलाफ ‘साजिश’ का आरोप लगाया था। डॉ. ए.पी. सिंह आरजी कर मामले में आरोपी संजय रॉय के वकील भी रह चुके हैं और बंगाल की कानून-व्यवस्था पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनकी टिप्पणियां विपक्षी दलों, खासकर भाजपा के हमलों को और तेज कर सकती हैं। बंगाल की जनता अब देख रही है कि ‘मां-माटी-मानुष’ का नारा कितना प्रासंगिक बचा है, जबकि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर सवाल लगातार उठ रहे हैं। 2026 के चुनावों में महिला सुरक्षा, तुष्टिकरण और विकास मुद्दे प्रमुख रहने वाले हैं।

