ED looms over TMC’s ‘Mission 250: आई-पैक डायरेक्टर गिरफ्तार, डेटा-स्ट्रैटेजी पर सवाल, ममता बैनर्जी तीन फिटनेस ट्रैकर पहने नजर आईं

ED looms over TMC’s ‘Mission 250: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान) से ठीक 10 दिन पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की चुनावी रणनीति पर भारी संकट मंडरा रहा है। पार्टी की ‘मिशन 250’—294 सीटों में से 250 जीतने का लक्ष्य—डेटा और बूथ-लेवल स्ट्रैटेजी पर टिकी है, लेकिन उसके प्रमुख पोल स्ट्रैटेजिस्ट इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (आई-पैक) के डायरेक्टर विनेश चंदेल को ईडी ने सोमवार (13 अप्रैल) को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही, ममता बनर्जी की एक तस्वीर वायरल हो गई है जिसमें वे तीन फिटनेस ट्रैकर (व्हूप, ऐपल वॉच और ओउरा रिंग) पहने नजर आ रही हैं। यह तस्वीर पार्टी की ‘डेटा-ड्रिवन’ छवि को और मजबूत करती दिख रही है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे संयोग से ज्यादा चुनावी जंग का प्रतीक मान रहे हैं।

‘मिशन 250’: डेटा और बूथ-वार मोबिलाइजेशन की नई रणनीति

टीएमसी ने 2021 के 215 सीटों के रिकॉर्ड को पार करते हुए 250 सीटों का लक्ष्य रखा है। अब्बास बैनर्जी के मुताबिक, यह 2021 के नतीजों की समीक्षा और 2024 लोकसभा चुनावों के ट्रेंड पर आधारित है। पार्टी ने 29 लोकसभा क्षेत्रों (जिनमें टीएमसी ने जीत हासिल की) और 100 से ज्यादा मार्जिनल असेंबली सीटों (2021 में 15,000 वोट से कम अंतर) पर फोकस किया है।

रणनीति का केंद्र डेटा एनालिटिक्स है:

सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में वॉर रूम बने हैं, जहां 20 सदस्यीय टीम (कोऑर्डिनेटर और डेटा एंट्री ऑपरेटर) काम कर रही है। एक लाख से ज्यादा ‘शैडो एजेंट’ बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) और वोटर लिस्ट (SIR रिवीजन) पर नजर रख रहे हैं। SIR में कई सीटों पर वोटर डिलीशन 2021 के मार्जिन से ज्यादा हो चुका है। हर बूथ पर हफ्ते में 2-3 माइक्रो मीटिंग्स, चाय स्टॉल और लोकल क्लस्टर पर रोजाना संपर्क। लक्षित आउटरीच: किसान, महिलाएं, बुजुर्ग, SC/ST समुदाय। सांस्कृतिक टूल्स: ‘10 प्रतिज्ञाएं’ वाली स्नेक एंड लैडर गेम बोर्ड और बंगाली ‘अस्मिता’ पर आधारित पांचाली स्टाइल स्टोरीटेलिंग। पार्टी अब बड़े रैलियों की बजाय ग्रासरूट ‘छोटी सभाओं’ पर जोर दे रही है। ममता बनर्जी ने 226 सीटों का लक्ष्य बताया था, लेकिन अब्बास बैनर्जी ने इसे 250 तक बढ़ाने का आह्वान किया।

आई-पैक पर ED का शिकंजा: 6 गंभीर आरोप, टीएमसी का डेटा ‘साइज’?

आई-पैक टीएमसी का प्रमुख पोल स्ट्रैटेजिस्ट है, जिसने पार्टी की 360 डिग्री चुनावी कैंपेन और आईटी सेल को संभाला है। ईडी ने विनेश कुमार चंदेल (33% शेयरधारक और फाउंडिंग डायरेक्टर) को कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें 10 दिन की ईडी कस्टडी दे दी।

ईडी के 6 मुख्य आरोप (रिमांड एप्लीकेशन में):

  1. रसीदों का विभाजन (50% चेक, बाकी कैश) — चुनावी खर्च और पब्लिक परसेप्शन के लिए अनएकाउंटेड फंड।
  2. शैम लोन (₹13.50 करोड़) — कोई एग्रीमेंट या कमर्शियल रेशनल नहीं।
  3. फर्जी इनवॉइस — तीसरे पक्ष से फंड को वैध दिखाने के लिए।
  4. हवाला के जरिए लेयरिंग — MCOCA जांच में खुलासा।
  5. प्रोसीड्स ऑफ क्राइम (PoC) का जनरेशन और छिपाना (कुल ₹50 करोड़ डिटेक्ट)।
  6. फरार होने का खतरा — चंदेल के विदेश यात्राओं का हवाला।

ईडी ने आई-पैक के कोलकाता ऑफिस और सहयोगियों के ठिकानों पर छापे मारे थे। टीएमसी का आरोप है कि एजेंसी ने पार्टी का चुनावी डेटा और स्ट्रैटेजी ‘छीन’ ली। अब्बास बैनर्जी ने X पर लिखा, “चुनाव से 10 दिन पहले यह लेवल प्लेइंग फील्ड को हिला रहा है… विपक्ष के साथ काम करने वाले अगला टारगेट हो सकते हैं।” टीएमसी इसे ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’ बता रही है, जबकि ईडी इसे शुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग जांच कह रहा है।

ममता का ‘फुल वियरेबल इकोसिस्टम’: डेटा पर जोर का प्रतीक?

इसी बीच, ममता बनर्जी की एक तस्वीर (सफेद साड़ी में बच्चे को गोद में लिए) सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। वे एक साथ Whoop (24×7 रिकवरी ट्रैकर)Apple Watch Ultra 3 (वर्कआउट और GPS) और Oura Ring 4 (स्लीप और रेडीनेस स्कोर) पहने नजर आईं। फिटनेस कोच अभिषेक सिंघल ने इसे ‘डेटा-साइंस’ का उदाहरण बताया।

विशेषज्ञों के मुताबिक, तीनों डिवाइस एक-दूसरे के पूरक हैं—कोई ओवरलैप नहीं। ममता की व्यस्त दिनचर्या (रैलियां, मीटिंग्स) को देखते हुए यह ‘नॉट अनयूजुअल’ है। पार्टी सूत्र इसे उनकी ‘डेटा-ड्रिवन’ लीडरशिप का प्रतीक बता रहे हैं, जो बूथ-लेवल स्ट्रैटेजी से मेल खाता है।

चुनावी माहौल गर्म

पश्चिम बंगाल में SIR वोटर लिस्ट रिवीजन, BJP vs TMC की टाइट रेस और अब आई-पैक विवाद ने माहौल तप्त कर दिया है। टीएमसी का दावा है कि उसकी डेटा-बेस्ड तैयारी BJP को मात देगी, लेकिन ईडी की कार्रवाई ने ‘फेयर प्ले’ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ‘मिशन 250’ बाधित होगी या डेटा की ताकत इसे और मजबूत करेगी? 23 अप्रैल को पहले चरण के साथ जवाब मिल जाएगा। फिलहाल, टीएमसी ‘बंगाली अस्मिता’ और वेलफेयर स्कीम्स के साथ मैदान में है, जबकि केंद्र एजेंसियां ‘साफ-सुथरी चुनाव’ का दावा कर रही हैं।

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