टाटा की आईफोन पार्ट्स फैक्ट्री पर प्रदूषण का साया: तमिलनाडु में किसानों की फसलों और भूजल को खतरा, सर्वे शुरू

ऐपल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की होसुर स्थित आईफोन कंपोनेंट्स फैक्ट्री पर जल प्रदूषण का गंभीर आरोप लगने के बाद स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमों ने आसपास के खेतों का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी ने उनके कुओं का भूजल दूषित कर दिया है, जिससे फसलें प्रभावित हो रही हैं और पैदावार घटी है।

तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) ने 25 मई 2026 को जारी नोटिस में टाटा को चेतावनी दी थी कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो फैक्ट्री को बंद किया जा सकता है। बोर्ड की दिसंबर 2025 से मई 2026 तक की पांच बार की जांच में पाया गया कि फैक्ट्री के अंदर बने रेनवाटर हार्वेस्टिंग पॉन्ड में वेस्टवाटर डिस्चार्ज किया जा रहा था, जो ओवरफ्लो होकर आसपास के कृषि क्षेत्रों और खुले कुओं में फैल गया। इससे भूजल दूषित होने का आरोप है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार (15 जून) को जिला प्रशासन के तीन अधिकारियों की टीम ने फैक्ट्री के पीछे खेतों में किसानों के साथ सर्वे किया। जिला अधिकारी एन. वेलु ने कहा, “हम स्थिति का आकलन कर रहे हैं।” किसान पी. पुष्पराज ने शिकायत दर्ज कराई है कि फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा और बदबूदार पानी उनकी फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने बताया, “हम खेती तो जारी रखे, लेकिन सही पैदावार नहीं मिल रही।” टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि उसकी स्वतंत्र जांच में सभी पर्यावरणीय मानदंडों का पालन पाया गया है। कंपनी पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है। हालांकि, टाटा और ऐपल ने इस मामले पर तुरंत विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी।

ऐपल की भारत में चुनौतियां बढ़ीं

यह घटना ऐपल के लिए भारत में सप्लाई चेन को चीन से हटाने (China Plus One) की रणनीति में नई चुनौती बन गई है। होसुर प्लांट आईफोन के बैक पैनल और अन्य कंपोनेंट्स बनाता है। इससे पहले सितंबर 2024 में इसी प्लांट में आग लगने से उत्पादन प्रभावित हुआ था। 2023 में पूर्व आपूर्तिकर्ता पेगाट्रॉन के प्लांट में भी आग की घटना हुई थी। इसके अलावा, फॉक्सकॉन जैसे अन्य आपूर्तिकर्ताओं पर भी श्रम और अन्य मुद्दे सामने आए हैं। किसानों की शिकायतें कई महीनों से चली आ रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री का पानी खुले चैनल से निकलकर खेतों और झीलों की ओर जाता है, जिससे मिट्टी और पानी दोनों प्रभावित हो रहे हैं। TNPCB की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि पॉन्ड से ओवरफ्लो होने वाले पानी ने आसपास के कुओं के भूजल को दूषित किया है।

स्थानीय प्रभाव और आगे की कार्रवाई

होसुर बेंगलुरु से करीब 40 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है और तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में आता है। यह क्षेत्र पहले से ही औद्योगिक विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच संघर्ष का गवाह रहा है। स्थानीय किसान अब मुआवजे और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फैक्ट्री बंद हुई तो ऐपल की भारत में आईफोन उत्पादन बढ़ाने की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। टाटा ग्रुप भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, लेकिन ऐसे पर्यावरणीय मुद्दे कंपनियों की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह जांच नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और फिलहाल फैक्ट्री का संचालन सामान्य है। TNPCB अब टाटा के जवाब की समीक्षा कर रहा है। आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला औद्योगिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आजीविका के बीच संतुलन की जरूरत को दोबारा याद दिलाता है। स्थानीय प्रशासन और कंपनी दोनों को मिलकर स्थायी समाधान निकालने की उम्मीद है, ताकि रोजगार और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहें।

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