Northeast India faces a dual challenge: उत्तर-पूर्व के दो राज्यों में आज अलग-अलग मंजर देखने को मिल रहे हैं। एक ओर सिक्किम में भारी बर्फबारी से फंसे पर्यटकों को भारतीय सेना ने बहादुरी से बचाया, वहीं मणिपुर में 2023 से चली आ रही मैतेई-कुकी जातीय हिंसा के साए में नई सरकार बनने के बावजूद तनाव कम नहीं हुआ है। एक स्थानीय संपादक पर गोली चलाई गई, मैतेई-कुकी कपल्स की जिंदगी और मुश्किल हुई, और कुकी-जो समुदाय के कुछ संगठन नई डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन के खिलाफ सड़कों पर हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, स्थिति तनावपूर्ण लेकिन बड़े पैमाने पर नई हिंसा नहीं हुई है।
सिक्किम में सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन:
आज (23 फरवरी) सुबह पूर्वी सिक्किम के चांग्गू नाथू ला क्षेत्र, त्सांगू और शेरेथांग बेल्ट में अचानक भारी बर्फबारी हुई। इससे करीब 350 पर्यटक वाहन सिप्सू और 16वें मील के पास फंस गए। भारतीय सेना ने तुरंत ‘ऑपरेशन हिमराहत’ शुरू किया। पुलिस, जीआरईएफ और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर सेना ने 46 पर्यटकों (महिलाओं और बच्चों सहित) को सुरक्षित निकाला और उन्हें 17वें मील के आर्मी ट्रांजिट कैंप में शिफ्ट किया। साथ ही 150 वाहनों को भी सुरक्षित जगह पहुंचाया।
सेना ने मौके पर मेडिकल मदद, गर्म खाना और राहत सामग्री दी। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि 24 फरवरी तक उत्तर और पूर्वी सिक्किम में बर्फबारी और बारिश जारी रह सकती है। जलवायु परिवर्तन को इस असामान्य जनवरी-फरवरी बर्फबारी का कारण बताया जा रहा है। ऑपरेशन अभी भी जारी है और मौसम सुधरने पर वाहन आवागमन बहाल होगा।
मणिपुर में तनाव के तीन पहलू: मणिपुर में फरवरी 2026 की शुरुआत नई बीजेपी सरकार के गठन के साथ हुई। 4 फरवरी को मैतेई समुदाय के युम्नम खेमचंद सिंह मुख्यमंत्री बने, नागा समुदाय के लोसिई दिक्खो और कुकी समुदाय की नेमचा किपगेन (थाडो कनेक्शन वाली) डिप्टी सीएम बनीं। मकसद था तीनों प्रमुख समुदायों को साथ लाना, लेकिन कुकी-जो संगठनों ने इसे नाकामयाब बताया। कुकी-जो ट्राइबल लीडर्स काउंसिल और कुछ रैडिकल ग्रुप्स (जैसे कुकी लिबरेशन आर्मी) ने नेमचा किपगेन की नियुक्ति का विरोध किया। उनका कहना है कि मैतेई सीएम के नेतृत्व वाली सरकार में कोई कुकी नेता नहीं शामिल होना चाहिए। चुराचांदपुर में विरोध प्रदर्शन हुए, कुछ जगहों पर सुरक्षा बलों से झड़पें हुईं। उखरुल जिले में नगा-कुकी तनाव बढ़ा, घरों में आगजनी हुई, इंटरनेट 5 दिन बंद रहा और कर्फ्यू लगा। थाडो समुदाय ने नेमचा का समर्थन किया, लेकिन व्यापक कुकी-जो विरोध जारी है। ताजा अपडेट: मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने 22 फरवरी को अमित शाह से मुलाकात की, जहां विस्थापितों की वापसी और शांति पर चर्चा हुई। नेमचा किपगेन अभी भी अपने कांगपोकपी घर से काम कर रही हैं।
एक हत्या ने मैतेई-कुकी कपल्स की जिंदगी बदल दी:
जनवरी 2026 में चुराचांदपुर (कुकी इलाका) में एक घटना ने अंतर-सामुदायिक रिश्तों पर गहरा असर डाला। नेपाल में काम करने वाले 31 वर्षीय मैतेई युवक मयांग्लंबम रिशिकांत सिंह अपनी कुकी मंगेतर चिंग्नु हाओकिप से मिलने गुप्त रूप से गए थे। 21 जनवरी को दोनों को अगवा कर लिया गया। रिशिकांत को कैमरे के सामने घुटनों पर बैठाकर गोली मार दी गई, वीडियो वायरल हुआ। चिंग्नु को पीटकर गाड़ी से फेंक दिया गया, वह गंभीर सदमे में हैं।
2023 की हिंसा (250+ मौतें, 60,000 विस्थापित) के बाद कई मैतेई-कुकी कपल्स अलग हो गए थे। 2025 के अंत में कुछ जोड़े मिलने की योजना बना रहे थे, लेकिन इस हत्या ने उम्मीदें तोड़ दीं। इम्फाल घाटी में मैतेई पत्नियां कुकी पति से, और पहाड़ी इलाकों में कुकी परिवारों में मैतेई बहुओं की स्थिति नाजुक हो गई। उदाहरण: 70 वर्षीय कुकी पादरी थोग्ज़ाम हाओकिप और उनकी 50 वर्षीय मैतेई पत्नी किम (30 साल से शादीशुदा) अब भी डर में जी रहे हैं। बफर जोन अब सख्त सीमाएं बन गए हैं।
पत्रकार पर हमला और मीडिया की चिंता: 18 फरवरी की रात करीब 10 बजे इम्फाल पूर्व जिले के हट्टा कब्रिस्तान के पास स्थानीय वर्नाक्यूलर दैनिक ‘नाहरोलगी थौदांग’ के एडिटर-इन-चीफ खोइरोम लोयालकपा (खोइराम लोयालकपा) पर हमला हुआ। अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने उनकी कार रोकी, बाईं खिड़की पर दो गोलियां चलाईं, पिछली शीशा तोड़ा और पीटा। नाक से खून बहा, अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। पोरोम्पाट/हिंगांग पुलिस स्टेशन में केस दर्ज, दो .32 कैलिबर के खाली कारतूस बरामद। मोटिव अज्ञात, कोई गिरफ्तारी नहीं। 20 फरवरी को ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन (AMWJU) और एडिटर्स गिल्ड ऑफ मणिपुर ने इम्फाल में धरना दिया, सीएम से पत्रकारों की सुरक्षा की मांग की।
कुल मिलाकर स्थिति: सिक्किम में सेना की त्वरित कार्रवाई ने पर्यटकों की जान बचाई, लेकिन मौसम अभी चुनौतीपूर्ण है। मणिपुर में नई सरकार के बावजूद बफर जोन, अलगाव और अविश्वास बरकरार है। कुकी-जो अलग प्रशासन की मांग और मैतेई ST स्टेटस विवाद जड़ में हैं। केंद्र और राज्य सरकार शांति प्रयास कर रही है, लेकिन पत्रकार हमला और पुरानी हत्याओं के असर से मीडिया और आम लोग चिंतित हैं। उत्तर-पूर्व की ये खबरें याद दिलाती हैं कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटना जितना जरूरी है, उतना ही सामाजिक सद्भाव बहाल करना। आगे की अपडेट पर नजर रखी जा रही है।

