दहेज का दानव: दीपिका की चीख और न्याय का इंतज़ार, छत से फेंकी गई बेटी, पाँच गिरफ्तार पर क्या अदालत देगी इंसाफ?

हर 92 मिनट में एक दीपिका मरती और बिकता न्याय

रात के करीब साढ़े बारह बज रहे थे। ग्रेटर नोएडा के जलपुरा गाँव में एक तीन मंजिला मकान की छत से एक चीख उठी और फिर सन्नाटा। 17 मई 2026 की देर रात, तीसरी मंजिल से गिरने या गिराए जाने के कारण 24 वर्षीय दीपिका नागर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। दीपिका नागर की शादी 11 दिसंबर 2024 को हुई थी, यानी महज 17 महीने में एक सपना चकनाचूर हो गया, एक जिंदगी खत्म हो गई और एक परिवार उजड़ गया।

एक करोड़ दिया, फिर भी माँगा फॉर्च्यूनर और 50 लाख

दीपिका के पिता संजय नागर ने बताया कि उन्होंने बेटी की शादी में करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए थे। लेकिन दहेज का लालच कहाँ रुकता है? परिवार के मुताबिक इसके बावजूद ससुराल पक्ष की ओर से लगातार अतिरिक्त दहेज की माँग जारी थी। आरोप है कि दीपिका पर फॉर्च्यूनर कार और 50 लाख रुपये लाने का दबाव बनाया जा रहा था और इसके लिए उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। दीपिका की मौसी बैजू नागर ने बताया कि 13 मई को आयोजित गृह प्रवेश कार्यक्रम के दौरान दीपिका काफी उदास नजर आई थी। परिजनों ने उसे समझाकर धैर्य रखने की सलाह दी थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो जाएगी।

पुलिस का ‘फास्ट एक्शन’ — पाँच गिरफ्तार, पर जाँच अभी भी अधूरी

इस मामले में पुलिस ने अपेक्षाकृत तेज़ कार्रवाई की। 17 मई को इकोटेक-3 थाने में एफआईआर दर्ज की गई। मृतका का पति ऋतिक और ससुर मनोज पहले गिरफ्तार किए गए, और बाद में सास पूनम और चचिया ससुर विनोद को भी गिरफ्तार किया गया। अंत में फरार चल रहा चचिया ससुर प्रमोद भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और न्यायालय में सख्त पैरवी कर आरोपियों को कड़ी सजा दिलवाई जाएगी। लेकिन गिरफ्तारी और सजा के बीच का फासला भारत में बेहद लंबा है।

न्याय की राह: कितनी लंबी, कितनी कठिन?

दीपिका के परिवार के सामने असली लड़ाई अब शुरू होती है, अदालत में। और यहाँ आँकड़े दिल को डुबो देते हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 के तहत तब दहेज मृत्यु का मामला दर्ज किया जाता है जब किसी महिला की शादी के सात साल के भीतर अस्वाभाविक परिस्थितियों में मौत हो जाए और उसकी मौत से पहले दहेज को लेकर प्रताड़ना के सबूत मिलें। 1,000 दर्ज मामलों में केवल 179 केसों की सुनवाई पूरी हुई और उनमें से भी महज 128 मामलों में सजा सुनाई गई। यानी दर्ज होने वाले हर 1,000 मामलों में से केवल 128 में आरोपी को कोई सजा मिलती है। 2021 के NCRB डेटा के अनुसार, 6,589 दहेज हत्या के मामले दर्ज हुए लेकिन उस साल केवल 34 प्रतिशत मामलों का ही ट्रायल पूरा हो सका। पश्चिम बंगाल में केवल 4.6 प्रतिशत और असम में 5 प्रतिशत मामलों में सजा हुई, जबकि केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना में दोषसिद्धि की दर शून्य रही।

हर 92 मिनट में एक दीपिका — देश की बेटियों का हाल

दीपिका अकेली नहीं है। वह एक संख्या भी है, एक क्रूर, दर्दनाक संख्या। NCRB के मुताबिक भारत में हर 92 मिनट में एक बेटी को दहेज के लिए मार दिया जाता है। NCRB 2024 के आँकड़ों के अनुसार, भारत में दहेज से संबंधित 5,737 मौतें हुईं, जिनमें उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए। दिल्ली लगातार पाँचवें साल दहेज हत्याओं के मामले में शीर्ष पर रही है। वर्ष 2024 में दिल्ली में दहेज हत्या के 109 मामले दर्ज किए गए जिनमें कुल 111 महिलाओं की मौत हुई।

दीपिका अकेली नहीं — ट्विशा, निक्की और न जाने कितनी…

इसी दौर में मध्य प्रदेश के भोपाल में ट्विशा शर्मा की दहेज हत्या ने देश को झकझोर दिया। सीबीआई ने ट्विशा शर्मा मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है और भोपाल के कटारा हिल्स थाने में दर्ज एफआईआर को दोबारा पंजीकृत करते हुए जांच शुरू कर दी है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने आरोपी सास पूर्व जज गिरीबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त कर दी है। वहीं ग्रेटर नोएडा में ही एक और मामला निक्की भाटी सामने आया जहाँ न्याय की जगह पंचायत में समझौते की बात चली और पिता से कोर्ट में शपथपत्र दाखिल कर केस वापस लेने की शर्त रखी गई।  यह उस व्यवस्था का सबसे दर्दनाक चेहरा है जहाँ न्याय, दबाव और पैसे के सामने घुटने टेक देता है।

क्या दीपिका को मिलेगा न्याय?

पाँच आरोपी सलाखों के पीछे हैं। एफआईआर दर्ज है। चार्जशीट की तैयारी है। लेकिन भारत की अदालतों में लाखों मामले वर्षों से लंबित हैं। NCRB 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है लेकिन बलात्कार के मामलों में सजा की दर मात्र 24.4 प्रतिशत और अपहरण के मामलों में 26.8 प्रतिशत ही है। दीपिका के पिता संजय नागर के पास अभी उम्मीद है। पुलिस का आश्वासन है। लेकिन क्या यह उम्मीद अदालत की लंबी राह में दम तोड़ देगी जैसा हजारों मामलों में हुआ है?

समाज का आईना, कानून का तकाजा

दहेज निषेध अधिनियम 1961 से लागू है यानी 65 साल हो गए। भारतीय दंड संहिता में धारा 304-B बनी, अब नई न्याय संहिता में धारा 80 है। कानून बने, सज़ाएँ तय हुईं फिर भी आँकड़े दिखाते हैं कि दहेज हत्या की रफ्तार कम होने के बजाय समाज के कई हिस्सों में यह प्रथा अब भी गहराई से मौजूद है। दीपिका की आत्मा को तब शांति मिलेगी जब न सिर्फ पाँचों आरोपियों को सख्त सजा मिले, बल्कि जब इस देश में हर 92 मिनट पर होने वाली एक और ‘दीपिका’ की मौत को रोका जा सके। यह सिर्फ एक मामले का नहीं, पूरी व्यवस्था के आत्मनिरीक्षण का सवाल है।

संबंधित तथ्य एक नज़र में:

वर्ष 2024 में दर्ज दहेज हत्याएँ  5,737 | प्रतिदिन लगभग 16 | हर 92 मिनट में 1 मौत | दोषसिद्धि दर  42% से भी कम | दिल्ली लगातार 5वें साल शीर्ष पर | दीपिका नागर मामले में गिरफ्तार 5 आरोपी

यह भी पढ़ें: नोएडा में पत्रकारों के लिए होगा विशेष प्रीमियर, निर्देशक जैगम इमाम स्वयं मौजूद रहकर साझा करेंगे पर्दे के पीछे की कहानियाँ

यहां से शेयर करें