विक्रमशिला सेतु का 33 मीटर हिस्सा गंगा में समाया, बिहार की ‘लाइफलाइन’ पर संकट

भागलपुर-सीमांचल के बीच यातायात पूरी तरह ठप, पुलिस की सतर्कता से टला बड़ा हादसा प्रशासन ने मुंगेर-सुल्तानगंज मार्ग का रुख करने की सलाह दी। बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु का एक बड़ा हिस्सा रविवार की देर रात भरभराकर गंगा में समा गया। पिलर नंबर 133 के पास पुल का करीब 33 मीटर का हिस्सा अचानक गंगा नदी में गिर गया, जिसके बाद प्रशासन ने पुल पर यातायात पूरी तरह बंद कर दिया। यह हादसा उस वक्त हुआ जब रात का सन्नाटा था और यही वजह रही कि एक बड़ी जनहानि टल गई।

कैसे हुआ हादसा — पल-पल की दास्तान

रविवार की रात करीब 11:33 बजे स्थानीय लोगों और पुल पर तैनात पुलिसकर्मियों ने देखा कि पिलर नंबर 133 नदी की तलहटी में धंसने लगा है। स्थिति तेज़ी से बिगड़ी और 11:55 बजे तक पिलर खतरनाक कोण पर झुक चुका था। सतर्क पुलिसकर्मियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। रिपोर्टों के अनुसार शाम को पहले एक 10 इंच का एक्सपेंशन जॉइंट धंसा, इसके बाद देर रात पिलर नंबर 133 के पास का स्लैब अचानक गंगा में जा गिरा। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने बताया कि रात 12:35 बजे पिलर धंसना शुरू हुआ और रात करीब 1:00 बजे पुल का एक बड़ा हिस्सा गंगा में समा गया। डीएम ने कहा “हमारे स्थानीय अधिकारी और एसएचओ की सूझबूझ से लोगों को पहले ही हटा लिया गया। जैसे ही लोगों को निकाला गया, ठीक 15 मिनट बाद स्लैब गंगा में गिर गया। उस वक्त उस स्लैब पर एक भी वाहन नहीं था।”

प्रशासन का त्वरित एक्शन — बड़ा हादसा टला

भागलपुर रेंज के आईजी विवेक कुमार, एसएसपी प्रमोद कुमार यादव और नवगछिया एसपी राजेश कुमार ने तत्काल पुल पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी। पुल को सफलतापूर्वक खाली करा लिया गया — और यह सब अंतिम धसान से महज एक घंटे पहले हो गया। जिलाधिकारी ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से विक्रमशिला सेतु पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है, पुल के दोनों छोर पर बैरिकेडिंग की गई है और तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम को जांच के लिए बुलाया गया है।

बिहार की ‘लाइफलाइन’ — जानिए इस पुल की अहमियत

वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा उद्घाटित यह पुल करीब 4.7 किलोमीटर लंबा है और भागलपुर को कोसी-सीमांचल सहित राज्य के कई हिस्सों से जोड़ता है। विक्रमशिला सेतु पर रोज़ाना 30,000 से अधिक वाहनों की आवाजाही होती है और यह पुल भागलपुर को 16 जिलों से जोड़ता है, जिनमें सीमांचल के जिले भी शामिल हैं। इसके बंद होने से लाखों लोगों का जन-जीवन प्रभावित हो गया है। प्रशासन ने यात्रियों को भागलपुर आने-जाने के लिए मुंगेर और सुल्तानगंज होकर लंबे रास्ते से यात्रा करने की सलाह दी है।

आम जनता की आवाज़ — गुस्सा, राहत और सवाल

हादसे की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। रोज़ाना इस पुल से सफर करने वाले एक ट्रक चालक रामबाबू प्रसाद ने कहा — “हम तो भगवान का शुक्र मना रहे हैं कि रात का वक्त था। दिन में होता तो सोचना भी मुश्किल है। मुंगेर के रास्ते अब 2-3 घंटे का सफर बढ़ेगा, इससे हमारी रोज़ी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा।” स्थानीय लोगों ने कहा कि पुल बंद होने से सीमांचल के लोगों की चिकित्सा सेवाओं से लेकर कृषि उत्पाद बाज़ार तक पहुंचाने तक हर काम प्रभावित होगा। सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। एक यूज़र ने लिखा  “बिहार में हर साल पुल गिरते हैं, हर साल बयान आते हैं, लेकिन सीख कोई नहीं लेता।” एक अन्य ने टिप्पणी की “पुलिस और प्रशासन की तत्परता की जितनी तारीफ करें कम है, लेकिन असली सवाल यह है कि हालत यहाँ तक पहुँची क्यों?”

पहले से थे खतरे के संकेत प्रशासन ने किया था नकार

उल्लेखनीय है कि घटना से कुछ ही दिन पहले पुल की बियरिंग को नुकसान पहुंचने की रिपोर्टें आई थीं, लेकिन प्रशासन ने उन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि पुल किसी भी प्रकार से खतरे में नहीं है। इससे पहले भी जागरण के संवाददाताओं की जांच में सामने आया था कि पिलर 17, 18 और 19 की सुरक्षा दीवारें ध्वस्त हो चुकी हैं  एक पूरी तरह नदी में गायब हो चुकी थी, दूसरी लटकी हुई थी और तीसरी 50 प्रतिशत से अधिक टूट चुकी थी।

बिहार में पुल हादसों का सिलसिला और बड़ा सवाल

वर्ष 2024 में अकेले बिहार में एक दर्जन से अधिक पुल ढहे — छोटे-बड़े सभी। विशेषज्ञों ने तीसरे पक्ष की जांच की मांग करते हुए एक चिंताजनक पैटर्न की तरफ ध्यान दिलाया है चुनावी वादों को पूरा करने की जल्दी में हड़बड़ाए हुए टेंडर, निर्माण सामग्री खरीद में भ्रष्टाचार की खबरें, और समयसीमा पूरी करने का दबाव। अक्टूबर 2024 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बिहार सरकार की कई एजेंसियों को ढहे पुल का मलबा साफ न करने के लिए नोटिस जारी किया था। एक याचिका में यह भी उठाया गया था कि पुल का मलबा गंगा में विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन सैंक्चुअरी को नुकसान पहुंचा रहा है।

आगे क्या?

वरिष्ठ अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रशासन दीर्घकालिक मरम्मत की रणनीति पर विचार कर रहा है। तकनीकी टीम पुल का मुआयना कर रही है और जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, पुल बंद रहेगा। लाखों लोगों की उम्मीद अब प्रशासन की उस रणनीति पर टिकी है, जो सिर्फ बयानों तक सीमित न रहे बल्कि जमीन पर उतरे।

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