जेवर एयरपोर्ट: ‘उड़ान’ तो भरी, पर विस्थापितों की पीड़ा अभी जमीन पर, यीडा के अधिकारी समेत विधायक के करीबीयों संग उड़ी इंडिगो, किसान नदारद

विधायक धीरेंद्र सिंह के साथ 170 किसान पहली फ्लाइट में लखनऊ रवाना, पर मुआवजे से वंचित हजारों किसान कर रहे हैं सवाल क्या यह सम्मान है या सियासी दिखावा?

उत्तर प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक बन गया। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से 15 जून 2026 को पहली कमर्शियल यात्री फ्लाइट का संचालन शुरू हो गया। इंडिगो एयरलाइंस की पहली फ्लाइट लखनऊ से सुबह 7:05 बजे उड़ी और 8:05 बजे जेवर एयरपोर्ट पर उतरी। इस ऐतिहासिक अवसर पर 20 महिलाओं समेत 170 किसानों को विशेष विमान से लखनऊ ले जाया गया। उनके साथ जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के अधिकारी भी शामिल रहे।

‘विश्व इतिहास में पहली बार’ — विधायक धीरेंद्र सिंह

जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि शायद विश्व इतिहास में यह पहली बार होगा, जब किसी एयरपोर्ट के निर्माण के लिए जमीन देने वाले किसान उसी एयरपोर्ट की पहली उड़ान के यात्री बनेंगे। लखनऊ पहुंचकर ये किसान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर आभार जताने वाले थे। 15 जून से ही लखनऊ और बेंगलुरु के लिए इंडिगो की सेवाएं शुरू हो गई हैं। इससे पहले शनिवार को मेडिकल डिवाइस पार्क में जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने किसानों से मुलाकात कर उन्हें पास सौंपे और यात्रा से जुड़ी जानकारी दी। बताया गया कि पास पर दर्ज क्रमांक ही विमान में उनकी सीट संख्या होगी।

जमीन दी, पर न्याय नहीं मिला — विस्थापित किसानों की पीड़ा

लेकिन जहाँ एक ओर उत्सव का माहौल है, वहीं दूसरी ओर हजारों विस्थापित किसान मुआवजे की आस में दर-दर भटक रहे हैं। यमुना एक्सप्रेसवे की जमीन अधिग्रहण से प्रभावित 30 हजार किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा वितरण की स्वीकृति की फाइल शासन में अटकी हुई है और यमुना प्राधिकरण तारीख पर तारीख दे रहा है। हाल ही में यमुना विकास प्राधिकरण पर आरोप लगे कि उसने एक किसान की जमीन पर बुलडोजर चलाया, दीवार और कमरे ढहा दिए और मुआवजे का आश्वासन देने के बावजूद दो दिन बाद ही अधिकारी वादे से मुकर गए और बिना मुआवजा दिए जमीन पर कब्जा कर लिया।

‘चुनिंदा’ किसानों को उड़ान, ‘बाकी’ अभी भी जमीन पर

विपक्ष और विस्थापित किसान नेताओं का कहना है कि जिन 170 किसानों को पहली उड़ान में शामिल किया गया, उनमें बड़ी संख्या यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों के परिचित और विधायक के करीबियों की है। सवाल यह उठ रहा है कि जब हजारों किसान अभी तक उचित मुआवजे के लिए लड़ रहे हैं, तो यह ‘सम्मान यात्रा’ किसके लिए है?

इससे पहले भट्टा पारसौल में आयोजित किसानों की पंचायत में क्षेत्र के अनेक ग्रामों के किसानों ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण पर वायदा खिलाफी का आरोप लगाते हुए आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया था।

विकास की उड़ान, पर सवाल भी हैं

जेवर एयरपोर्ट से पहली उड़ान का संचालन न केवल विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह किसानों और विकास परियोजनाओं के बीच साझेदारी का प्रतीक भी माना जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि जब यह एयरपोर्ट पूरी तरह से चालू हो जाएगा, तो यह उत्तर भारत के सबसे बड़े विमानन केंद्रों में से एक होगा। शुरुआती चरण में जेवर से लखनऊ और बेंगलुरु के लिए सीधी उड़ानें शुरू हो रही हैं, जबकि 16 जून से हैदराबाद, जम्मू और अमृतसर जैसे शहरों के लिए भी कनेक्टिविटी शुरू हो जाएगी।

किसान नेताओं की राय

भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसान नेताओं का कहना है  “जमीन हमने दी, एयरपोर्ट हमारी कुर्बानी से बना, लेकिन मुआवजे की फाइलें आज भी सरकारी दराजों में बंद हैं। पहली उड़ान में 170 को बुलाकर लाखों का दर्द नहीं ढका जा सकता।” खुद जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने भी पूर्व में यमुना प्राधिकरण समेत नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को पत्र भेजकर किसानों को उचित मुआवजा देने का आग्रह किया था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में किसान आज भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं। जेवर एयरपोर्ट की पहली उड़ान उत्तर प्रदेश के विकास की एक बड़ी उपलब्धि है — इसमें कोई संदेह नहीं। लेकिन विस्थापित किसानों का मुआवजा, यमुना प्राधिकरण की वादाखिलाफी और ‘चुनिंदा’ किसानों को उड़ान में शामिल करने का विवाद यह सवाल खड़ा करता है कि क्या यह जश्न सभी का है, या सिर्फ कुछ खास लोगों का?

यह भी पढ़ें: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली फ़्लाइट ने भरी उड़ान; ज़मीन देने वाले किसानों संग लखनऊ पहुँचे यीडा (YEIDA) के अधिकारी

यहां से शेयर करें