Noida Water Crisis: नोएडा सेक्टर-78, बच्चियों का नाले में उतरकर पानी भरने का वीडियो वायरल

Noida Water Crisis: नोएडा। शहर की चमक-दमक और ऊंची इमारतों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नोएडा के सेक्टर-78 के पास झुग्गी बस्ती (वाल्मीकि बस्ती) में रहने वाले करीब 400 परिवार पिछले कई महीनों से नाले में उतरकर लीक हो रही सरकारी ट्यूबवेल की पाइपलाइन से पानी भरने को मजबूर थे। छोटी-छोटी बच्चियां बाल्टी लेकर नाले के अंदर जाकर पानी निकाल रही थीं। यह नजारा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो वायरल होने के बाद नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों में हड़कंप मच गया और टीम ने पाइपलाइन को वेल्डिंग कर सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी। संभावित बड़े हादसे को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया। लेकिन कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है—क्या प्राधिकरण के जेई या मैनेजर को पहले से यह समस्या नहीं दिख रही थी? क्या सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद ही अधिकारियों की आंखें खुलीं?

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, सेक्टर-78 के पास झुग्गी बस्ती के सैकड़ों लोग पिछले कई महीनों से नाले के अंदर उतरकर पानी भर रहे थे। पास में नोएडा प्राधिकरण का सरकारी ट्यूबवेल है, जिसकी मुख्य पाइपलाइन गंदे नाले के नीचे से गुजरती है। पाइपलाइन लीक हो रही थी और उसी लीकेज का पानी लोग पीने, खाना बनाने और घरेलू कामों के लिए इस्तेमाल कर रहे थे। कोई दूसरा पेयजल स्रोत उपलब्ध नहीं था। 6-7 साल की बच्चियां जान जोखिम में डालकर नाले में उतर रही थीं। बाल्टी में कपड़ा बांधकर पानी निकालने वाले बच्चे भी दिखे। अगर कोई बच्चा फिसल जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था।

एक 6 साल के बच्चे राजा ने कहा, “क्या करें भैया… स्कूल जाएं या पीने के लिए पानी भरें…” सोनम नाम की छोटी बच्ची ने बताया कि पिछले तीन महीने से वे रोज सुबह-शाम नाले से पानी भर रही हैं। उसने निराशा भरी आंखों से कहा, “भैया, आप आए हो… ऐसे और भी मीडिया वाले आए। लोग हमारा वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर डाल देते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं है।” मुस्कान जैसी अन्य बच्चियों ने भी यही हालात बताए। नाले के पास रेहड़ी लगाने वाले शिवम ने कहा कि सुबह-शाम पानी भरने वालों की लंबी लाइन लग जाती है।

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नोएडा प्राधिकरण की टीम मौके पर पहुंची। जांच शुरू की गई और लीक हो रहे पानी के स्रोत को वेल्डिंग कर सील करने का काम शुरू कर दिया गया। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, अब लोग पानी खरीदकर पीने को मजबूर हो गए हैं। पाइपलाइन बंद होने से जहां संभावित हादसे का खतरा कम हुआ, वहीं इन परिवारों के लिए साफ पानी की समस्या और गंभीर हो गई है।

यह घटना नोएडा जैसे नियोजित शहर में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है। ऊंची इमारतों और मेट्रो वाले शहर में झुग्गी बस्ती के मासूम बच्चे नाले में उतरकर पानी भर रहे थे। समस्या कई महीनों से चल रही थी, लेकिन कार्रवाई तभी हुई जब वीडियो वायरल हुआ। अब सवाल यह है कि नियमित निरीक्षण और रखरखाव की व्यवस्था कहां थी? प्राधिकरण के जेई और मैनेजर स्तर के अधिकारियों ने पहले क्यों ध्यान नहीं दिया? क्या नागरिकों की शिकायतें अनसुनी रह जाती हैं जब तक मीडिया या सोशल मीडिया दबाव नहीं बनाता?

स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइपलाइन सील होने के बाद वैकल्पिक जल आपूर्ति की व्यवस्था तुरंत होनी चाहिए। प्राधिकरण से उम्मीद है कि वह न केवल लीकेज ठीक करे बल्कि झुग्गी बस्ती में स्थायी पेयजल कनेक्शन या टैंकर सेवा सुनिश्चित करे। फिलहाल, वायरल वीडियो ने प्रशासन को जगाया जरूर, लेकिन लंबे समय से चली आ रही समस्या और बच्चों की सुरक्षा पर सवाल बरकरार हैं। नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन को अब इन परिवारों को राहत देने के ठोस कदम उठाने होंगे, वरना विकास के दावे खोखले साबित होते रहेंगे।
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