नोएडा बिल्डर फ्रॉड न्यूज़: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में घर खरीदारों को ठगने वाले बिल्डरों के खिलाफ जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। एक तरफ नोएडा के सनशाइन ग्रुप के बिल्डर और उसके सहयोगियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने नया मुकदमा दर्ज किया है, तो दूसरी तरफ सीबीआई ने साहा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ 16वीं चार्जशीट अदालत में पेश की है। दोनों मामले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बिल्डरों की धोखाधड़ी की चल रही बड़ी जांच से जुड़े हैं।
सनशाइन ग्रुप पर नया केस: सियासी पाला बदलने वाले बिल्डर की मुश्किलें बढ़ीं
नोएडा के सेक्टर-10 स्थित गोल्फ ग्रीन रेजिडेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े बिल्डर हरेंद्र यादव, उनकी पत्नी आशा यादव सहित कुल आठ लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 8 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता की धारा 406, 420 और आपराधिक साजिश की धारा 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया है। यह शिकायत रोहित गोयल, इला गोयल, शिव प्रकाश तिवारी सहित कई पीड़ित खरीदारों की तरफ से दी गई थी, जिनकी परियोजना 13 साल बाद भी अधूरी पड़ी है। गौरतलब है कि हरेंद्र यादव उस समय समाजवादी पार्टी से जुड़े थे जब दो साल पहले बायर्स की शिकायत पर उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ और उन्हें जेल जाना पड़ा था। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने पाला बदलकर भाजपा का दामन थाम लिया। सनशाइन हेलिओस, सनशाइन बिजनेस पार्क, अंतरिक्ष फॉरेस्ट और अंतरिक्ष गोल्फ व्यू जैसी उनकी परियोजनाओं को लेकर खरीदार लंबे समय से शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, और गोल्फ ग्रीन रेजिडेंसी के खिलाफ यूपी रेरा व नोएडा प्राधिकरण की वसूली भी लंबित है। पिछले साल सेक्टर-78 स्थित सनशाइन हेलियोस सोसाइटी के निवासियों की शिकायत पर नोएडा पुलिस ने भी हरेंद्र यादव को गिरफ्तार किया था। इस मामले में हरेंद्र यादव पर नोएडा प्राधिकरण का 87 करोड़ रुपये से अधिक बकाया होने की बात सामने आई थी, जबकि निवासी बिजली, पानी, लिफ्ट और मालिकाना हक जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे थे।
साहा इंफ्राटेक पर सीबीआई की 16वीं चार्जशीट
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बिल्डरों के खिलाफ जांच कर रही सीबीआई ने साहा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ नई दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत (आरएडीसी) में कंपनी, उसके निदेशक तथा एचडीएफसी व आईसीआईसीआई बैंक के कुछ अधिकारियों के खिलाफ 16वीं चार्जशीट दाखिल की है। नोएडा एक्सप्रेसवे पर साहा इंफ्राटेक की अमाडेयस हाउसिंग परियोजना के नाम पर तीन सौ से ज्यादा घर खरीदारों से करोड़ों रुपये लिए गए, लेकिन न पजेशन दिया गया और न पैसा लौटाया गया।
जांच में सामने आया कि दोनों निजी बैंकों के अधिकारियों ने बिल्डर से सांठगांठ कर बिना उचित पड़ताल के लोन की रकम जारी कर दी और बाद में खरीदारों से ईएमआई वसूलनी शुरू कर दी। जांच एजेंसी का कहना है कि पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आईपीसी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और पद के दुरुपयोग जैसे आरोपों में चार्जशीट दायर की गई है। सीबीआई के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर देशभर में बिल्डर कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 33 मामलों की जांच अभी भी जारी है, और इससे पहले एजेंसी 15 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें जयप्रकाश इंफ्राटेक, लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स, सीएचडी डेवलपर्स, नाइनेक्स डेवलपर्स और एलजीसीएल अर्बन होम्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। हाल ही में रुद्रा बिल्डवेल प्रोजेक्ट्स के निदेशक के खिलाफ भी अलग से चार्जशीट दाखिल की गई थी, और सीबीआई अकेले नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के लगभग 50 बिल्डरों की जांच कर रही है जिनसे जुड़े मामलों में 600 से ज्यादा खरीदार प्रभावित बताए जाते हैं।
बायर्स के लिए क्यों अहम है यह कार्रवाई
इन दोनों मामलों से साफ है कि NCR में बिल्डरों की धोखाधड़ी के खिलाफ जांच अब सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं, बल्कि उनके बैंकिंग सहयोगियों और राजनीतिक संरक्षण तक पहुंच रही है। घर खरीदारों के लिए यह राहत की बात हो सकती है, लेकिन सालों से अटकी परियोजनाओं और फंसे पैसे की वसूली अब भी एक लंबी कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर है।

