गो-हत्या बैन: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के गो-हत्या पूर्ण प्रतिबंध आदेश पर लगा दी अंतरिम रोक; तमिलनाडु सरकार को बड़ी राहत

गो-हत्या बैन: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु में गो-हत्या पर मद्रास हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध वाले आदेश को अंतरिम रूप से स्थगित कर दिया। इस फैसले से मुख्यमंत्री थलपति सी. जोसेफ विजय (विजय) के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार को बड़ी जीत मिली है। अब राज्य में बकरीद सहित किसी भी दिन गो-हत्या पर हाईकोर्ट के आदेश के कारण लगा प्रतिबंध हट गया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने तमिलनाडु सरकार की स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया। कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के अंतिम पैराग्राफ में ‘सुधार’ की जरूरत बताते हुए कहा कि प्रदेश-व्यापी प्रतिबंध लगाने वाला हिस्सा प्रथम दृष्टया संशोधन योग्य है।

क्या था मद्रास हाईकोर्ट का आदेश?

मद्रास हाईकोर्ट ने 27 मई 2026 को एक आदेश में तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया था कि राज्य में गाय और बछड़ों की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाए। यह 30 अगस्त 1976 के पुराने सरकारी आदेश का हवाला देते हुए किया गया था, जो दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हित में गो-हत्या पर रोक लगाता था। हाईकोर्ट ने बकरीद के मौके पर और अन्य दिनों में भी इसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित करने को कहा था। तमिलनाडु सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सरकार का तर्क था कि हाईकोर्ट का आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के विपरीत है। इस कानून के तहत 10 वर्ष से अधिक उम्र की गायों या काम करने/प्रजनन में अक्षम पशुओं की हत्या प्रमाण-पत्र के आधार पर अनुमत है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट का आदेश मौजूदा कानूनी ढांचे के साथ असंगत प्रतीत होता है। बेंच ने कहा, “आदेश के अंतिम पैराग्राफ में पहली नजर में सुधार की आवश्यकता है।” कोर्ट ने SLP पर नोटिस जारी किया और हाईकोर्ट आदेश की कार्यवाही पर रोक लगा दी। तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की।

राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ

यह मामला तमिलनाडु में गो-हत्या और पशु संरक्षण को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का हिस्सा है। राज्य में मांसाहारी संस्कृति और कुछ समुदायों के धार्मिक त्योहारों (जैसे बकरीद) के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती रहा है। मुख्यमंत्री थलपति सी. जोसेफ विजय की सरकार ने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के आदेश को “न्यायिक अतिक्रमण” करार दिया था। विपक्षी दलों ने हाईकोर्ट के मूल आदेश का स्वागत किया था, जबकि सरकार इसे किसानों और पशुपालकों के हितों के खिलाफ बता रही है। सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश बकरीद के आसपास संभावित तनाव को कम करने वाला माना जा रहा है।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की विस्तृत सुनवाई करेगा। अंतिम फैसले में तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम की व्याख्या, 1976 के GO और हाईकोर्ट के निर्देशों के बीच सामंजस्य तय होगा। यह फैसला पूरे देश में गो-हत्या विरोधी कानूनों और संघवाद के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई राज्यों में ऐसे प्रतिबंध मौजूद हैं लेकिन लागू करने की प्रक्रिया अलग-अलग है। खबर लिखे जाने तक सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। आगे की सुनवाई की तारीख बाद में तय होगी।

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