लेखिका तसलीमा नसरीन: 20 साल बाद लौट सकती है कोलकाता, 1 अगस्त को कट्टरपंथ विरोधी कार्यक्रम 

लेखिका तसलीमा नसरीन: बांग्लादेशी मूल की विवादित और निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन लगभग दो दशक बाद फिर से कोलकाता की धरती पर कदम रख सकती हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वे आगामी 1 अगस्त को शहर में आयोजित होने वाले एक कट्टरपंथ-विरोधी (anti-fundamentalism) कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कोलकाता आ सकती हैं। अगर यह यात्रा तय होती है, तो यह उनके लिए भावनात्मक रूप से बेहद अहम पल होगा, क्योंकि वे लंबे समय से इस शहर को अपना “घर” बताती रही हैं।

क्यों अहम है यह यात्रा तसलीमा नसरीन वर्ष 2004 में भारत सरकार से मिले अस्थायी वीज़ा के सहारे कोलकाता आकर बस गई थीं और पश्चिम बंगाल की भाषा-संस्कृति से गहरा जुड़ाव महसूस करती थीं। लेकिन नवंबर 2007 में कट्टरपंथी संगठनों के हिंसक प्रदर्शनों और उनके खिलाफ जारी धमकियों के बाद प्रशासन ने उन्हें सुरक्षा कारणों से पहले जयपुर और फिर दिल्ली भेज दिया था। तभी से वे पश्चिम बंगाल में दोबारा प्रवेश नहीं कर पाई हैं। यानी अगर यह यात्रा वाकई होती है, तो यह लगभग दो दशक में उनकी पहली कोलकाता वापसी होगी। राजनीतिक पृष्ठभूमि हाल में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। इससे पहले भाजपा सांसद शमीक भट्टाचार्य ने राज्यसभा में तसलीमा नसरीन के मुद्दे को उठाते हुए मांग की थी कि उन्हें कोलकाता लौटने का अधिकार दिया जाए। इसके जवाब में तसलीमा ने आभार जताते हुए कहा था कि बांग्ला भाषा में लिखने के लिए पश्चिम बंगाल के माहौल में रहना उनके लिए कितना ज़रूरी है। इसके बाद से ही उनकी वापसी को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं, और अब 1 अगस्त की संभावित यात्रा को इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है।

कट्टरपंथ के खिलाफ मुखर रही हैं तसलीमा तसलीमा नसरीन लगातार धार्मिक कट्टरपंथ, महिला उत्पीड़न और अभिव्यक्ति की आज़ादी जैसे मुद्दों पर बेबाकी से लिखती और बोलती रही हैं। उन्होंने पहले भी कहा है कि वे हर तरह के कट्टरपंथ के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगी, चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। ऐसे में 1 अगस्त का यह आयोजन उनके वैचारिक रुख से पूरी तरह मेल खाता नज़र आता है। आगे क्या हालांकि, इस यात्रा को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है, जैसे कार्यक्रम का पूरा नाम, आयोजनकर्ता, स्थान और प्रशासनिक अनुमति से जुड़े ब्योरे अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं। जानकारों का मानना है कि अगर यह यात्रा सफल होती है, तो यह न सिर्फ तसलीमा के निजी जीवन बल्कि पश्चिम बंगाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत भी होगा।

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