नोएडा सेक्टर 93 गेझा सीवर मौत: नोएडा, उत्तर प्रदेश के नोएडा में सेक्टर-93 गेझा गांव के टी-पॉइंट पर सीवर सफाई के दौरान एक सफाई कर्मचारी की दम घुटने से मौत हो गई। मृतक की पहचान शिवा के रूप में हुई है, जो सेक्टर-44 का निवासी था। यह हादसा 14 जुलाई को हुआ, जब वह गहरी सीवर लाइन में ब्लॉकेज साफ करने के लिए मैनहोल में उतरा।
घटना का विवरण:
नोएडा अथॉरिटी के वॉटर डिवीजन-III के तहत ठेकेदार शिवजी कंस्ट्रक्शंस कंपनी द्वारा यह सफाई कार्य कराया जा रहा था। शिवा को सेफ्टी बेल्ट, ऑक्सीजन मास्क और अन्य सुरक्षात्मक उपकरण प्रदान किए गए थे। हालांकि, वह मैनहोल के अंदर तारों में फंस गया। कुछ देर बाद स्टाफ ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी। स्थानीय पुलिस और फायर सर्विस की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जिला अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. संचित शर्मा ने बताया, “शिवा का शव 14 जुलाई शाम करीब 8:55 बजे गेझा, सेक्टर-93 से लाया गया। हमें बताया गया कि वह सीवर लाइन में डूब गया था। जांच में उसकी विटल साइन्स अनरिकॉर्डेबल पाई गईं, ECG पर कोई एक्टिविटी नहीं थी और प्यूपिल्स में कोई रिफ्लेक्स नहीं था। उसे मृत घोषित कर दिया गया।”
परिवार का आरोप:
शिवा के भाई और अन्य परिजनों ने नोएडा अथॉरिटी पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, घटना के समय पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध नहीं थी और मदद पहुंचने में करीब 4 घंटे लग गए। परिवार का कहना है कि बिना उचित बैकअप और आधुनिक उपकरणों के कर्मचारियों को जान जोखिम में डाला गया।
अथॉरिटी की कार्रवाई:
नोएडा अथॉरिटी ने मामले को गंभीरता से लिया है। अथॉरिटी ने ठेकेदार शिवजी कंस्ट्रक्शंस कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है और ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, कॉन्ट्रैक्ट जूनियर इंजीनियर राकेश कुमार की सेवाएं समाप्त करने, मैनेजर के खिलाफ एडवर्स एंट्री दर्ज करने और सीनियर मैनेजर को शो-कॉज नोटिस जारी करने का फैसला लिया गया है। अथॉरिटी ने मृतक के परिवार को नियमों के अनुसार हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है।
पृष्ठभूमि और व्यापक मुद्दा:
यह घटना सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर उठने वाले सवालों को एक बार फिर रेखांकित करती है। भारत में सीवर और नाले की सफाई के दौरान जहरीली गैस (जैसे मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड) से होने वाली मौतें आम हैं। स्वच्छ भारत मिशन जैसे कार्यक्रमों के बावजूद, कई जगहों पर मैनुअल सफाई पर निर्भरता बनी हुई है, जिससे ऐसे हादसे होते रहते हैं। नोएडा अथॉरिटी ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई का वादा किया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित ट्रेनिंग, आधुनिक मशीनी उपकरणों का इस्तेमाल और सख्त मॉनिटरिंग जरूरी है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया:
स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना से इलाके में आक्रोश फैला हुआ है और श्रमिक संगठनों ने बेहतर सुरक्षा मानकों की मांग की है। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना विकासशील शहर नोएडा में बुनियादी ढांचे और श्रमिक सुरक्षा के बीच के अंतर को उजागर करती है। प्रशासन से अपेक्षा है कि न केवल दोषियों पर कार्रवाई हो, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

