नोएडा में महिला गिग वर्कर्स का प्रदर्शन: ‘निश्चित घंटे नहीं, बैठने की जगह नहीं, वॉशरूम तक नहीं’

नोएडा में महिला गिग वर्कर्स का प्रदर्शन: नोएडा के सेक्टर-60 में स्थित अर्बन कंपनी के ट्रेनिंग सेंटर के बाहर बुधवार सुबह करीब 40 महिला गिग वर्कर्स ने प्रदर्शन किया। ये महिलाएं घरेलू सेवाएं (ब्यूटी, मसाज, क्लीनिंग आदि) देने वाली अर्बन कंपनी से जुड़ी हैं। उन्होंने सैलरी बढ़ाने की बजाय निश्चित काम के घंटेबुनियादी सुविधाएं और महिला-विशेष जरूरतों का सम्मान मांगा।

प्रदर्शनकारियों का मुख्य शिकायत यह था कि प्लेटफॉर्म पर कोई फिक्स्ड वर्किंग आवर्स नहीं हैं। अक्सर उन्हें 11 घंटे तक काम करना पड़ता है, जबकि सरकारी नियमों के मुताबिक 8 घंटे का प्रावधान है। ग्राहकों के घरों के बीच घूमने के कारण बैठने की जगहपीने का पानी या वॉशरूम जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं। कई बार ग्राहक वॉशरूम इस्तेमाल करने से मना कर देते हैं। खासतौर पर मासिक धर्म के दौरान सैनिटरी पैड बदलने की समस्या महिलाओं के लिए बहुत बड़ी है।

एक प्रदर्शनकारी नेहा देवी (25 वर्ष, 5 महीने से काम कर रही) ने कहा, “हम सैलरी बढ़ाने की मांग नहीं कर रहे। हम सिर्फ फिक्स्ड वर्किंग आवर्स और बेसिक सुविधाएं चाहते हैं।” सोनाक्षी थापा (27 वर्ष) ने बताया, “हमें सैनिटरी पैड बदलने की जरूरत पड़ती है, हर महिला को यह समस्या होती है। ग्राहकों के घर में ऐसा नहीं कर सकते। हमें प्रॉपर सुविधाएं चाहिए।” यात्रा के लिए सिर्फ 15 मिनट दिए जाते हैं, लेकिन वास्तव में 20 मिनट या उससे ज्यादा लगते हैं। एक मिनट की देरी पर पेनल्टी लगती है और रेटिंग गिर जाती है, जिससे कमाई प्रभावित होती है।

पिंकी कुमारी ने शिकायत की कि ट्रेनिंग में कहा गया था कि कैंसिलेशन पर पैसे नहीं कटेंगे, लेकिन सुपरवाइजर जवाब नहीं देते और अकाउंट डिएक्टिवेशन की धमकी देते हैं। महिलाओं ने बताया कि कमाई रेटिंग और पंक्चुअलिटी पर निर्भर करती है। वीकेंड पर छुट्टी लेने पर भारी कटौती होती है (जैसे 833 रुपये दैनिक वेतन पर 1000 रुपये तक कटौती)। एक महिला की मासिक कमाई करीब 25,000 रुपये बताई गई, जबकि डिडक्शन के बाद दूसरी की 18,000 रुपये रह जाती है। प्रदर्शन एक व्हाट्सएप मैसेज से शुरू हुआ था, जो थोड़ा भ्रामक भी था। देर सुबह पुलिस ने महिलाओं को बसों में बैठाकर वहां से हटा दिया। अर्बन कंपनी की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

यह प्रदर्शन नोएडा में हाल के दिनों में फैक्ट्री वर्कर्स और घरेलू कामगारों (मेड्स) के वेतन वृद्धि वाले बड़े-बड़े प्रदर्शनों के बीच हुआ है। गिग वर्कर्स की मांगें थोड़ी अलग हैं वे लचीलेपन की जगह पूर्वानुमानित घंटेसम्मानजनक काम की स्थिति और महिला श्रमिकों के लिए बुनियादी सम्मान चाहती हैं। यह घटना भारत के बढ़ते गिग इकोनॉमी में महिलाओं की चुनौतियों को उजागर करती है, जहां प्लेटफॉर्म्स लचीले काम का वादा करते हैं, लेकिन वास्तव में अनिश्चितता, थकान और सुविधाओं की कमी है। अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

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