बंगाल SIR पर बवाल जारी: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत करीब 90-91 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इससे राज्य की कुल मतदाता संख्या 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 6.75-6.77 करोड़ रह गई है।
नदिया, उत्तर 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद और हुगली जैसे जिलों में मटुआ (बांग्लादेश से आए अनुसूचित जाति के हिंदू शरणार्थी समुदाय) और मुस्लिम-बहुल गांवों-बूथों में सबसे ज्यादा नाम कटे हैं। कई जगहों पर 70% से ज्यादा नाम हटाए गए, जिससे स्थानीय लोग भड़के हुए हैं और सभी प्रमुख पार्टियों TMC, BJP और कांग्रेस पर नाराजगी जता रहे हैं।
मुख्य उदाहरण:
नदिया के चुपिपोटा गांव में बूथ नंबर 11 के सभी 152 नाम और बूथ नंबर 12 के 118 में से सिर्फ 2 नाम बचे। कुछ गांवों में 10-15% वोट प्रभावित हुए; कुछ क्षेत्रों में 70% हिंदू वोट कटे बताए जा रहे हैं। मटुआ-बहुल इलाकों (जैसे रानाघाट उत्तर पूर्व, बागदा, गাইघाटा) और मुस्लिम-बहुल इलाकों (मुर्शिदाबाद, मालदा) में उच्च दर से कटौती।
लोगों का कहना है कि नाम सही दस्तावेज जमा करने के बावजूद कट गए। कारण बताए गए नाम की स्पेलिंग में गलती, माता-पिता का नाम मेल न खाना, या छह से ज्यादा बच्चों वाले परिवारों के वंशज। कई परिवारों में एक भाई का नाम रह गया तो दूसरे का कट गया। युवा मतदाताओं ने कहा, “वोटर आईडी बनाने में इतना समय लगाया, अब क्या होगा?” महिलाओं ने भावुक होकर पूछा “2006 से वोट दे रही हूं, अब अचानक नागरिकता कैसे चली गई?”
कांग्रेस नेता ग़नी खान चौधरी की भतीजी मौसम बेनजीर नूर (मालदा की मलतिपुर सीट से उम्मीदवार) ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया “NRC 2021 की तरह बंगाल चुनाव को ध्रुवीकृत करने के लिए डिजाइन की गई है।” उन्होंने कहा कि यह “स्क्रिप्टेड प्लान” और “ड्रामा” है। मालदा में अकेले 8.5 लाख नामों की जांच हुई, जिनमें ज्यादातर अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। नूर ने कहा, “असली मतदाताओं के नाम कट रहे हैं, मृतकों के नाम रह गए हैं। अब लोग TMC और BJP दोनों को समझ चुके हैं।”1
सभी पार्टियों पर गुस्सा:
TMC पर आरोप प्रक्रिया को समर्थन देकर राजनीति को द्विध्रुवीय बनाने की कोशिश। BJP पर आरोप विरोधी वोट काटकर “रिगिंग” करने का। कांग्रेस नेता अब्दुर रहीम शेख ने कहा, “लोग महसूस कर रहे हैं कि TMC ने भी SIR को समर्थन दिया ताकि अन्य पार्टियां बाहर रह जाएं।”
ममता बनर्जी ने भी SIR को “भेदभावपूर्ण” बताया और कहा कि मटुआ तथा अल्पसंख्यक वोटरों को निशाना बनाया गया है। वहीं BJP ने इसे मतदाता सूची साफ करने की जरूरी प्रक्रिया बताया।
विश्लेषण और प्रभाव: राज्य में करीब 80,000 बूथ हैं और कई सीटों पर जीत-हार का अंतर 2,000 से 80,000 वोटों का है। ऐसे में 10-15% वोट कटने का असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है। मटुआ समुदाय (BJP का पारंपरिक वोट बैंक) में भी नाराजगी है क्योंकि CAA के वादे के बावजूद उनके नाम कट रहे हैं।
अपील के लिए ट्रिब्यूनल बनाए गए थे, लेकिन ज्यादातर मामलों में सुनवाई नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नाम कटने से वोटिंग अधिकार हमेशा के लिए खत्म नहीं होता, लेकिन चुनाव से पहले सूची फ्रीज हो चुकी है। इस मुद्दे ने बंगाल की सियासत को गर्मा दिया है। प्रभावित इलाकों में लोग अब वोटर लिस्ट चेक करने और अपील करने में लगे हैं, लेकिन गुस्सा साफ दिख रहा है “हम वोट बैंक भर हैं, असली मुद्दों पर कोई नहीं खड़ा होता।” आगे की अपील और कोर्ट प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।

