नोएडा प्राधिकरण एमजी इंफ्रा सॉल्यूशन पर क्यों मेहरबान: MG INFRA का पार्किंग साम्राज्य, जनता की जेब पर डाका, प्राधिकरण की जुबान पर ताला

नोएडा प्राधिकरण एमजी इंफ्रा सॉल्यूशन पर क्यों मेहरबान: नोएडा के सेक्टर 15 स्थित अलका सिनेमा के पास MG INFRA Solutions का पार्किंग का खेल इन दिनों चर्चा में है। आरोप हैं कि यहाँ हाथों से काटी गई फर्जी पर्चियों के जरिए नागरिकों से मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है न पर्ची पर कंपनी का नाम, न कोई संपर्क नंबर, और न ही नोएडा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित दरों का पालन।

MG INFRA को मिला है आधिकारिक ठेका — पर नियम ताक पर

नोएडा प्राधिकरण ने MG Infra Solutions को सेक्टर 2, 6, 8, 15, 16, 25, 27, 29, 30, 41, 50, 51, 61 और 104 सहित कई सेक्टरों में सतही पार्किंग संचालन का आधिकारिक अधिकार दिया हुआ है। यानी कंपनी के पास लाइसेंस है लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।प्राधिकरण द्वारा तय दरों के अनुसार दोपहिया वाहन के लिए दो घंटे तक ₹10, हर अतिरिक्त घंटे के लिए ₹5 और पूरे दिन के लिए अधिकतम ₹40 का शुल्क निर्धारित है। चारपहिया वाहन के लिए दो घंटे तक ₹20, हर अतिरिक्त घंटे पर ₹10 और पूरे दिन के लिए अधिकतम ₹80 तय है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि सेक्टर 15 में इन दरों का कोई पालन नहीं हो रहा।

फर्जी पर्ची, कोई पहचान नहीं — सिस्टम को खुला चैलेंज

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक पार्किंग कर्मी हाथ से लिखी या बिना नाम-पते की अनाधिकृत पर्चियाँ थमा देते हैं। न पर्ची पर ठेकेदार कंपनी का नाम है, न प्राधिकरण की मुहर, न ही कोई हेल्पलाइन नंबर। इससे जनता के पास शिकायत करने का कोई रास्ता नहीं बचता। नोएडा में पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली का सिलसिला नया नहीं है। इसी तरह का एक मामला सेक्टर 63ए में सामने आया था, जहाँ एक व्यक्ति ने खुद को प्राधिकरण कर्मी बताकर ट्रक चालक से ₹200 पार्किंग शुल्क माँगा। इस वीडियो के वायरल होने के बाद प्राधिकरण अधिकारियों ने जाँच का आश्वासन दिया।

MG INFRA का एक और बड़ा विवाद — सार्वजनिक पैसे से बना पार्किंग, निजी गोदाम बना दिया

यह पहली बार नहीं है जब MG Infra Solutions विवादों में घिरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 2020 में उद्घाटित और नोएडा प्राधिकरण द्वारा “जनता की सुविधा” के लिए बनाई गई सेक्टर 38A की मल्टीलेवल पार्किंग का संचालन 2022 में बोली प्रक्रिया के माध्यम से MG Infra Solutions को सौंपा गया था। कंपनी ने दावा किया कि पर्याप्त सार्वजनिक माँग नहीं है, और अधिकांश जगह गाड़ी डीलरों को किराए पर दे दी।

जाँच में पाया गया कि चार मंजिलें Kia, Skoda, Toyota, Tata, Honda और Cars24 जैसी कंपनियों के वाहनों से भरी हुई थीं — जबकि आम जनता के लिए बनी जगह पर 30 से अधिक गाड़ियाँ रैंप पर अव्यवस्थित खड़ी थीं और एक प्रवेश द्वार पूरी तरह बंद था। कंपनी के ऑपरेशंस मैनेजर सुनील शर्मा ने माना कि कंपनी को हर महीने प्राधिकरण को ₹18-20 लाख किराया देना होता है, लेकिन घाटे का हवाला देकर डीलरों को जगह दे दी गई। नोएडा प्राधिकरण के डीजीएम (सिविल) विजय रावल का कहना था कि प्राधिकरण इस मामले से अवगत है, लेकिन उन्होंने MG Infra के साथ अनुबंध की विशिष्ट शर्तों और NOC के बारे में सवालों का जवाब नहीं दिया। MG Infra के मालिक प्रवीण गुप्ता ने भी मीडिया के सात दिनों तक बार-बार संपर्क करने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

नोएडा में पार्किंग माफिया का बढ़ता आतंक

नोएडा का सेक्टर-18, जिसे कभी शहर का कनॉट प्लेस कहा जाता था, पार्किंग माफियाओं के आतंक का केंद्र बन चुका है। वहाँ की मल्टीलेवल और सतही पार्किंग में अव्यवस्था का बोलबाला है। एक हालिया घटना में माफियाओं ने एक बाइक चालक के साथ बेरहमी से मारपीट की और वाहन को नुकसान पहुँचाया।

प्राधिकरण की सख्ती कब?

नोएडा प्राधिकरण के CEO कृष्णा करुणेश ने हाल ही में अवैध कब्जों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। लेकिन सेक्टर 15 की पार्किंग में MG INFRA की मनमानी के बारे में अभी तक कोई ठोस जाँच शुरू होने की जानकारी नहीं है।

मांग: स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की माँग है कि —

सेक्टर 15 की पार्किंग में तत्काल औचक निरीक्षण हो, वैध रसीद बुक और डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू की जाए, MG INFRA और प्राधिकरण अधिकारियों के बीच संदिग्ध संबंधों की स्वतंत्र जाँच हो, अधिक वसूली पर FIR दर्ज हो और ठेका निरस्त किया जाए

जनता का सवाल: क्या नोएडा प्राधिकरण अपने ही तय नियमों को लागू करवाने में सक्षम है, या MG INFRA जैसी कंपनियों के लिए नियम-कानून सिर्फ कागजों पर हैं?

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