साकेत इमारत हादसा: मलबे से एक की मौत, 12 बचाए गए; रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन, कोचिंग के छात्रों पर मंडराया खतरा

साकेत इमारत हादसा: दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के निकट सैदुलाजाब (वेस्टर्न मार्ग) में शनिवार शाम एक व्यावसायिक इमारत के भरभराकर गिरने से बड़ा हादसा हो गया। साकेत मेट्रो स्टेशन के पास स्थित तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत के ढहने से 26 वर्षीय एक युवक की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोगों को बचाकर उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।

हादसे का पूरा ब्यौरा

दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) को शाम 7:44 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली। घटना महरौली थाना क्षेत्र के सैदुलाजाब में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास हुई, जहाँ सात दमकल गाड़ियाँ तुरंत मौके पर रवाना की गईं। पूरी पाँच मंजिला संरचना धराशायी होकर मलबे के विशाल ढेर में तब्दील हो गई।इमारत में कई दफ़्तर थे। चूँकि शनिवार का दिन था, इसलिए अधिकांश दफ़्तर बंद थे और जो खुले थे, वे शाम 6 बजे तक बंद हो चुके थे। यह व्यावसायिक इमारत लगभग 500 वर्ग गज क्षेत्रफल में बनी थी। इमारत में ग्राउंड फ्लोर पर एक कोचिंग संस्थान, कैफे और दफ़्तर संचालित होते थे, जबकि ऊपरी मंज़िल पर निर्माण कार्य भी चल रहा था। पुलिस के अनुसार इमारत में मेडिकल छात्रों के लिए एक कैंटीन भी चल रही थी, और आशंका है कि दबे हुए लोगों में छात्र भी शामिल हो सकते हैं।

मृतक और घायलों की पहचान

मृतक की पहचान रवि के रूप में की गई है, जिसे रातभर चले बचाव अभियान के दौरान मलबे से निकाला गया, लेकिन अस्पताल पहुँचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। घायलों में तरुण कुमार (26, गुरुग्राम), सायका खान (27, बिहार के मोतिहारी), नीलम यादव (25, सैदुलाजाब), आदित्य शर्मा (24, साकेत), क्षितिज प्रताप (25, नोयडा), अनुज दीक्षी (25, साकेत), आस्था (25, सैदुलाजाब) और विशाल (24, साकेत) शामिल हैं। सभी आठ घायलों को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है।

रेस्क्यू ऑपरेशन: रात भर डटे रहे बचावकर्मी

आपातकालीन टीमों ने कुल नौ लोगों को ढही हुई इमारत से बाहर निकाला। इनमें से सात को पेशेवर बचाव दलों ने और दो को स्थानीय निवासियों ने बाहर निकाला, इससे पहले कि आपातकालीन सेवाएँ घटनास्थल तक पहुँचतीं। एनडीआरएफ, दिल्ली अग्निशमन सेवा, डीडीएमए, दिल्ली पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवकों को मिलाकर एक बहु-एजेंसी बचाव अभियान रातभर जारी रहा। घटनास्थल से आई तस्वीरों और वीडियो में इमारत कंक्रीट के ढेर, मुड़े हुए लोहे और टूटे खंभों में तब्दील नज़र आई। इलाके के निवासी और पड़ोसी टॉर्च और मोबाइल फोन लेकर मौके पर पहुँचे और नुकसान का जायज़ा लेने और मलबे में दबे लोगों की तलाश करने लगे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की प्रतिक्रिया

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि एनडीआरएफ, दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली पुलिस, डीडीएमए, एमसीडी, कैट्स और सिविल डिफेंस की टीमें युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं और मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

चश्मदीदों ने उठाए सवाल

घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने इमारत की घटिया निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “यह एक व्यावसायिक इमारत थी जहाँ छात्र पढ़ते थे और लोग काम करते थे। अगर दफ़्तरी समय में यह हादसा हुआ होता, तो मौतों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी। निर्माण की गुणवत्ता बेहद ख़राब थी।” एक चश्मदीद ने बताया, “कुछ लोग अभी भी वहाँ फंसे हो सकते हैं। यह कम से कम 5 मंज़िला इमारत थी। मेरी मौसी अभी भी वहाँ फंसी है।”

अभी भी जारी है तलाशी

अधिकारियों ने अभी तक हादसे के कारण पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन बचाव अभियान समाप्त होते ही विस्तृत जाँच शुरू किए जाने की उम्मीद है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि मलबे में कोई जीवित नहीं बचा, तब तक बचाव कार्य निर्बाध रूप से जारी रहेगा।

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