ईरान युद्ध रोकने के लिए अमेरिकी सीनेट ने भी दी मंज़ूरी, ट्रंप को बड़ा झटका, सदन के बाद सीनेट ने भी पास किया वॉर पावर्स प्रस्ताव

50-48 से मतदान, चार रिपब्लिकन सीनेटरों ने पार्टी लाइन तोड़ी; व्हाइट हाउस ने प्रस्ताव को बताया “बेमानी”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मंगलवार को कांग्रेस से एक और बड़ा राजनीतिक झटका मिला, जब सीनेट ने भी ईरान के साथ जारी सैन्य कार्रवाई को रोकने वाला वॉर पावर्स प्रस्ताव पास कर दिया। यह प्रस्ताव इससे पहले प्रतिनिधि सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) से 215-208 के मत से पारित हो चुका था। सीनेट में यह प्रस्ताव 50-48 के मतों से पारित हुआ, जिसमें रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल, सूज़न कॉलिन्स, लीसा मर्कोव्स्की और बिल कैसिडी ने डेमोक्रेट्स का साथ देकर पार्टी लाइन तोड़ी, जबकि डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने इसके विरोध में मतदान किया। यह पहली बार है जब इस तरह का कोई वॉर पावर्स प्रस्ताव दोनों सदनों सीनेट और हाउस से पास हुआ है। यह इस साल सीनेट का ईरान युद्ध रोकने के लिए दसवां प्रयास था, और 50-48 का यह नतीजा पहले के सभी प्रयासों के मुकाबले एक चौंकाने वाला बदलाव माना जा रहा है। 

दो रिपब्लिकन सीनेटरों की अनुपस्थिति बनी निर्णायक

प्रस्ताव के पास होने में दो वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटरों की अनुपस्थिति अहम रही। केंटकी के सीनेटर मिच मैककॉनेल को हाल ही में किसी अज्ञात बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके कारण वे मतदान में शामिल नहीं हो सके। पेंसिल्वेनिया के सीनेटर डेव मैककॉर्मिक भी मतदान से नदारद रहे।अगर ये दोनों सीनेटर मौजूद रहते और प्रस्ताव के विरोध में मतदान करते, तो नतीजा 50-50 की बराबरी पर अटक जाता और प्रस्ताव पास नहीं हो पाता।  व्हाइट हाउस ने भी इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि नतीजा रिपब्लिकन सीनेटरों की अनुपस्थिति की वजह से आया।

प्रस्ताव में क्या है?

इस प्रस्ताव में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है कि वे अमेरिकी सशस्त्र बलों को ईरान के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई से तब तक वापस बुलाएं, जब तक कांग्रेस युद्ध की औपचारिक घोषणा या सैन्य बल प्रयोग की मंज़ूरी न दे।हालांकि यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बंधनकारी नहीं है  यह राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए व्हाइट हाउस नहीं भेजा जाएगा, क्योंकि इसे सहवर्ती (कंकरेंट) प्रस्ताव के रूप में पेश किया गया था, जो केवल कांग्रेस की भावना को दर्शाता है। इसके बावजूद, इसे ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति पर कांग्रेस की सबसे तीखी और सांकेतिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है।

डेमोक्रेट्स का तीखा हमला

सीनेट में अल्पसंख्यक नेता चक शूमर ने मतदान के बाद कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज कांग्रेस ने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ खड़े होकर उनके महंगे, अनावश्यक और विनाशकारी ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए मतदान किया है। उन्होंने आगे कहा कि वर्षों तक ट्रंप ने ईरान पर “अधिकतम दबाव” डालने का वादा किया, लेकिन नतीजे में अमेरिकी जनता को अधिकतम भ्रम, अधिकतम अव्यवस्था और अधिकतम कीमत चुकानी पड़ी। शूमर ने इसे ट्रंप की “ऐतिहासिक भूल” करार दिया।

सीनेटर टिम कैन, जो लंबे समय से इस तरह के प्रस्ताव की वकालत करते रहे हैं, ने कहा कि युद्ध की घोषणा करने की सबसे गंभीर शक्ति कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं, और इसी सोच के साथ देश के संस्थापकों ने यह अधिकार विधायिका को सौंपा था। 

व्हाइट हाउस का जवाब: “कोई मतलब नहीं”

व्हाइट हाउस ने इस प्रस्ताव के महत्व को सिरे से नकार दिया। एक व्हाइट हाउस अधिकारी ने ईमेल बयान में कहा कि इस वोट का “कोई महत्व नहीं” है और यह न तो राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, न ही इसमें कानून का बल है। अधिकारी ने यह भी तर्क दिया कि प्रस्ताव में सेना को “हिंसा” से वापस बुलाने का निर्देश दिया गया है, जबकि 7 अप्रैल को हुए संघर्ष विराम के बाद से कोई हिंसा ही नहीं हो रही, जिससे सेना को वापस बुलाया जाए।

युद्ध और संघर्षविराम की पृष्ठभूमि

यह वोट ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्ज़रलैंड में 17 जून को हुए 14-सूत्रीय समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) की शर्तों पर बातचीत जारी है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह समझौता टिकेगा या नहीं। गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में दूसरी बार ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की — इससे पहले जून 2025 में भी उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े तीन प्रमुख ठिकानों पर बमबारी के लिए विमान भेजे थे। मौजूदा युद्ध 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमलों के साथ शुरू हुआ था, जिसे ट्रंप ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए ज़रूरी बताते रहे हैं, जबकि आलोचक इसे बिना उकसावे की आक्रामक कार्रवाई मानते हैं जिससे मध्य पूर्व में अस्थिरता और बढ़ी। संघर्षविराम को लेबनान में इज़राइल और ईरान-समर्थित हिज़्बुल्लाह के बीच जारी झड़पों से भी खतरा है इज़राइल ने लेबनान में हमले जारी रखे हैं, जो समझौते की उस शर्त का उल्लंघन है जिसमें सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकने की बात कही गई थी। 

आगे क्या?

यह प्रस्ताव बेशक सांकेतिक है, लेकिन इसने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी ट्रंप की ईरान नीति पर बढ़ती बेचैनी को उजागर कर दिया है। सीनेट आर्म्ड सर्विसेज़ कमेटी के अध्यक्ष रोजर विकर, सीनेटर टॉम कॉटन और सीनेटर टेड क्रूज़ जैसे कई वरिष्ठ रिपब्लिकन नेता भी ट्रंप के 14-सूत्रीय समझौते पर सवाल उठा चुके हैं। यह वोट ऐसे समय हुआ जब ट्रंप अगले दिन ही सीनेट रिपब्लिकनों की साप्ताहिक बैठक में भाग लेने कैपिटल हिल जाने वाले हैं, जहां इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर तनातनी और गहरा सकती है। डेमोक्रेट्स ने साफ कर दिया है कि वे यहीं नहीं रुकेंगे शूमर और कैन दोनों ने ट्रंप के सैन्य अभियान पर नियंत्रण के लिए वॉर पावर्स कानून बनाने का प्रयास जारी रखने की कसम खाई है।

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