UPSC Prelims: 8 सवालों पर विवाद, CAT ने UPSC को नोटिस जारी किया, 16 अंक दांव पर

UPSC Prelims: नई दिल्ली। यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की सिविल सर्विसेज प्रीलिमिनरी परीक्षा (CSE Prelims) 2026 के जनरल स्टडीज पेपर-I के आठ सवालों को लेकर विवाद गहरा गया है। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की प्रिंसिपल बेंच ने सोमवार (17 अगस्त) को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए यूपीएससी और भारत सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन सवालों में तथ्यात्मक गलतियां हैं, आधिकारिक आंसर की गलत है, कुछ सवालों में कोई सही विकल्प ही नहीं है और कुछ सवाल निर्धारित सिलेबस से बाहर हैं।

याचिका सचिन तिवारी और अन्य उम्मीदवारों ने दायर की है। इन्होंने जनरल स्टडीज पेपर-I (सेट ए) के प्रश्न संख्या 7, 11, 45, 60, 62, 82, 86 और 96 को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील शांतनु जुगतवत पेश हुए, जो पिछले 16 वर्षों से प्रैक्टिस कर रहे हैं और सबरीमाला व हाथरस जैसे मामलों में भी शामिल रहे हैं।

क्या है विवाद?
याचिका के अनुसार, छह सवालों (7, 45, 60, 82, 86 और 96) में यूपीएससी द्वारा चिह्नित सही जवाब आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों, वैधानिक प्रावधानों और प्रामाणिक स्रोतों के विपरीत हैं। वहीं प्रश्न 11 और 62 में चारों विकल्पों में से कोई भी कानूनी या तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने इन सवालों की तुलना प्राथमिक सरकारी रिकॉर्ड और आधिकारिक स्रोतों से की थी।

यूपीएससी ने 27 मई 2026 को जनरल स्टडीज पेपर-I की अनंतिम आंसर की जारी की थी और आपत्तियां आमंत्रित की थीं। याचिकाकर्ताओं ने निर्धारित समय सीमा में क्वेश्चन पेपर रिप्रेजेंटेशन पोर्टल के जरिए आपत्तियां दर्ज कराईं। इसके अलावा 2 जून को ईमेल के माध्यम से विस्तृत अभ्यावेदन भी भेजा, जिसमें प्रत्येक सवाल के समर्थन में दस्तावेज संलग्न थे। लेकिन यूपीएससी से कोई जवाब नहीं मिला। प्रीलिम्स का रिजल्ट जारी होने के बाद उन्होंने कैट का रुख किया।

क्या राहत मांगी गई?
याचिकाकर्ताओं ने यूपीएससी से अपनी आपत्तियों पर विचार करने, आंसर की को सही करने और विवादित सवालों को मूल्यांकन से हटाने की मांग की है। अंतरिम राहत के रूप में उन्होंने कैट से यह निर्देश देने को कहा है कि यूपीएससी यह बताए कि उनकी आपत्तियों पर क्या कार्रवाई हुई, उन्हें स्वीकार किया गया या खारिज, और खारिज करने के क्या कारण थे।

अंकों पर असर
 याचिका में दावा किया गया है कि नेगेटिव मार्किंग को ध्यान में रखते हुए ये आठ सवाल 16 अंक से अधिक प्रभावित कर सकते हैं। प्रीलिम्स की कट-ऑफ में यह अंतर कई उम्मीदवारों के मेन्स परीक्षा में पहुंचने या न पहुंचने का फैसला कर सकता है। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का हवाला दिया है, जिनमें स्पष्ट रूप से गलत आंसर की पर न्यायिक हस्तक्षेप संभव माना गया है।

मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को तय की गई है। यूपीएससी का जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। उल्लेखनीय है कि सिविल सर्विसेज मेन्स परीक्षा 2026 का एडमिट कार्ड जारी हो चुका है और परीक्षा 21 अगस्त से शुरू होने वाली है। यह मामला यूपीएससी परीक्षाओं में पारदर्शिता और आंसर की की सटीकता को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवादों की कड़ी में एक और अध्याय जोड़ता है। उम्मीदवार अब कैट के अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं।

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