घरेलू रसोई गैस (LPG) के दामों में एक बार फिर इजाफा कर दिया गया है। तेल विपणन कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 29 रुपये बढ़ा दी है। यह तीन महीनों में दूसरी बढ़ोतरी है, जो पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण आई है। नई कीमतें आज 7 जून से लागू हो गई हैं। दिल्ली में 14.2 किलो के घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत अब 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। इसी तरह अन्य प्रमुख शहरों में भी दाम बढ़े हैं—कोलकाता में 968 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये।
तेल कंपनियों पर घाटे का दबाव
राज्य-owned तेल कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) घरेलू LPG बिक्री पर भारी घाटा उठा रही थीं। उद्योग सूत्रों के अनुसार, इस बढ़ोतरी से पहले प्रति सिलेंडर करीब 703 रुपये का नुकसान हो रहा था। नई कीमत के बावजूद घाटा पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। कंपनियां आयातित LPG की ऊंची लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता से जूझ रही हैं। मार्च 2026 में भी घरेलू सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ाई गई थी। उसके बाद से वैश्विक घटनाक्रमों, खासकर पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे तेल और LPG की कीमतें बढ़ी हैं, जिसका असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। सरकार ने उपभोक्ताओं को पूर्ण प्रभाव से बचाने की कोशिश की है, लेकिन निरंतर दबाव के चलते आंशिक बढ़ोतरी जरूरी हो गई।
अन्य ईंधनों पर भी असर
LPG के साथ ही पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी हाल के हफ्तों में बढ़े हैं। पेट्रोल और डीजल में कुल 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, जबकि CNG में करीब 6 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है। ईंधन खुदरा विक्रेता अभी भी लागत से कम दाम पर बेच रहे हैं—पेट्रोल पर करीब 11 रुपये और डीजल पर 33.60 रुपये प्रति लीटर घाटा।
उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
यह बढ़ोतरी मध्यम वर्गीय परिवारों की रसोई की बजट पर सीधा असर डालेगी। Ujjwala योजना के तहत सब्सिडी वाले सिलेंडर लाभार्थियों को राहत मिल सकती है, लेकिन गैर-सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं को पूरा बोझ उठाना पड़ेगा। होटल, रेस्तरां और छोटे उद्योग पहले ही कमर्शियल LPG (19 किलो) के दामों में हालिया बढ़ोतरी (जून की शुरुआत में 42-53.50 रुपये) झेल चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने, PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा देने और ऊर्जा दक्षता पर जोर देने की जरूरत है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और उपभोक्ताओं पर बोझ हल्का पड़े। सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। वैश्विक बाजार की अस्थिरता बनी रही तो आगे भी दामों में उतार-चढ़ाव संभव है। आम उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे सब्सिडी का लाभ उठाएं और गैस बचत के उपाय अपनाएं। यह खबर उन लाखों परिवारों के लिए चिंता का विषय है जो रोजमर्रा की रसोई के लिए LPG पर निर्भर हैं। महंगाई के इस दौर में सरकार से उम्मीद है कि वह उपभोक्ताओं को अतिरिक्त राहत प्रदान करेगी।
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