बंगाल में ममता युग का अंत, अमित शाह तय करेंगे नया सीएम; तमिलनाडु में विजय की टीवीके का बड़ा दांव 

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक भूचाल आ गया है। राज्यपाल आर.एन. रवि ने गुरुवार को संवैधानिक प्रावधानों के तहत विधानसभा भंग कर दी, जिसके साथ ही ममता बनर्जी औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद से हट गईं। 2026 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की भारी जीत के बावजूद ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद राज्यपाल ने अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत यह कदम उठाया।  भाजपा की भारी जीत के बाद अब नए मुख्यमंत्री का फैसला आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता पहुंचकर लेंगे। वे नवनिर्वाचित भाजपा विधायकों के साथ बैठक करेंगे। सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है, हालांकि अन्य नामों पर भी चर्चा हो रही है। भाजपा की पहली बंगाल सरकार में अनुभवी और नए चेहरों का मिश्रण देखने को मिल सकता है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं: उत्साह, आशंका और तीखी बहस

सोशल मीडिया (विशेषकर एक्स/ट्विटर) पर इस घटनाक्रम ने तूफान मचा रखा है। भाजपा समर्थक इसे “बंगाल का मुक्ति दिवस” और “परिवर्तन की शुरुआत” बता रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा, “ममता का तानाशाही राज खत्म, अब विकास का समय”। सुवेंदु अधिकारी को “ममता को दो बार हराने वाले योद्धा” के रूप में सराहा जा रहा है। एक यूजर ने टिप्पणी की, “सुवेंदु दा ही सीएम बनें, क्योंकि वे बंगाल की पल्स जानते हैं और ममता के खिलाफ अंदर-बाहर लड़ सकते हैं।”  तृणमूल समर्थकों में गुस्सा और निराशा है। कुछ ने इसे “संवैधानिक तानाशाही” बताया, जबकि ममता बनर्जी के कैंप ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही। पोस्ट-पोल हिंसा और सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक की हत्या की घटना ने बहस को और तीखा कर दिया है। एक यूजर ने लिखा, “सीएम उम्मीदवार के पीए की हत्या — यह बंगाल की स्थिति दिखाता है।” आम जनता के बीच मिश्रित भावनाएं हैं — कई लोग विकास, कानून-व्यवस्था और पोस्ट-पोल हिंसा रोकने की उम्मीद जता रहे हैं, तो कुछ अल्पसंख्यक समुदाय में आशंका व्यक्त कर रहे हैं।

तमिलनाडु में नया संकट: विजय की टीवीके का अल्टीमेटम

दूसरी ओर, तमिलनाडु में भी राजनीतिक गतिरोध जारी है। अभिनेता-राजनेता विजय की तमिलगा वेट्ट्री कजगम (टीवीके) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है (108 सीटें), लेकिन बहुमत के लिए जरूरी समर्थन नहीं जुटा पाई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर डीएमके या एआईएडीएमके को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया गया तो सभी 107 विधायक सामूहिक इस्तीफा दे देंगे।  सोशल मीडिया पर इस खबर ने तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। टीवीके समर्थक इसे “लोकतंत्र की रक्षा” बता रहे हैं, जबकि विपक्षी खेमे में इसे “धमकी” कहा जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, “विजय जी का स्टैंड सही है — सिंगल लार्जेस्ट पार्टी को मौका मिलना चाहिए।” गवर्नर ने बहुमत साबित करने को कहा है, जिससे संकट गहरा गया है।

विश्लेषण और आम जनता की राय

देशभर में ये घटनाक्रम लोकतंत्र, संवैधानिक प्रक्रियाओं और क्षेत्रीय राजनीति की नई दिशा तय कर रहे हैं। बंगाल में भाजपा की जीत को “हिंदुत्व और विकास की जीत” माना जा रहा है, जबकि तमिलनाडु में ड्राविड़ पार्टियों के बीच गठबंधन की अटकलें चल रही हैं। आम नागरिक सोशल मीडिया पर विकास, रोजगार, सुरक्षा और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की अपेक्षा जता रहे हैं। बंगाल के कई युवा “परिवर्तन” की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं तमिलनाडु में स्थिर सरकार की मांग तेज हो रही है।अमित शाह की बैठक के बाद बंगाल में नया मुख्यमंत्री और कैबिनेट आज या जल्द घोषित होने की संभावना है। तमिलनाडु में गवर्नर के अगले कदम पर सबकी नजर है। राजनीतिक हलचल जारी है और दोनों राज्यों में स्थिति नाजुक बनी हुई है।

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