सरकार की पाकिस्तान स्पोर्ट्स पॉलिसी, द्विपक्षीय संबंधों पर सख्ती, लेकिन वैश्विक आयोजनों के लिए द्वार खुले

पहेलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ खेल संबंधों पर स्पष्ट नीति जारी कर दी है। खेल मंत्रालय के 5 मई के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच कोई द्विपक्षीय खेल आयोजन नहीं होंगे, लेकिन बहु-राष्ट्रीय (मल्टीलेटरल) अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में दोनों देशों के खिलाड़ी हिस्सा ले सकेंगे। यह नीति भारत को वैश्विक खेल केंद्र बनाने की महत्वाकांक्षा के अनुरूप है, जिसमें 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स, 2029 चैंपियंस ट्रॉफी और 2031 वनडे वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजन शामिल हैं।

नीति के मुख्य बिंदु:

द्विपक्षीय प्रतिबंध: भारतीय टीमें पाकिस्तान नहीं जाएंगी और पाकिस्तानी टीमें भारत में द्विपक्षीय मैच नहीं खेल सकेंगी। यह नियम न्यूट्रल वेन्यू पर भी लागू माना जा रहा है।

बहु-राष्ट्रीय आयोजन: अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों के नियमों और भारतीय खिलाड़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए भारत-पाक मुकाबले ICC इवेंट्स, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स या ओलंपिक जैसे मंचों पर हो सकेंगे।

वीजा सुविधा: पाकिस्तानी खिलाड़ियों, अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन प्रतिनिधियों के लिए वीजा प्रक्रिया सरल की जाएगी। मल्टी-एंट्री वीजा प्राथमिकता पर दिए जाएंगे, जिससे भारत में बड़े इवेंट्स सुचारू रूप से हो सकें। यह नीति पिछले साल अगस्त में जारी दिशानिर्देशों की पुनर्पुष्टि है, जब एशिया कप जैसे टूर्नामेंट्स के लिए स्पष्ट किया गया था कि मल्टीलेटरल इवेंट्स प्रभावित नहीं होंगे।

सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रियाएं

सोशल मीडिया (विशेषकर X/Twitter) पर इस खबर का तुरंत असर दिखा। कई यूजर्स ने इसे “संतुलित और व्यावहारिक” नीति बताया, जबकि कुछ ने सख्ती की मांग की। क्रिकेट प्रेमी और न्यूज हैंडल्स जैसे @MOCricket_, @ETVBharatEng, @DynamiteNews_ और @htTweets ने खबर को ब्रेकिंग के रूप में शेयर किया। एक पोस्ट में कहा गया, “कोई द्विपक्षीय नहीं, लेकिन ICC और अन्य इवेंट्स में मुकाबला जारी रहेगा।” कई यूजर्स ने सराहना की: “मोदी सरकार ने सही कदम उठाया। राजनीति अलग, खेल के अंतरराष्ट्रीय नियम अलग। भारत अब ग्लोबल स्पोर्ट्स हब बन रहा है।” (@IndiaToday, @IExpressSports जैसे हैंडल्स के पोस्ट्स पर कमेंट्स)।

कुछ ने आलोचना की: एक यूजर ने लिखा, “जोक पॉलिसी। पाकिस्तान ICC इवेंट्स में भारत के खिलाफ खेलने से इनकार कर सकता है।” जबकि दूसरे ने कहा, “पहेलगाम के बाद भी सॉफ्ट स्टैंड? द्विपक्षीय पूरी तरह बंद रखना चाहिए।” आम जनता की भावनाएं मिश्रित हैं। दिल्ली-एनसीआर और मुंबई जैसे शहरों में चर्चा में लोग कह रहे हैं कि “क्रिकेट का जुनून तो है, लेकिन सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं।” कई ने याद दिलाया कि 2025 एशिया कप और टी20 वर्ल्ड कप में भारत-पाक मुकाबलों पर सार्वजनिक आक्रोश हुआ था, जिसके बाद वीजा मुद्दे भी विवादास्पद रहे। पाकिस्तानी पक्ष से कुछ प्रतिक्रियाओं में इसे “भारत की दोहरी नीति” बताया गया, लेकिन ज्यादातर फोकस भारतीय घरेलू राय पर रहा।

विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों की राय

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति भारत को अंतरराष्ट्रीय खेल निकायों (IOC, ICC आदि) के साथ तालमेल बिठाने में मदद करेगी, जहां बहिष्कार की गुंजाइश नहीं है। भारत अब 2036 ओलंपिक और 2038 एशियन गेम्स की बोली लगा रहा है, इसलिए स्पष्ट नीति जरूरी थी। एक पूर्व क्रिकेटर ने निजी बातचीत में कहा, “द्विपक्षीय सीरीज का दौर 2013 के बाद ही खत्म हो चुका था। अब औपचारिक रूप दे दिया गया है।”

यह नीति पहेलगाम हमले के बाद की सुरक्षा चिंताओं को भी ध्यान में रखती है, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों के हितों (जैसे हॉकी प्रो लीग, वर्ल्ड कप में पाकिस्तान से मुकाबले) को सुरक्षित रखती है। आने वाले महीनों में कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में भारत-पाक सामना संभव है।कुल मिलाकर, सरकार की यह दोहरी रणनीति — राजनीतिक सख्ती + खेल कूटनीति — भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करती है। जनता की नजर अब इस पर है कि भविष्य के बड़े इवेंट्स में इसका कितना सकारात्मक असर पड़ेगा।

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