यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले में मुख्य आरोपी संभाजीनगर के नारेगांव से गिरफ्तार; ATS, NIA और IB भी अलर्ट पर, बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की नासिक बीपीओ यूनिट में महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के सनसनीखेज मामले में 25 दिनों से फरार मुख्य आरोपी निदा खान को गुरुवार को अंततः पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। नासिक पुलिस की स्पेशल टीम पिछले 25 दिनों से निदा खान की तलाश में जुटी थी। उसे छत्रपति संभाजीनगर के नारेगांव इलाके से पकड़ा गया।
गिरफ्तारी की पूरी कहानी
नासिक की इस मशहूर आईटी कंपनी के ऑफिस में कई महिला कर्मचारियों ने अपने सहकर्मियों पर यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव का आरोप लगाया था। यह घटना फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच की बताई जाती है। यह बड़ा विवाद सबसे पहले 26 मार्च 2026 को सामने आया, जब टीसीएस की देवलाली स्थित बीपीओ यूनिट की एक महिला कर्मचारी ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। नासिक पुलिस की स्पेशल टीम पिछले 25 दिनों से निदा खान की तलाश कर रही थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए निदा खान ने अग्रिम जमानत लेने की भी कोशिश की थी, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सकी। उसने गर्भावस्था का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत का अनुरोध किया था।
अदालत ने कहा ब्रेनवॉश कर मलेशिया भेजने की थी साजिश
नासिक की विशेष अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता वास्तव में बहुआयामी है। पीड़िता को सुनियोजित तरीके से बहला-फुसलाकर उसका ब्रेन वॉश करना और उसे मलेशिया भेजने की साजिश प्रतीत होती है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी जोशी ने 4 मई को अपने आदेश में कहा कि इस मामले की तह तक जाने के लिए हिरासत में लेकर पूछताछ करना आवश्यक है। रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से पता चलता है कि पीड़िता का नाम ‘हानिया’ बदलने के बाद निदा खान उसे मलेशिया भेजना चाहती थी। कोर्ट ने साफ कहा कि इस केस की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपित को पुलिस की गिरफ्त में रखना जरूरी है। कोर्ट का मानना है कि यह मामला काफी पेचीदा है, क्योंकि जांच में ‘मालेगांव पार्टी’ के साथ-साथ कई अन्य शहरों और विदेशों के नाम भी जुड़े मिले हैं। खासकर मलेशिया में बैठे ‘इमरान’ जैसे लोगों और इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए हिरासत में पूछताछ करना बेहद आवश्यक है।
निदा खान की भूमिका — ‘कन्वर्जन सिंडिकेट’ की मुख्य सूत्रधार
निदा खान ने पीड़िता को बुर्का पहनने, कलमा पढ़ने, रोजा रखने और नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया। इसके लिए उसने पीड़िता के फोन में इस्लामिक एप्स इंस्टॉल किए और उसे मजहबी रील के लिंक भी भेजे थे। विशेष जांच दल (SIT) ने निदा खान को इस पूरे कन्वर्जन सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार बताया है। उस पर 18 से 25 वर्ष की युवतियों को टारगेट कर उन्हें कन्वर्जन के लिए उकसाने का आरोप है। पीड़िता की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं ने दलील दी कि आरोपियों ने कंपनी में अपने पद का अनुचित लाभ उठाकर पीड़िता को उनका धर्म मानने के लिए मजबूर किया। पीड़िता की भावनाओं को ठेस पहुंचाकर उसे मांसाहारी भोजन खाने के लिए मजबूर किया गया और कार्यालय में उसकी जाति को लेकर उसका अपमान भी किया गया। वह टीसीएस नासिक में प्रोसेस एसोसिएट के पद पर काम करती थी। आरोप सामने आने के बाद कंपनी ने उसे निलंबित कर दिया था।
मामले का दायरा — राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क
नासिक मल्टीनेशनल कंपनी में कथित कॉर्पोरेट जिहाद का मामला अब एक सामान्य क्राइम केस से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन गया। इसी कारण ATS, NIA और IB जैसी केंद्रीय एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गई हैं। अब तक इस मामले में 12 लिखित शिकायतें दर्ज की गई हैं और 9 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। पुलिस ने 7 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि मुख्य आरोपी निदा खान अब तक गिरफ्त से बाहर थी। इस बीच, नासिक की एक अदालत ने बीते मंगलवार को इसी मामले के 4 मुख्य आरोपियों — रजा रफीक मेमन, तौसीफ बिलाल अत्तार, दानिश एजाज शेख और शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी — को 18 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
आरोपों की कानूनी पृष्ठभूमि
देवलाली पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, निदा खान, दानिश शेख और तौसीफ पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। इनमें झूठा विवाह का वादा करके यौन संबंध बनाना, यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना शामिल है। तीनों पर SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत भी आरोप लगे हैं।
टीसीएस का रुख
आईटी दिग्गज कंपनी टीसीएस ने अपनी छवि और कार्यसंस्कृति को लेकर स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या जबरदस्ती को बर्दाश्त नहीं करती।
बचाव पक्ष का तर्क
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि महाराष्ट्र में धर्म बदलने को लेकर कोई अलग कानून नहीं है और यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित था, जिसकी शुरुआत आपसी विवादों से हुई थी। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
सामाजिक प्रतिक्रिया
नासिक टीसीएस में हिंदू फीमेल स्टाफ के यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण की कोशिश का यह मामला केवल एक-दो केस का विवाद नहीं, बल्कि एक संगठित साजिश का रूप माना जा रहा है। इस केस के तार कई स्तरों से जुड़े बताए जा रहे हैं। निदा खान की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने पुलिस की कार्रवाई का स्वागत किया, वहीं महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर धार्मिक दबाव के सवालों पर बहस तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों ने इस मामले में त्वरित न्याय की मांग की है। अब जांच एजेंसियों की नजर मलेशिया में बैठे ‘इमरान’ और उसके नेटवर्क पर है। निदा की गिरफ्तारी से इस पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के बारे में अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।
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