नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) पर 15 जून से कमर्शियल उड़ानों की शुरुआत के साथ ही यात्रियों को लाने-ले जाने वाले वाहनों के लिए नई पार्किंग और पिक-एंड-ड्रॉप व्यवस्था लागू कर दी गई है। एयरपोर्ट प्रबंधन ने यातायात नियंत्रण और टर्मिनल के आसपास जाम की समस्या रोकने के उद्देश्य से सख्त नियम और शुल्क संरचना घोषित की है।
नए नियमों के मुताबिक, टर्मिनल के सामने पिक-एंड-ड्रॉप के लिए वाहनों को बिना किसी शुल्क के अधिकतम सात मिनट रुकने की अनुमति है। यदि वाहन सात मिनट से अधिक समय तक रुकता है तो ड्राइवर को अपनी गाड़ी एयरपोर्ट की निर्धारित पार्किंग में ले जाकर पार्किंग शुल्क चुकाना होगा। निजी और वाणिज्यिक वाहनों के लिए पार्किंग दरों में फर्क रखा गया है।
पार्किंग शुल्क की मुख्य बातें:
निजी वाहन: पहले दो घंटे के लिए एकमुश्त चार्ज 150 रुपये; उसके बाद हर अतिरिक्त घंटे के लिए 100 रुपये प्रति घंटा।
वाणिज्यिक वाहन (कैब/टैक्सी): पहले दो घंटे के लिए एकमुश्त चार्ज 200 रुपये; उसके बाद हर अतिरिक्त घंटे के लिए 100 रुपये प्रति घंटा।
पूरे दिन के लिए (एकमुश्त): निजी वाहनों के लिए 600 रुपये; वाणिज्यिक वाहनों के लिए 700 रुपये।
एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था यात्रियों के आराम और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लागू की गई है, साथ ही टर्मिनल के आसपास के ट्रैफिक प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए जरूरी भी है। अधिकारीयों ने बताया कि पिक-एंड-ड्रॉप जोन से सीधे टर्मिनल और पार्किंग एरिया तक पहुंचने की सुविधा बनी रहेगी, परन्तु नियमों का उल्लंघन करने पर चालकों के खिलाफ जुर्माना और उपकरणों के उपयोग से सख्ती की जा सकती है।
यात्रियों और टैक्सी चालकों की प्रतिक्रिया मिली-जुली
टर्मिनल पर मौजूद यात्रियों और कैब चालकों ने नई व्यवस्था पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कुछ यात्रियों ने कहा कि सात मिनट का निःशुल्क समय पर्याप्त है और इससे टर्मिनल के बाहर भीड़ कम होगी। वहीं कुछ निजी वाहन चालकों ने चिंता जताई कि यदि फ्लाइट की देरी या बैगेज संबंधी कारणों से अधिक समय रुकना पड़े तो अतिरिक्त शुल्क बोझ बन सकता है। कैब संघों ने प्रारंभ में कहा कि दैनिक आधार पर कुछ चालक प्रभावित होंगे, परंतु यदि एयरपोर्ट पर परिचालन सुचारु रहता है तो यह नियम स्वीकार्य है।
प्रबंधन की तैयारी और निगरानी
एयरपोर्ट पर तैनात यातायात टीम और सीसीटीवी निगरानी के जरिए पिक-एंड-ड्रॉप क्षेत्रों और पार्किंग एरियाज की कड़ाई से निगरानी की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि शैड्यूल फ्लाइट्स बढ़ने के साथ-साथ पार्किंग एवं पिक-अप व्यवस्थाओं को आगे और समायोजित किया जा सकता है ताकि यात्रियों और सेवाकारियों दोनों के लिए सुविधा बनी रहे। साथ ही, डिजिटलीकृत भुगतान और पे-पर-यूज़ विकल्प पर भी काम किया जा रहा है ताकि आवागमन और शुल्क संग्रह में पारदर्शिता बनी रहे।
कानूनी और प्रशासनिक पहलू
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सूत्रों के अनुसार, पार्किंग शुल्क और पिक-एंड-ड्रॉप नीति को मौजूदा नागरिक उड्डयन नियमों और स्थानीय यातायात प्राधिकरण की सिफारिशों के अनुरूप तैयार किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर शुल्क और नियमों की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
निष्कर्ष
जेवर एयरपोर्ट पर लगाए गए ये शुल्क और पिक-एंड-ड्रॉप नियम टर्मिनल के बाहर यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने का प्रयास हैं। शुरुआती दिनांक के बाद यात्रियों और परिवहन सेवाओं से फीडबैक मिलने पर प्रशासन इन नीतियों में छोटे-मोटे बदलाव कर सकता है, पर फिलहाल 7 मिनट की मुफ्त रुकने की सीमा और पहले दो घंटों के लिए तय दरें ग्रामीण व शहरी दोनों तरह के उपयोगकर्ताओं पर लागू रहेंगी।

