ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने ईस्ट और वेस्ट क्षेत्रों में आवारा कुत्तों को व्यवस्थित ढंग से खाना खिलाने और समाजवादी विवादों को कम करने के उद्देश्य से 1,200 चिन्हित फीडिंग प्लेटफॉर्म (चबूतरे) बनवाने का बड़ा निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार इन प्लेटफार्मों के निर्माण पर लगभग ₹1.8 करोड़ का खर्च आएगा और कार्य चरणबद्ध तरीके से एक से दो महीनों के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।
प्राधिकरण ने निविदा जारी कर दी है और निर्माण से पहले स्थानीय हितधारकों के साथ समन्वय सुनिश्चित करने का फैसला किया है। वरिष्ठ प्रबंधक राजेश कुमार गौतम ने बताया कि चबूतरे बनाने से पहले पशु प्रेमियों, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन्स (आरडब्ल्यूए), एसोसिएशन ऑफ ओनर्स एंड आवासीय एसोसिएशन्स (एओए) और अन्य स्थानीय निवासियों के साथ बैठकों का दौर चलाया जाएगा। “सभी पक्षों की सहमति मिलने पर ही चुनी गई जगहों पर निर्माण शुरू किया जाएगा। यदि सर्वसम्मति नहीं बनती है तो एक सात सदस्यीय समिति अंतिम फैसला लेगी,” उन्होंने कहा।
नियमित स्थानों पर खाना देने का मकसद सुरक्षा व स्वच्छता
प्राधिकरण ने कहा है कि चबूतरे सार्वजनिक स्थानों और आवासीय परिसरों के आसपास विशेष रूप से हाईराइज सोसायटियों तथा समूह आवासीय इलाकों के पास बनाए जाएंगे। प्रत्येक चबूतरे पर सूचना पट्ट भी लगाया जाएगा, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा होगा कि यह स्थान आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए आरक्षित है। इन विशेष फीडिंग जोनों को चिन्हित करने का उद्देश्य न केवल कुत्तों को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराना है, बल्कि सोसायटी के सदस्यों और स्थानीय लोगों में सुरक्षा, साफ़-सफ़ाई व स्वच्छता को लेकर उठने वाली चिंताओं को भी कम करना बताया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कदम
प्राधिकरण ने कहा कि यह पहल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सार्वजनिक स्थानों पर अनियंत्रित रूप से खाना खिलाने पर लगी पाबंदियों को ध्यान में रखकर की जा रही है। सड़क किनारे या सार्वजनिक जगहों पर असंगठित रूप से खाना खिलाने से होने वाली असुविधा और बहस खत्म करने के लिए तय स्थानों पर फीडिंग जोन बनवाए जा रहे हैं ताकि दोनों पक्ष — पशु प्रेमी और अन्य निवासी — संतुष्ट रहें और कानून का पालन भी सुनिश्चित हो।
पहचान शुरू, फिलहाल 12 चिन्हित स्थान
प्राधिकरण ने बताया कि आरडब्ल्यूए और एओए की मदद से संभावित स्थानों की पहचान का काम शुरू कर दिया गया है। फिलहाल ईस्ट-वेस्ट में कुल 12 स्थानों को चिन्हित किया जा चुका है और आवश्यकता के अनुसार इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। निर्माण का काम किस चरण में होगा और किन-किन सेक्टरों में सबसे पहले चबूतरे बनेंगे, इस बारे में अंतिम सूची तब जारी की जाएगी जब स्थानीय बैठकें और सर्वसम्मति की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रियाएँ और आशंकाएँ
कुछ सोसायटी प्रतिनिधियों ने स्वागत करते हुए कहा कि निर्धारित चबूतरे होने से अप्रिय घटनाओं और सफाई से जुड़ी समस्याओं में कमी आएगी। वहीं कुछ निवासियों ने कहा कि केवल चबूतरे बनाना पर्याप्त नहीं होगा; समय-समय पर उनका रख-रखाव, नियमों का पालन और कुत्तों के प्रबंधन के लिए पशु कल्याण समूहों के साथ समन्वय जरूरी होगा। पशु प्रेमी समूहों ने भी शुरुआत में योजना का समर्थन किया है, पर उन्होंने सुरक्षित और मानवीय तरीके से भेजे जाने वाले खाने के प्रावधान और नियमित ट्रैकिंग पर जोर दिया।
अगले कदम और समय-सीमा
प्राधिकरण का कहना है कि आवश्यक अनुमतियाँ मिलने और सर्वसम्मति बनते ही एक से दो महीने के भीतर निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। काम चरणबद्ध रूप से पूरा किया जाएगा और काम के दौरान स्थानीय निवासियों को समय-समय पर सूचित किया जाएगा। राजेश कुमार गौतम ने बताया कि अगर किसी स्थान पर विवाद उत्पन्न होता है तो सात सदस्यीय समिति हस्तक्षेप कर अंतिम निर्णय लेगी। यह पहल आवारा पशुओं की भलाई और शहर की सामूहिक जीवनशैली के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। अब यह देखने की बात होगी कि लागू करने और रखरखाव के स्तर पर यह योजना कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या इससे ग्रेटर नोएडा के आवासीय विवादों में वास्तविक कमी आती है।

