नागरिक संस्था नोएडा सिटीजन फोरम (NCF) की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह ने आज नोएडा प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकारी अधिकारियों से सार्वजनिक जनहित के मुद्दों पर पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि “न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है” और प्रशासन को नागरिकों के विश्वास को मजबूत रखना चाहिए।
युवराज मेहता मौत मामले में जांच पर सवाल
शालिनी सिंह ने सेक्टर‑150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत की घटना को नोएडा जैसे हाईटेक शहर की “शर्मनाक विफलता” बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा गठित एसआईटी को पांच दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश होने के बावजूद लगभग 100 दिन लगाए गए, जबकि फोरम ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी पक्षों को अपने बयान देने का अवसर देने की मांग की थी। सिंह ने आरोप लगाया कि तैयार रिपोर्ट “दारोगा स्तर” की लगती है, जिसमें निचले स्तर के अधिकारियों पर ही दोष लगाकर ऊपरी पदाधिकारियों को बचाया गया है। युवराज के परिजनों सहित कई पक्षों ने रिपोर्ट पर असंतोष जताया है, क्योंकि इसकी पारदर्शिता पर प्रश्न उठते हैं। फोरम ने मांग की है कि एसआईटी की रिपोर्ट को रद्द कर इस मामले में “ज्यूडिशियल इंक्वायरी” (न्यायिक जांच) कराई जाए, ताकि दोषी कोई भी अधिकारी छूट न सके।
अवैध बैंक्वेट हॉलों में सार्वजनिक आयोजनों पर रोक
शालिनी सिंह ने नोएडा में कई बैंक्वेट हॉलों/बारात घरों को अवैध घोषित होने के बावजूद उनमें लगातार शादी–समारोह और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि जिन बैंक्वेट हॉलों को नोएडा प्राधिकरण ने “अवैध और सरकारी भूमि पर निर्मित” घोषित किया है, उन पर निजी व्यक्तियों का मुनाफा और सार्वजनिक आयोजनों का अधिकार गैरकानूनी ढंग से जारी है।
फोरम ने प्रशासन से अनुरोध किया कि ऐसे सभी अवैध घोषित बैंक्वेट हॉलों में सार्वजनिक आयोजनों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए और उन्हें ध्वस्तीकरण तक “सील” कर दिया जाए। साथ ही संबंधित थाना व प्राधिकरण अधिकारियों की जवाबदेही तय कर लापरवाही पकड़े जाने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। सिंह ने यह भी जोर दिया कि किसी भी अवैध इमारत, विवादित भूमि या बैंक्वेट हॉल में सरकारी या संवैधानिक पदों पर आसीन जनप्रतिनिधियों के कार्यक्रम नहीं रखे जाएं, नहीं तो सरकार और शासक दल की “भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली छवि” बनती है।
अवैध डंपिंग ग्राउंड में लगी भीषण आग और पर्यावरण चिंता
फोरम ने नोएडा के सेक्टर‑145, 32 और 123 में अवैध और अस्थाई डंपिंग ग्राउंड में लगातार लग रही भीषण आग को जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया। शालिनी सिंह ने कहा कि इन डंपिंग स्थलों पर जलते रहे कचरे से गाड़ी व आसपास के आवासों में जहरीली गैस, धुआं और वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे श्वास संबंधी बीमारियां बढ़ने का खतरा है। फोरम ने मांग की कि सभी अवैध डंपिंग ग्राउंड तत्काल बंद करने के साथ‑साथ नोएडा के लिए वैज्ञानिक और स्थायी कचरा निस्तारण व्यवस्था लागू की जाए, और टीडीए, नगर निगम व अन्य जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाए।
खराब पेयजल आपूर्ति और टूटी सीवर लाइनें पर जोर
शालिनी सिंह ने नोएडा में कई सालों से “स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल आपूर्ति” से वंचित रहने वाले सेक्टरों, गांवों और सोसाइटियों की स्थिति पर चिंता जताई और इसे नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा कि नोएडा प्राधिकरण “वर्ल्ड‑क्लास सिटी” जैसा दावा करते हुए भी नागरिकों को स्वच्छ पीने के पानी की गारंटी नहीं दे पाया, जो शर्मनाक है। फोरम ने प्रशासन से मांग कि सभी क्षेत्रों में नियमित, अड़चन‑मुक्त और जल गुणवत्ता‑परीक्षण के बाद की जाने वाली पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, और जल गुणवत्ता की नियमित रिपोर्टें सार्वजनिक की जाएं। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त करने जैसी कठोर कार्रवाई भी फोरम ने जरूरी बताई।
साथ ही नोएडा के कई सेक्टरों में टूटी‑फूटी सीवर लाइनों के कारण दूषित गंदे पानी के घरों में घुसने की समस्या पर फोरम ने नई सीवर लाइनें बिछाए जाने की मांग की। सिंह ने कहा कि शहर करीब चार दशक पुराना हो चुका है, लेकिन प्राधिकरण ने अभी तक जर्जर सीवर नेटवर्क को अपडेट नहीं किया, जिसके कारण नालों का पानी लोगों के घरों और आंगनों तक आ जाता है।
नोएडा प्रशासन के प्रति नागरिकों का विश्वास बनाए रखने की अपील
शालिनी सिंह ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए, उनकी बात सुननी चाहिए और समयबद्ध तरीके से निस्तारण करना चाहिए। फोरम ने यह भी स्पष्ट किया कि वह उन अधिकारियों की पहचान करेगा जो नोएडा और उसकी जनता के प्रति लापरवाह और उदासीन रवैया रखते हैं।

