रोहिणी हादसा: दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-16 के जी-4 पॉकेट में सोमवार शाम भारी बारिश के बीच एक निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए, जिन्हें निकालने के लिए दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और NDRF की टीमें रात भर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं। घटनास्थल से सामने आए एक भावुक वीडियो में एक रेस्क्यू जवान मलबे के नीचे फंसे व्यक्ति को हौसला देते हुए कहता सुनाई दे रहा है- “घबराना मत… सबको बचा लेंगे।” यह शब्द मलबे की अंधेरी तहों में फंसी जानों के लिए उम्मीद की किरण बन गए हैं।
सोमवार को रोहिणी सेक्टर-16 स्थित जी-4 पॉकेट में निर्माणाधीन इमारत ढहने की घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। आंखों के सामने सीमेंट, सरिया और ईंटों का पहाड़ मजदूरों पर ढह पड़ा। धूल के गुबार छंटते ही चीख-पुकार मच गई। परिजनों और स्थानीय लोगों की निगाहें हर हलचल पर टिकी रहीं, जबकि राहत-बचाव दल बिना समय गंवाए मोर्चा संभाल लिया। दमकल की कई गाड़ियां, पुलिस और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। भारी मशीनों के साथ-साथ जवान हाथों से मलबा हटाते नजर आए ताकि नीचे फंसे लोगों को कोई अतिरिक्त नुकसान न पहुंचे।
प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य के मलबे में फंसे होने की आशंका है। रेस्क्यू टीमों ने कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है, लेकिन ऑपरेशन अभी भी जारी है। मलबे में दबे एक व्यक्ति के सिर्फ हाथ दिखाई दे रहे थे और वह मदद की गुहार लगा रहा था। रेस्क्यू जवान लगातार उससे बात करते हुए आश्वासन दे रहे थे कि मलबा हटाया जा रहा है और सबको बचाया जाएगा। यह दृश्य हर किसी को भावुक कर गया।
सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
यह हादसा निर्माण स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों की लापरवाही को एक बार फिर उजागर करता है। भारी बारिश में निर्माणाधीन इमारत का ढहना कई सवाल खड़े कर रहा है- क्या मौसम को ध्यान में रखकर काम रोका गया था? क्या मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण उपलब्ध थे? क्या बिल्डर द्वारा मानकों का पालन किया गया? पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तैयारी में है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री और स्थानीय प्रशासन ने घटना पर दुख जताया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि बचाव कार्य तेज गति से चल रहा है और सभी पीड़ितों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। स्थानीय निवासियों ने भी मदद के लिए आगे आए हैं।
देशभर में ऐसे हादसे: दोहराई जा रही लापरवाही
यह हादसा अकेला नहीं है। देश भर में निर्माण स्थलों पर ऐसे दुर्घटनाएं नियमित रूप से हो रही हैं, खासकर मानसून के मौसम में। कुछ हालिया उदाहरण:
बेंगलूरु (2024): भारी बारिश में सात मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढही, जिसमें कई मजदूर मारे गए।
कोलकाता (हालिया): अंडर-कंस्ट्रक्शन वेयरहाउस ढहने से कई मौतें।
लखनऊ (2024): तीन मंजिला इमारत गिरने से आठ मौतें।
दिल्ली में ही साकेत और अन्य इलाकों में हाल के महीनों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान हुआ।
इन हादसों में आमतौर पर बिल्डरों, ठेकेदारों और निगरानी एजेंसियों (MCD, DDA आदि) की लापरवाही सामने आती है। अवैध निर्माण, घटिया सामग्री, बिना अनुमति का काम और मौसम संबंधी जोखिमों को नजरअंदाज करना मुख्य कारण होते हैं। पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा और मजदूरों के लिए बेहतर सुरक्षा कानूनों का सख्ती से पालन जरूरी है।
वर्तमान में रोहिणी हादसे में रेस्क्यू ऑपरेशन पूरे जोरों पर है। हर गुजरते पल के साथ उम्मीद और चिंता का सिलसिला जारी है। प्रशासन से अपील है कि पारदर्शिता बरती जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि ऐसे हादसे भविष्य में न हों। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है। रेस्क्यू टीम के हर जवान को सलाम, जो अंधेरे में उम्मीद की रोशनी बनकर खड़े हैं।

