नई दिल्ली/केरल: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केरल में पार्टी का प्रमुख ईसाई चेहरा माने जाने वाले जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उनका यह इस्तीफा राज्यसभा का कार्यकाल (21 जून 2026) समाप्त होने और पार्टी द्वारा उन्हें दोबारा उच्च सदन (राज्यसभा) न भेजे जाने के फैसले के बाद आया है।
जॉर्ज कुरियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा और सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए पीएम मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि वे कभी केंद्रीय मंत्री बनेंगे।
राजनीति में कब और कैसे आए जॉर्ज कुरियन?
जॉर्ज कुरियन का राजनीतिक सफर बेहद लंबा और वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध रहा है। केरल जैसे राज्य में जहां भाजपा संघर्ष कर रही थी, वहां कुरियन शुरुआती दौर से ही पार्टी के साथ जुड़े:
- 1980 से शुरुआत: जॉर्ज कुरियन वर्ष 1980 में भाजपा की स्थापना के समय से ही इसके सक्रिय सदस्य रहे हैं। वे उन गिने-चुने नेताओं में से हैं जिन्होंने केरल में जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत किया।
- युवा मोर्चा में भूमिका: अपने राजनीतिक सफर के शुरुआती दिनों में उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
- विभिन्न संगठनात्मक पद: वे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, केरल भाजपा के उपाध्यक्ष और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता भी रहे हैं।
- पीएम मोदी के आधिकारिक अनुवादक: जब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केरल के दौरे पर आते थे, जॉर्ज कुरियन उनके भाषणों का मलयालम में अनुवाद करते थे, जिससे वे केंद्रीय नेतृत्व की नजरों में और करीब आए।
जॉर्ज कुरियन की पूरी जीवनी और मुख्य उपलब्धियां
जॉर्ज कुरियन का जन्म 20 सितंबर 1960 को केरल के कोट्टायम जिले के एट्टूमानूर नगरपालिका के अंतर्गत आने वाले नंबियाकुलम में हुआ था। वह अपने माता-पिता की पांच संतानों में सबसे छोटे हैं।
- शिक्षा और वकालत: उन्होंने कोट्टायम से अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने कानून (LLB) की डिग्री हासिल की और राजनीति शास्त्र में पोस्ट-ग्रेजुएशन (MA) किया। राजनीति में सक्रिय होने के साथ-साथ वह भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में एक वकील के रूप में भी अभ्यास करते रहे हैं।
- अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष: वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Commission for Minorities) के उपाध्यक्ष बनने वाले पहले मलयाली व्यक्ति थे।
- विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD): पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के कार्यकाल के दौरान जॉर्ज कुरियन ने उनके ओएसडी (OSD) के रूप में भी कार्य किया था।
- चुनावी राजनीति: उन्होंने केरल विधानसभा चुनावों में भी किस्मत आजमाई। साल 2016 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पुथुपल्ली निर्वाचन क्षेत्र से तत्कालीन मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता ओम्मन चांडी के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
- केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा: 9 जून 2024 को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में केंद्रीय राज्य मंत्री (अल्पसंख्यक मामले तथा मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय) के रूप में शपथ ली थी, जिसके बाद वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए थे।
पारिवारिक पृष्ठभूमि (Family Background)
जॉर्ज कुरियन एक बेहद साधारण और सम्मानित ईसाई परिवार से आते हैं। वह सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च (Syro-Malabar Catholic Church) से ताल्लुक रखते हैं।
- माता-पिता: उनके पिता का नाम कुरियन और माता का नाम अन्नम्मा है।
- पत्नी: जॉर्ज कुरियन की पत्नी लेफ्टिनेंट कर्नल ओ. टी. अन्नम्मा हैं, जो भारतीय सेना (Indian Army) से एक सेवानिवृत्त नर्सिंग अधिकारी (Retired Nursing Officer) हैं।
- बच्चे: जॉर्ज कुरियन और अन्नम्मा के दो बेटे हैं, जिनका नाम आदर्श जॉर्ज पोकरन और आकाश जॉर्ज पोकरन है।
मंत्रिमंडल से विदाई के बाद अब यह माना जा रहा है कि जॉर्ज कुरियन वापस केरल लौटेंगे और राज्य में भाजपा के संगठनात्मक कार्यों और ईसाई समुदाय के बीच पार्टी की पैठ को और मजबूत करने के लिए काम करेंगे।
जॉर्ज कुरियन के राजनीतिक सफर, उनके इस इस्तीफे की पृष्ठभूमि और उनके जीवन से जुड़े अन्य पहलुओं को करीब से समझने के लिए आप इस जॉर्ज कुरियन जीवनी वीडियो को देख सकते हैं, जो उनके कैबिनेट से बाहर होने के राजनीतिक प्रभाव को भी रेखांकित करता है।

