लापरवाही की भारी कीमत: DPS सेक्टर-132 नोएडा में फुटबॉल खेलते समय अस्थमा अटैक से 10वीं के छात्र की दर्दनाक मौत, स्कूल पर लापरवाही के गंभीर आरोप

गर्मी और उमस भरे मौसम में स्कूल के खेल मैदान पर फुटबॉल खेलते समय एक मासूम छात्र की अस्थमा अटैक से मौत हो गई। घटना दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), सेक्टर-132 स्थित एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में बुधवार दोपहर करीब 1 बजे हुई, जिसमें 15 वर्षीय 10वीं कक्षा का छात्र बेहोश होकर गिर पड़ा। साथी छात्रों और अभिभावकों के अनुसार, स्कूल की मेडिकल सुविधाओं में कथित लापरवाही और देरी ने इस हादसे को मौत में बदल दिया।

घटना का क्रम

छात्र मूल रूप से आगरा का निवासी था और नोएडा की एक हाईराइज सोसायटी में परिवार के साथ रहता था। वह पहले से अस्थमा से पीड़ित था और स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी गई थी। वह हमेशा इनहेलर साथ रखता था। बुधवार को स्कूल खुलने के पहले दिन ही दोपहर के स्पोर्ट्स पीरियड में तेज गर्मी में बच्चों को मैदान पर फुटबॉल खेलने के लिए भेजा गया। अचानक छात्र को सांस लेने में दिक्कत हुई, वह गिर पड़ा। सहपाठियों ने तुरंत मदद की, सीपीआर दिया और उसे मेडिकल रूम पहुंचाया। अभिभावकों और छात्रों के आरोपों के मुताबिक, मेडिकल रूम में स्टाफ और नर्स द्वारा त्वरित प्राथमिक उपचार नहीं किया गया। बार-बार अस्पताल ले जाने की अपील के बावजूद स्टाफ ने इंतजार करने को कहा। पास ही स्थित मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल महज 30-100 मीटर दूर होने के बावजूद छात्र को ले जाने में करीब 20 मिनट की देरी हुई। रास्ते में उसकी हालत बिगड़ गई और अस्पताल पहुंचने से पहले या पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार का आरोप है कि मेडिकल रूम में बुनियादी जीवन रक्षक उपकरण जैसे ऑक्सीजन सिलेंडर तक उपलब्ध नहीं था।

परिवार और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

परिवार में इकलौते बेटे की मौत से मातम छा गया है। छात्र के पिता ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया और परिवार आगरा रवाना हो गया। परिजनों ने पोस्टमार्टम भी नहीं कराया। हालांकि, सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा है। कई अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर भारी फीस वसूलने के बावजूद बच्चों की सुरक्षा और आपातकालीन सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने स्कूल से मेडिकल रजिस्टर, एम्बुलेंस लॉग और सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की। कुछ अभिभावक स्कूल गेट पर इकट्ठा हुए, लेकिन प्रबंधन ने उन्हें हटवा दिया। एक अभिभावक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा कि उमस भरे मौसम में बच्चों को मैदान पर भेजा जाना और मेडिकल स्टाफ की देरी ने इस त्रासदी को आमंत्रित किया।

स्कूल और पुलिस की स्थिति

स्कूल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सेक्टर-126 थाना पुलिस ने स्वतंत्र रूप से जांच शुरू कर दी है। एसएचओ ने बताया कि स्कूल प्रबंधन से जानकारी ली गई है और सीसीटीवी फुटेज कब्जे में लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल आरोपों को भी जांच में शामिल किया गया है। कुछ रिपोर्टों में परिवार के हवाले से कहा गया है कि स्कूल की ओर से कोई देरी नहीं हुई, लेकिन व्यापक आरोपों के कारण जांच जारी है।

व्यापक सवाल और मांगें

यह घटना निजी स्कूलों में मेडिकल सुविधाओं, प्रशिक्षित स्टाफ और आपातकालीन तैयारियों की कमी पर गंभीर सवाल खड़ी करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में अस्थमा या हीट स्ट्रेस के मरीजों के लिए त्वरित उपचार, ऑक्सीजन, फर्स्ट-एड किट और निकटवर्ती अस्पताल से तत्काल कनेक्शन अनिवार्य होना चाहिए। अभिभावक स्वतंत्र जांच, सभी स्कूलों में आपातकालीन सुविधाओं की अनिवार्य सूची और नियमित ऑडिट की मांग कर रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों और नागरिक समाज ने कहा कि शिक्षा का मंदिर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का केंद्र होना चाहिए, न कि लापरवाही का शिकार। यदि लापरवाही साबित हुई तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यह दुखद घटना पूरे शिक्षा तंत्र को जिम्मेदारी की याद दिलाती है। परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है, जबकि अभिभावक अब अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्क हो गए हैं। पुलिस जांच के नतीजे और स्कूल प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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