पीएम मोदी का स्वदेशी अपील, क्या अच्छे दिन की जगह आ गया बुरे दिन?

वैश्विक तेल संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वे विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए व्यावहारिक कदम उठाएं। हैदराबाद (सेकंदराबाद) में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने काम से घर (WFH), पेट्रोल-डीजल की बचत, अनावश्यक विदेश यात्राएं टालने और खासकर शादियों समेत किसी भी अवसर पर एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने कहा, “सोने की खरीदारी विदेशी मुद्रा का बड़ा उपयोग करती है। राष्ट्रीय हित में हम एक साल के लिए संकल्प करें कि परिवार में किसी भी कार्यक्रम या शादी में सोना न खरीदें।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह दान देने का समय नहीं है, लेकिन देश की मजबूती के लिए छोटे-छोटे प्रयास जरूरी हैं।

क्यों आई यह अपील? आर्थिक गणित समझिए

वर्तमान में पश्चिम एशिया (ईरान-अमेरिका संघर्ष) के कारण स्ट्रेट ऑफ हरमुज के रास्ते तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है, जिसकी सालाना लागत लगभग 135 बिलियन डॉलर के आसपास है। सोने के आयात की लागत भी करीब 72 बिलियन डॉलर है, जबकि खाद्य तेल (वेजिटेबल ऑयल) करीब 19.5 बिलियन डॉलर। इन आयातों से चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ रहा है, रुपया दबाव में है और विदेशी मुद्रा भंडार पर बोझ बढ़ रहा है।

सोना भारत में परंपरा, बचत और शादियों का अभिन्न हिस्सा है। देश दुनिया के सबसे बड़े सोने के आयातकों में शामिल है और शादी-त्योहारों के मौसम में आयात अचानक बढ़ जाता है। पीएम मोदी ने इसे “मध्य वर्ग की संस्कृति” से भी जोड़ा और कहा कि विदेशी छुट्टियां, डेस्टिनेशन वेडिंग और अनावश्यक विदेश यात्राएं भी विदेशी मुद्रा खर्च करती हैं।

अन्य सुझाव

WFH और ईंधन बचत: कोविड काल की तरह घर से काम करें, वर्चुअल मीटिंग्स बढ़ाएं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, कारपूलिंग या इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करें।

खाद्य तेल कम उपयोग: स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद।

रासायनिक खाद कम, प्राकृतिक खेती बढ़ाएं: किसानों से अपील।

स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा: लोकल खरीदो, ग्लोबल बनो का मंत्र फिर से याद दिलाया।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोई घबराहट का संदेश नहीं, बल्कि “राष्ट्रीय अनुशासन” का संदेश है। “दुनिया में तूफान चल रहे हैं, लेकिन भारत की ताकत 140 करोड़ लोगों के सूक्ष्म प्रयासों में है।”

प्रतिक्रियाएं और प्रभाव

यह अपील सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। कई लोगों ने इसे राष्ट्रहित में स्वागत योग्य बताया, जबकि कुछ ने पारंपरिक रीति-रिवाजों पर असर और अमीर-गरीब के बीच अंतर को लेकर सवाल उठाए। ज्वेलरी उद्योग और शादी-ब्याह से जुड़े कारोबार पर इसका असर पड़ सकता है, लेकिन अर्थशास्त्री इसे चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं।

सरकार पहले भी सोने के आयात को कम करने के लिए प्रयास कर चुकी है, जैसे सोने पर आयात शुल्क बढ़ाना या सोवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसी स्कीम्स। इस बार अपील सीधे जनता से की गई है, जो वैश्विक संकट की गंभीरता को दर्शाती है। पीएम मोदी की यह अपील महज व्यक्तिगत बचत की नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास से राष्ट्र की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने की है। इस संकटकाल में छोटे बदलाव—चाहे घर से काम करना हो, पेट्रोल बचाना हो या सोने की खरीदारी टालना—देश की विदेशी मुद्रा को मजबूत कर सकते हैं। देश इस चुनौती से कैसे निकलता है, यह हर नागरिक के योगदान पर निर्भर करेगा।

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