Noida Workers’ Movement: प्रयागराज/नोएडा। नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार (2 सितंबर 2026) को दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी (25) को बड़ी राहत दी है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत जारी हिरासत आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम के निजी वेतन से पीड़िता को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए आरोपों और सबूतों को अपर्याप्त पाते हुए हिरासत को “बनावटी कहानी” (concocted story) पर आधारित बताया। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि अगर किसी अन्य मामले में गिरफ्तारी आवश्यक न हो तो आकृति चौधरी को तुरंत रिहा किया जाए। विस्तृत आदेश अभी जारी होना बाकी है।
पृष्ठभूमि: अप्रैल का मजदूर प्रदर्शन और गिरफ्तारियां
13 अप्रैल 2026 को नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गया, जिसमें पत्थरबाजी, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुईं। पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज कीं और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया।
आकृति चौधरी, जो दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास की स्नातक हैं और थिएटर आर्टिस्ट तथा मजदूर अधिकारों से जुड़ी कार्यकर्ता बताई जाती हैं, को हिंसा से दो दिन पहले 11 अप्रैल को नोएडा के बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से सादी वर्दी में पुलिस ने हिरासत में लिया था। परिवार और वकीलों का दावा है कि वे उस समय शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन कर रही थीं और एक गीत गाया था। पुलिस ने बाद में उन पर मजदूरों को भड़काने, हिंसा भड़काने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया। 13 मई 2026 को यूपी पुलिस ने आकृति चौधरी और लखनऊ के पूर्व पत्रकार-कार्यकर्ता सत्यम वर्मा पर NSA के प्रावधान लागू कर दिए। पुलिस का आरोप था कि दोनों “मजदूर बिगुल दस्ता” से जुड़े थे और उन्होंने सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों से मजदूरों को उकसाया। आकृति करीब पांच महीने से हिरासत में थीं।
हाईकोर्ट में सुनवाई और टिप्पणियां
आकृति ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। मंगलवार (1 सितंबर) को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से वीडियो फुटेज, व्हाट्सऐप चैट और अन्य सबूत मांगे थे, जिससे साबित हो कि आकृति ने प्रदर्शनकारियों को पत्थरबाजी या वाहनों में आग लगाने के लिए उकसाया। जस्टिस श्रीधरन ने साफ कहा था कि आकृति पहले ही पांच महीने जेल में हैं, इसलिए और समय नहीं दिया जाएगा। बुधवार की सुनवाई में कोर्ट ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया, बीएनएसएस की धाराओं के तहत नोटिस जारी करने के क्रम और जनरल डायरी एंट्री की जांच की। राज्य ने दावा किया कि आकृति को 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया और नोटिस जारी किया गया, लेकिन कोर्ट ने रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। जस्टिस श्रीधरन ने टिप्पणी की कि 11 अप्रैल को कोई हिंसा नहीं हुई थी और जो हिंसा हुई वह उनकी गिरफ्तारी के बाद हुई। कोर्ट ने यह भी पूछा कि आरोपपत्र दाखिल होने के बाद गवाहों के बयानों में आकृति का नाम विशेष रूप से कहां लिया गया है और वीडियोग्राफी में वे उकसाते हुए कहां दिख रही हैं। आकृति की ओर से सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्विस और अधिवक्ता चार्ली प्रकाश ने पक्ष रखा।
मुआवजे का आदेश
NSA हिरासत रद्द करने के साथ ही कोर्ट ने मनमानी कार्रवाई मानते हुए गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम के निजी वेतन से 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। यह आदेश प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह फैसला नोएडा मजदूर आंदोलन से जुड़े मामलों में अदालती दखल का नया अध्याय है। इससे पहले कई आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और कुछ मामलों में प्रक्रिया संबंधी खामियां सामने आई हैं। सत्यम वर्मा का मामला अभी अलग से चल रहा है। आकृति चौधरी की रिहाई और मुआवजे के आदेश से मजदूर अधिकारों तथा निवारक निरोध कानूनों के इस्तेमाल पर फिर से चर्चा छिड़ने की संभावना है। विस्तृत आदेश आने के बाद मामले की और स्पष्टता मिलेगी।

