ग्रेटर नोएडा | उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित हाई पावर कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आज ग्रेटर नोएडा स्थित कार्यालय में औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों सहित नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (NEA) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और क्षेत्र के औद्योगिक विकास व श्रमिक हितों पर चर्चा की।
प्रशासनिक उपस्थिति
बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिकारी उपस्थित रहे:
- आलोक कुमार, अपर मुख्य सचिव (MSME विभाग, उ.प्र.)
- मेधा रूपम, जिलाधिकारी (गौतमबुद्ध नगर)
- भानु चन्द्र गोस्वामी, आयुक्त (मेरठ मण्डल)
- पंकज निर्वाण, उपायुक्त उद्योग
- राकेश द्विवेदी, अपर श्रम आयुक्त
उद्यमियों का पक्ष: “उद्यमी और श्रमिक एक-दूसरे के पूरक”
बैठक के दौरान एनईए (NEA) अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन ने उद्यमियों की भावनाओं को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन द्वारा केवल श्रमिकों के साथ होने की बात कहना उद्यमियों के लिए थोड़ा आहत करने वाला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले 50 वर्षों से नोएडा की प्रगति में उद्यमियों और श्रमिकों का रिश्ता आपसी समन्वय और प्रेम का रहा है।
“नोएडा और गौतमबुद्ध नगर आज जो उत्तर प्रदेश का ‘शो-विंडो’ बने हैं, वह उद्यमियों और श्रमिक भाइयों की संयुक्त मेहनत का परिणाम है। हम एक-दूसरे के पूरक हैं।” – विपिन कुमार मल्हन
सस्ते आवास की पुरानी मांग और वर्तमान स्थिति
श्री मल्हन ने श्रमिकों के लिए सस्ते आवासीय व्यवस्था की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने याद दिलाया कि वर्षों पहले ममूरा के पास ‘श्रमिक कुंज’ बनाया गया था, लेकिन उसके बाद से औद्योगिक सेक्टर तो बढ़ते गए, पर श्रमिकों के लिए कोई नई आवासीय योजना नहीं आई। उन्होंने मांग की कि श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए सरकार को तत्काल सस्ती हाउसिंग स्कीम पर ध्यान देना चाहिए।
इन-हैंड सैलरी बढ़ाने का ‘मास्टर प्लान’
वेतन वृद्धि के मुद्दे पर एनईए ने स्पष्ट किया कि उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित मानकों को लागू करने में कोई आपत्ति नहीं है। इसके साथ ही, उन्होंने एक दूरगामी सुझाव भी दिया:
- PF और ESI योगदान: वर्तमान में श्रमिक के वेतन से लगभग 30% हिस्सा सरकारी खातों (PF/ESI) में जाता है।
- सुझाव: उद्यमियों का योगदान (Employers Contribution) पहले की तरह जारी रहे, लेकिन श्रमिकों के हिस्से की कटौती बंद की जाए।
- लाभ: वह राशि सीधे श्रमिक को दी जाए ताकि उनकी ‘इन-हैंड’ सैलरी बढ़ सके और उन्हें तत्काल आर्थिक राहत मिले।
एनईए अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संगठन कभी भी श्रमिकों के शोषण का समर्थन नहीं करता और उनका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच मधुर संबंध बनाए रखना है। बैठक में एनईए महासचिव वी.के. सेठ और उपाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

