Noida Sector 15 Metro: जुआ-सट्टा और नशे के अड्डों से लोग परेशान; कमिश्नर लक्ष्मी सिंह और विधायकों से गुहार

Noida Sector 15 Metro: नोएडा, जो उत्तर प्रदेश का शो-विंडो माना जाता है और जहां ‘बाबा बुलडोजर’ के अभियान के तहत अपराध नियंत्रण की सख्ती का दावा किया जाता रहा है, वहां एक बार फिर जुआ-सट्टा और नशे संबंधी गतिविधियों की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय निवासियों, पत्रकारों के व्हाट्सऐप ग्रुपों और सोशल मीडिया पर लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ताश के पत्तों पर सट्टे की बिसात कहीं भी, किसी भी समय बिछा दी जाती है। दिनदहाड़े खुले में या होटल-फ्लैटों में ये गतिविधियां चल रही हैं।

खासकर नोएडा सेक्टर-15 मेट्रो स्टेशन के आसपास और आसपास के क्षेत्रों में जुआरियों, सट्टेबाजों और नशे से जुड़े तत्वों की मौजूदगी की शिकायतें पुरानी हैं। 2025 में सोशल मीडिया पर कई पोस्ट आए थे, जिनमें मेट्रो स्टेशन के नीचे या पास खुलेआम जुआ खेलने, धमकी देने और महिलाओं-युवतियों पर अभद्र टिप्पणी करने का जिक्र था। पुलिस चौकी नजदीक होने के बावजूद समस्या कायम रहने का आरोप लगाया गया था। हाल के महीनों में भी सेक्टर-49, होटल, हाईराइज सोसायटियों और अन्य जगहों पर जुआ-सट्टा के अड्डों पर छापेमारी की खबरें आई हैं। जून 2026 में सेक्टर-49 थाना पुलिस ने एक होटल में 20 जुआरियों को गिरफ्तार किया, नकदी, ताश के पत्ते, मोबाइल और वाहन बरामद किए। टी-20 विश्व कप के दौरान हाईराइज फ्लैटों से ऑनलाइन सट्टेबाजी के रैकेट भी पकड़े गए। पोकर क्लबों की आड़ में जुए के आरोपों पर स्टिंग रिपोर्ट भी आईं।

नशे के मोर्चे पर भी पुलिस सक्रिय रही है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में पिछले तीन वर्षों में हजारों किलो मादक पदार्थ बरामद होने का दावा किया गया है। गांजा तस्करी के अंतरराज्यीय गिरोह पकड़े गए, मेट्रो स्टेशनों के पास भी कुछ गिरफ्तारियां हुईं। फिर भी स्थानीय लोग शिकायत करते हैं कि शिकायत करने पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, उल्टे सट्टेबाज या संबंधित तत्व निवासियों को परेशान करने लगते हैं। अखबारों, न्यूज चैनलों और पत्रकार समूहों में ऐसी शिकायतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, जिन्हें यूपी की पहली महिला पुलिस कमिश्नर के रूप में जाना जाता है, कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाने और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए चर्चा में रही हैं। उन्होंने कई मौकों पर निरीक्षक-सिपाहियों को सस्पेंड किया, शिकायत निस्तारण में नोएडा पुलिस को प्रदेश में शीर्ष स्थान का दावा किया गया और नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात कही गई। अप्रैल 2026 में नोएडा में श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा भड़की थी, जिसमें पत्थरबाजी और आगजनी हुई। लक्ष्मी सिंह ने इसे संगठित साजिश बताया और व्हाट्सऐप ग्रुपों के जरिए उकसावे का खुलासा किया। कुछ पुराने मामलों में अदालतों में पुलिस से जुड़े मुद्दे आए, लेकिन मुख्य रूप से प्रशासनिक कार्रवाइयों पर जोर रहा है।

चुनावी माहौल में यह मुद्दा स्थानीय प्रतिनिधियों—नोएडा विधायक पंकज सिंह और दादरी विधायक तेजपाल नागर—के लिए चुनौती बन सकता है। दोनों विधायकों ने विकास कार्यों, सड़क-बिजली-पानी की समस्याओं और जनसंवाद पर जोर दिया है। तेजपाल नागर ने हजारों करोड़ के विकास कार्यों का दावा किया है, लेकिन ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बुनियादी सुविधाओं और अन्य मुद्दों पर विपक्ष और स्थानीय आवाजें उठती रही हैं। पंकज सिंह भी निवासियों की शिकायतें सुनते रहे हैं। अपराध, जुआ और नशे जैसे मुद्दे अगर लगातार सुर्खियों में रहे तो विपक्ष इसे उठा सकता है और मतदाताओं पर इसका असर आने वाला समय ही बताएगा।

पुलिस का कहना है कि खुफिया जानकारी और छापेमारी जारी है, कई गिरोह पकड़े जा चुके हैं और आगे भी कार्रवाई होगी। स्थानीय निवासियों की मांग है कि मेट्रो स्टेशनों, सार्वजनिक स्थानों और आवासीय इलाकों में स्थायी निगरानी और त्वरित कार्रवाई हो, ताकि दिनदहाड़े चल रही इन गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगे। नोएडा जैसे संवेदनशील और तेज विकास वाले शहर में कानून-व्यवस्था की छवि बनाए रखना प्रशासन और चुने हुए प्रतिनिधियों दोनों की जिम्मेदारी है।

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