नई दिल्ली, दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की कवरेज के दौरान स्वतंत्र पत्रकार रोजी (रोज़ी) ने दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न और ग्रोपिंग का गंभीर आरोप लगाया है। रोजी का आरोप है कि 3 अक्टूबर को जब वे एआईएसए अध्यक्ष नेहा बोरा की हिरासत की वीडियो बना रही थीं और महिला पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति पर सवाल पूछा, तो विवेक भगत ने उनकी छाती दबाई, धक्का दिया और उन्हें घेरने का आदेश दिया।
तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। दिल्ली पुलिस ने इन शिकायतों को नई दिल्ली जिले से क्राइम ब्रांच को “निष्पक्ष जांच” के लिए भेज दिया है, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। रोजी और समर्थकों ने संसद मार्ग थाने के बाहर रात भर धरना दिया। 5 अक्टूबर को उन्हें और कई अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया।
रोजी का बयान: हिरासत, चोटें और एमएलसी में देरी
पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर दिए गए बयान में रोजी ने विस्तार से बताया कि हिरासत में लिए गए साथियों को पहले दिल्ली कैंट थाने ले जाया गया। वहां एमएलसी कराने का वादा किया गया, लेकिन थाने के सामने वाले अस्पताल में एमएलसी नहीं होता। डेढ़-दो घंटे बर्बाद करने के बाद उन्हें वापस लाया गया और फिर आरएमएल अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अपराधियों वाली बस में ले जाया गया और “किडनैप” जैसा व्यवहार किया गया। एमएलसी नहीं करवाया गया और उन्हें मंदिर मार्ग थाने भेज दिया गया।
रोजी के अनुसार, चार लड़कियां (जिनमें एक 17 साल की माइनर भी शामिल) हिरासत में थीं। माइनर लड़की सिर्फ देखने आई थी और चिल्ला रही थी कि वह प्रदर्शन का हिस्सा नहीं है। कुंजल (दोस्त) और न्यूज़ डिग्गी के पत्रकार गजेंद्र सिंह तथा अनुज भगत का भी अता-पता नहीं चला। रोजी ने कहा कि योगिता मैम की मदद से रिहाई के बाद ही पता चला कि साथियों की स्थिति अज्ञात है।
उन्होंने शारीरिक चोटों का जिक्र करते हुए बताया कि महिला पुलिसकर्मियों ने बाल खींचे, गालियां दीं, दोनों ब्रेस्ट दबाए और पेट पर मुक्के मारे। टांगों के बीच मारने की कोशिश भी हुई। उन्होंने कहा, “जिस वर्दी पर हम भरोसा करते हैं, अब पुलिस की गाड़ी देखकर सुरक्षा का अहसास नहीं होता।”
महिला पुलिसकर्मियों के आरोप और दबाव
रोजी ने दावा किया कि अंदर शिकायत लिखते समय महिला कांस्टेबल और ऑफिसर खुद कह रहे थे कि उनके साथ भी छुआ-छुआ हुआ है। उन्होंने वर्दी में आवाज उठाने की अपील की, लेकिन जवाब मिला कि “हाथ बंधे हुए हैं”। एक वरिष्ठ अधिकारी (सचिन शर्मा) ने फोन पर “बेटी” कहकर माफी दिलवाने और मामला रफा-दफा करने का सुझाव दिया। रोजी ने ऑन-कैमरा माफी और सजा की मांग की, जिसके बाद उन्होंने कॉल काट दिया।
प्रमोशन विवाद और ताजा विकास
आरोपों के बीच 5 अक्टूबर को विवेक भगत (2018 बैच डैनिक्स अधिकारी) समेत 12 अधिकारियों को एडिशनल डीसीपी का वर्तमान कार्यभार (करंट ड्यूटी चार्ज) दिया गया। यह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया, जिसका प्रस्ताव अगस्त में ही शुरू हो चुका था। आलोचना के बाद विवेक भगत ने स्वयं अनुरोध किया कि जांच पूरी होने तक वे यह चार्ज नहीं लेंगे। दिल्ली सरकार ने आदेश संशोधित कर उन्हें बाहर कर दिया।
दिल्ली पुलिस ने कुछ वायरल सीसीटीवी फुटेज और छवियों को एआई-जनित या फर्जी बताया। एआई से बनाए गए आपत्तिजनक पोस्टर के मामले में एक व्यक्ति गिरफ्तार भी किया गया। पुलिस ने स्वतंत्र पत्रकारों के लिए प्रदर्शन कवरेज संबंधी दिशानिर्देश भी जारी किए हैं, जिसमें दूरी बनाए रखने और आईडी कार्ड लगाने की बात कही गई है।
कानूनी स्थिति और सवाल
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत महिला के आरोप पर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए, लेकिन पुलिस सीसीटीवी जांच का हवाला दे रही है। रोजी ने साफ कहा कि जब तक रजिस्टर्ड एफआईआर नहीं होती और दोषी को सजा नहीं मिलती, वे लड़ती रहेंगी। उन्होंने जोर दिया कि सभी पुलिसकर्मी एक जैसे नहीं होते, लेकिन वर्दी में छिपे “हैवान” को बचाया जा रहा है। यह मामला स्वतंत्र पत्रकारिता, महिला सुरक्षा और पुलिस जवाबदेही के सवालों को फिर से उठाता है। क्राइम ब्रांच जांच जारी है। रोजी और उनके साथियों की पूरी रिहाई तथा एफआईआर की मांग जारी है।

