नोएडा सेक्टर-105, लेबर सेस नोटिस पर आरडब्ल्यूए ने डीएम से मांगी राहत

नोएडा। सेक्टर-105 के निवासियों में उप श्रम आयुक्त कार्यालय से आ रहे ‘लेबर सेस’ (निर्माण उपकर) के नोटिसों को लेकर नाराजगी और चिंता है। आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 ने 16 अक्टूबर 2026 को जिलाधिकारी, गौतम बुद्ध नगर को पत्र भेजकर 10-15 साल पहले बने व्यक्तिगत मकानों पर जारी नोटिस निरस्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इन नोटिसों से सेक्टर के वरिष्ठ नागरिक गहरे मानसिक और आर्थिक तनाव में हैं।

सैटेलाइट सर्वे पर सवाल

आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय के अनुसार सेक्टर के ज्यादातर निवासी सेवानिवृत्त अधिकारी और वरिष्ठ नागरिक हैं। उनका आरोप है कि नोटिस 2017-18 के सैटेलाइट सर्वे के आधार पर बिना मौके की जांच के भेजे जा रहे हैं। निर्माण लागत बढ़ाकर आंकी गई है और उस पर भारी ब्याज व दंड जोड़ा गया है। निवासियों का कहना है कि इतने पुराने मामलों में नोटिस कालबाधित हैं।

भुगतान के बाद भी दोबारा नोटिस

आरडब्ल्यूए के मुताबिक विभागीय रिकॉर्ड अपडेट न होने से भुगतान कर चुके लोगों को भी फिर नोटिस मिल रहे हैं। पत्र में सेक्टर की 80 वर्षीया निवासी श्रीमती लीला राजन (मकान सं. B-15) का उदाहरण दिया गया है। उन्होंने 2019 में भुगतान किया था और जून 2026 में सभी साक्ष्य जमा कराए, फिर भी अगस्त 2026 में उन्हें दोबारा नोटिस भेज दिया गया।

रीसेल खरीदारों पर बोझ

आरडब्ल्यूए का कहना है कि नोएडा प्राधिकरण से वैध लीज डीड और कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (CC) लेकर रीसेल में मकान खरीदने वाले नए परिवारों पर भी वर्षों पुरानी देनदारियां थोपी जा रही हैं।

आरडब्ल्यूए की तीन मांगें

  1. 10-15 साल पुराने व्यक्तिगत निर्माणों पर जारी अव्यावहारिक और कालबाधित नोटिस मानवीय आधार पर निरस्त किए जाएं।
  2. जिन्होंने सेस जमा कर दिया है, उनका रिकॉर्ड प्राथमिकता से अपडेट कर ‘देयता मुक्त प्रमाण पत्र’ दिया जाए।
  3. नोएडा प्राधिकरण से कम्प्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त व्यक्तिगत मकानों को इस प्रक्रिया से पूरी तरह मुक्त रखा जाए।

आरडब्ल्यूए ने स्पष्ट किया है कि यह पत्र आलोचना के लिए नहीं, बल्कि बुजुर्गों की समस्या प्रशासन के सामने रखने की विनम्र पहल है।

क्या है लेबर सेस?

भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 निर्माण लागत पर उपकर लगाने और वसूलने का कानून है, ताकि निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्डों के संसाधन बढ़ाए जा सकें। इस राशि से निर्माण श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सुविधा, वित्तीय सहायता, बीमा और बच्चों की शिक्षा जैसी योजनाएं चलाई जाती हैं। आम तौर पर यह निर्माण लागत का 1 प्रतिशत होता है। कई राज्यों में यह कर नक्शा पास कराते समय या कब्जा प्रमाणपत्र जारी होने पर ही वसूल लिया जाता है, जबकि बाद में अलग से नोटिस भेजने पर विवाद खड़े होते हैं।

अन्य राज्यों में भी ऐसे विवाद

ऐसी शिकायतें केवल नोएडा तक सीमित नहीं हैं। फरवरी 2026 में केरल के कासरगोड़ में 23 साल पुराने मकान पर सेस का नोटिस मिलने का मामला सामने आया था। मकान मालिकों का आरोप था कि पुराने मकानों पर आज की निर्माण लागत के हिसाब से सेस निकाला जा रहा है। वहां शिकायत के बाद एक मामले में आकलन घटाया भी गया।

प्रशासन का पक्ष

इस खबर के लिखे जाने तक जिला प्रशासन या उप श्रम आयुक्त कार्यालय की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं मिली। प्रतिक्रिया मिलते ही खबर अपडेट की जाएगी।

निवासियों के लिए सलाह

जिन निवासियों को नोटिस मिला है, वे पुराने भुगतान की रसीद, कम्प्लीशन सर्टिफिकेट, लीज डीड और नोटिस का जवाब समय रहते संबंधित कार्यालय में जमा कराएं और उसकी प्राप्ति रसीद अपने पास रखें।

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