Noida road conditions: सेक्टर-71 अंडरपास की सड़क उखड़ी, वाहन खा रहे हिचकोले; चार साल पुरानी सड़कें भी जगह-जगह बदहाल

Noida road conditions: नोएडा। पतले लेयर का डामर कई जगहों पर इकट्ठा, बना ब्रेकर जैसी बाधा, सेक्टर-71 अंडरपास से गुजरना इन दिनों वाहन चालकों के लिए जोखिम भरा हो गया है। करीब 780 मीटर लंबे इस अंडरपास की सड़क जगह-जगह से उखड़ गई है। मैस्टिक की परत कई स्थानों पर इकट्ठी होकर ऊबड़-खाबड़ हो गई है और ब्रेकर जैसी बाधा खड़ी कर रही है। इससे तेज रफ्तार दोपहिया और चारपहिया वाहन हवा में उछल रहे हैं। वाहन चालकों का कहना है कि अचानक आने वाले गड्ढों और सड़क के उभार से कई बार वाहन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।

गौतमबुद्ध नगर में सड़कों की हालत जगह-जगह बिगड़ी हुई है। सड़क किनारे बजरी और गिट्टी फैली होने से राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नोएडा के विधायक पंकज सिंह और गौतमबुद्ध नगर के सांसद महेश शर्मा तक इस समस्या की शिकायत नहीं पहुंच पाई है, जबकि प्राधिकरण के सीईओ की जवाबदेही भी तय नहीं हो पा रही। ठेकेदार डामर उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर काम टाल रहे हैं।

निर्माण के 6 महीने बाद ही उखड़ने लगी, पैचवर्क से चल रहा काम

अंडरपास की सड़क की रिसर्फेसिंग करीब डेढ़ साल पहले हुई थी, लेकिन निर्माण के महज छह महीने बाद ही यह उखड़ने लगी। तब से अब तक इसे केवल पैचवर्क के सहारे चलाया जा रहा है। स्थानीय निवासियों की मांग है कि पूरे अंडरपास की सड़क को दोबारा बनाया जाए और संबंधित कॉन्ट्रैक्टर पर कार्रवाई की जाए। आरोप है कि मैस्टिक की दूसरी परत समान स्तर पर और मानकों के अनुरूप नहीं बिछाई गई, जिससे सड़क पर जगह-जगह उभार बन गए और समय के साथ यह परत टूटकर बिखरने लगी।

निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

मैस्टिक या स्टोन मैस्टिक एस्फाल्ट (एसएमए) का इस्तेमाल आमतौर पर अधिक यातायात वाले मार्गों, चौराहों, टर्निंग और अंडरपास में सड़क को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए किया जाता है, ताकि सड़क रैटिंग और टूट-फूट से बची रहे। इसके बावजूद सेक्टर-71 अंडरपास की सड़क रिसर्फेसिंग के महज छह महीने में ही खराब हो गई, जिससे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नोएडा की चमचमाती सड़कों की हालत कई जगह बदहाल है। चार साल भी पूरे नहीं हुए और सड़कें जगह-जगह से उखड़ने लगी हैं। कहीं सड़क के बीच रोड़ी बिखरी है तो कहीं गड्ढों से ईंटें बाहर निकल आई हैं, जिससे वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा बढ़ गया है। सड़क से उड़ती धूल भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।

500 करोड़ की रिसर्फेसिंग, फिर भी कई मार्ग बदहाल

नोएडा प्राधिकरण हर साल सड़कों की रिसर्फेसिंग पर करोड़ों रुपये खर्च करता है। इस साल भी करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों की रिसर्फेसिंग के टेंडर जारी किए गए हैं। कुछ सड़कों पर काम पूरा हो चुका है, जबकि कई प्रमुख मार्ग अब भी बदहाल हैं। सीईओ ने सड़कों की स्थिति की जांच के साथ 28 अक्टूबर तक काम पूरा करने की डेडलाइन तय की है।

चौड़ा मोड़ से एडोब चौराहा: यह नोएडा की प्रमुख सड़कों में शामिल है, जो एमपी-1, एमपी-2 और एमपी-3 को जोड़ती है। रोजाना हजारों वाहन यहां से गुजरते हैं। सड़क के किनारे का हिस्सा पूरी तरह उखड़ चुका है और बीच सड़क से लेकर किनारे तक रोड़ी फैली हुई है। दोपहिया वाहन चालक इस रोड़ी पर फिसलकर हादसे का शिकार हो रहे हैं। एडोब चौराहे से चौड़ा मोड़ तक भी स्थिति अलग नहीं है।

दिल्ली मार्ग: नोएडा को दिल्ली से जोड़ने वाले इस मार्ग पर भी सड़क की हालत खराब है। हरिदर्शन चौकी से करीब 50 कदम की दूरी पर सड़क पर बड़े गड्ढे हैं और कई जगह ईंटें तक बाहर निकल आई हैं। वाहन चालकों के मुताबिक इस हिस्से से गुजरने के दौरान कई वाहन क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, फिर भी अब तक रिसर्फेसिंग नहीं हो सकी।

डीएससी रोड, बोटेनिकल गार्डन: बोटेनिकल गार्डन नोएडा का प्रमुख परिवहन केंद्र है, जहां से शहर के अलग-अलग हिस्सों के अलावा ग्रेटर नोएडा, अलीगढ़, आगरा समेत कई शहरों के लिए बसें चलती हैं। यहां डीएससी रोड का हिस्सा भी टूटा हुआ है, जिससे रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों और वाहनों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

सीईओ बोले— चार साल की टिकाऊ गारंटी वाली सड़कों की जांच जारी

प्राधिकरण में सड़कों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सीईओ कृष्णा करुणेश ने बताया कि जिन सड़कों के चार साल के टेंडर हुए हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। टेंडर की शर्तों के अनुसार सड़क को चार साल तक टिकाऊ रहना चाहिए और तय अवधि के भीतर सड़क खराब होने पर मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होती है। प्राधिकरण यह भी जांच रहा है कि आखिर चार साल पूरे होने से पहले ही सड़कें क्यों उखड़ गईं।

बिटुमिन की कमी से अटका काम

प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमिन की उपलब्धता बड़ी समस्या बनी हुई है। ईरान से सप्लाई प्रभावित है, जबकि रूस से आने वाले बिटुमिन की गुणवत्ता को लेकर भी समस्या बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार इसकी उपलब्धता के लिए 20 से 25 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिस वजह से कई सड़कों के टेंडर होने के बावजूद मौके पर काम शुरू नहीं हो पा रहा। प्राधिकरण के सामने एक तरफ सड़कों को जल्द ठीक करने की चुनौती है तो दूसरी तरफ निर्माण सामग्री की उपलब्धता की समस्या है।

हर साल रिसर्फेसिंग, फिर भी क्यों नहीं टिक रही सड़कें?

नोएडा में सड़कों की रिसर्फेसिंग पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, बावजूद इसके सड़कें कुछ ही वर्षों में खराब हो जाती हैं, जिससे गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। अब सीईओ ने सड़कों की स्थिति की जांच के आदेश दिए हैं, खासतौर पर उन सड़कों की, जो चार साल की तय अवधि पूरी होने से पहले ही टूटने लगी हैं। स्थानीय निवासी अविनाश और विशाल का कहना है कि सिर्फ मुख्य सड़कों की मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा। शहर के साथ-साथ गांवों की सड़कों की भी रिसर्फेसिंग होनी चाहिए। टूटी सड़क, बिखरी रोड़ी और उड़ती धूल के कारण वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वालों को भी परेशानी हो रही है। उनकी मांग है कि सड़कों की मरम्मत के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता की नियमित जांच भी होनी चाहिए, ताकि हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सड़कें दोबारा जल्द न उखड़ें।

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