Noida News: महर्षि आश्रम ट्रस्ट जमीन घोटाले में ED की कार्रवाई, नोएडा समेत कई राज्यों की संपत्तियों पर जांच तेज

नोएडा। महर्षि आश्रम से जुड़े स्पिरिचुअल रीजेनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रस्ट की जमीन के कथित फर्जीवाड़े की जांच अब और तेज हो गई है। इस जमीन पर आज भी अवैध रूप से निर्माण कार्य किया जा रहा है। हजारों की तादात में फ्लैट बन चुके है। वही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में नोएडा के साथ-साथ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में मुख्य आरोपियों की करोड़ों रुपये की संपत्तियों और उनके खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी व जालसाजी के केसों की गहनता से जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही नोएडा में ट्रस्ट की विवादित जमीन की खरीद-फरोख्त पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। हालाकि चोरी छिपे रजिस्ट्रार दफ्तर में रजिस्ट्री हो जाती है अधिकारियों को पता तक नहीं चलता। ये रजिस्ट्री करने के पीछे रजिस्ट्रार दफ्तर के कर्मचारियों की क्या मंशा है ये बताने की जरूरत नही है।

भंगेल और गेझा तिलपताबाद की जमीन पर रोक

सेक्टर-33ए स्थित रजिस्ट्री कार्यालय ने भंगेल के खसरा संख्या 217 तथा गेझा तिलपताबाद के खसरा संख्या 14, 16, 96, 98, 99, 100 और 102-1 की जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है। ट्रस्ट ने 15 जुलाई को रजिस्ट्री विभाग को पत्र लिखकर विवादित भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।

तीन राज्यों में करोड़ों की संपत्तियां जांच के दायरे में

ईडी ने 10 जुलाई को अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि आरोपी प्रदीप सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, जी. रामचंद्र मोहन और आकाश मालवीय की संपत्तियां कर्नाटक के बेंगलुरु (यशवंतपुरा), मध्य प्रदेश के जबलपुर, धार और सुनेरा तथा छत्तीसगढ़ के दुर्ग, बलौदा बाजार और बिलासपुर में स्थित हैं। इन संपत्तियों की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। आरोपियों के खिलाफ वर्ष 2011, 2014 और 2024 में धोखाधड़ी और जालसाजी के कई मामले दर्ज हैं।

ED को सौंपे गए 36 से अधिक रजिस्ट्री दस्तावेज

ईडी की मांग पर नोएडा के रजिस्ट्री विभाग ने वर्ष 1990 से अब तक की 36 से अधिक रजिस्ट्रियों से जुड़े दस्तावेज जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए हैं। ट्रस्ट का आरोप है कि उसके फर्जी पदाधिकारी बनाकर और नकली दस्तावेज तैयार कर गेझा तिलपताबाद और भंगेल की करीब 3.36 हेक्टेयर भूमि अवैध रूप से बेच दी गई। जांच के दौरान जमीन बेचने वाले लोगों की पहचान भी सामने आई है।

दो आरोपी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार

यह मामला दिसंबर 2025 में सामने आया था। ईडी इस मामले में दो आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और नकली पदाधिकारियों के जरिए करीब 33 करोड़ रुपये मूल्य की ट्रस्ट की जमीन 16 करोड़ रुपये में सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को बेच दी गई। इस मामले में सेक्टर-39 थाना पुलिस ने प्रदीप सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, जी. रामचंद्र मोहन और आकाश मालवीय के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। राघवेंद्र प्रताप सिंह को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत मिली थी, जबकि बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ईडी ने मामले की जांच शुरू की। अब जांच एजेंसी आरोपियों की संपत्तियों, धन के स्रोत और जमीन के सौदों की गहन पड़ताल कर रही है।

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