नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह छात्रों के हितों की रक्षा करने और परीक्षा प्रक्रिया से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार ने कहा है कि छात्रों के भविष्य से समझौता करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। इस दौरान छात्रों की चिंताओं और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने रचनात्मक संवाद और सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया है। इसी आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार छात्रों को न्याय दिलाने और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
उधर, संसद के मानसून सत्र के दौरान इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने NEET-UG पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए। पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर केंद्र सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दे रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरने में जुटा है। ऐसे में छात्रों और अभिभावकों की निगाहें अब सरकार की आगामी कार्रवाई और जांच के परिणामों पर टिकी हुई हैं।
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार ने शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनों का सामना ‘कायरता और बेवजह की कठोरता’ से किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने देश के युवाओं को भविष्य के उत्तराधिकारी मानने के बजाय ‘देश के दुश्मन’ की तरह देखा है। द हिंदू में लिखे एक लेख में सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार से छात्रों पर पुलिस कार्रवाई रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि ये हमारे बेटे-बेटियां हैं, हमारे युवा हैं। लेख में 20 जुलाई को संसद तक निकाले गए मार्च का जिक्र करते हुए इसे ‘बदनामी का दिन’ बताया गया।
इसमें आरोप लगाया गया कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसमें कई लोग घायल हुए। इनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे जो अपने घर लौट रहे थे। लेख में सरकार से कार्रवाई रोकने और छात्रों के साथ बातचीत शुरू करने की मांग की गई है।

