नोएडा: शहर में अवैध कियोस्क (Kiosk) का नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है। पहले जहां अतिक्रमण केवल सड़कों और फुटपाथों तक सीमित था, वहीं अब यह हाईराइज सोसायटियों, मॉल और सेक्टरों की कन्वीनिएंस मार्केट तक पहुंच चुका है। आरोप है कि इन अवैध कियोस्क से हर महीने करीब 6 करोड़ रुपये किराए के रूप में वसूले जा रहे हैं, जबकि नोएडा प्राधिकरण को इससे कोई राजस्व नहीं मिल रहा। इस पूरे खेल में प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता होने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं।
सेक्टर-137 की प्रीमियम सोसायटी में दिखी अवैध कियोस्क की कतार
शाम करीब पांच बजे सेक्टर-137 स्थित एक प्रीमियम सोसायटी की कन्वीनिएंस मार्केट का जायजा लेने पर कई अस्थायी टिन शेड एक के बाद एक बने दिखाई दिए। इन कियोस्क में कहीं चाय-पकौड़ी तो कहीं फास्ट फूड और अन्य खाद्य सामग्री का कारोबार चलता मिला। देर शाम तक यहां ग्राहकों की अच्छी-खासी भीड़ भी देखी गई। स्थानीय लोगों का दावा है कि इन कियोस्क का संचालन प्रबंधन और कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में हो रहा है। एक कियोस्क के लिए 18 हजार से 22 हजार रुपये प्रतिमाह तक किराया वसूले जाने की बात सामने आई है।
हर महीने करोड़ों की कथित वसूली, प्राधिकरण को नहीं मिल रहा राजस्व
जानकारी के अनुसार, नोएडा में अवैध रूप से संचालित कियोस्क की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इन्हीं कियोस्क से हर महीने लगभग 6 करोड़ रुपये की कथित वसूली होने का दावा किया जा रहा है। इसके साथ ही एक और गंभीर मुद्दा यह भी सामने आया है कि जिन लोगों को पहले वैध रूप से कियोस्क आवंटित किए गए थे, उनमें से कई आवंटी भी नोएडा प्राधिकरण को निर्धारित शुल्क या किराया जमा नहीं कर रहे हैं। इससे प्राधिकरण को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
Noida Illegal Kiosk
अतिक्रमण से बिगड़ रही व्यवस्था
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना अनुमति बनाए गए कियोस्क न केवल शहरी नियोजन के नियमों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि पार्किंग, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। कई स्थानों पर अस्थायी ढांचों के कारण आम लोगों के आने-जाने में भी दिक्कत होती है।
कार्रवाई की मांग तेज
स्थानीय लोगों और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों का कहना है कि नोएडा प्राधिकरण को शहरभर में अवैध कियोस्क का सर्वे कराकर उनके खिलाफ अभियान चलाना चाहिए। साथ ही जिन वैध आवंटियों पर बकाया है, उनसे भी तत्काल वसूली की जाए ताकि प्राधिकरण के राजस्व की हानि रोकी जा सके। यदि अवैध कब्जों और कथित किराया वसूली पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो शहर में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

