Omar Abdullah vs Payal Abdullah: नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला और उनकी 17 साल से अलग रह रहीं पत्नी पायल अब्दुल्ला का लंबा चला कानूनी विवाद आखिरकार शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुलझ गया। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शादी भंग करने की अर्जी अदालत में दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस आराधे की बेंच ने सुनाया फैसला
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच के सामने उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता के जरिए समझौता हो चुका है और 22 जुलाई को अनुच्छेद 142 के तहत तलाक की अर्जी दाखिल की जा चुकी है। सिब्बल ने बताया कि दोनों पक्षों ने मध्यस्थता के जरिए समझौता कर लिया है और शादी को आपसी सहमति से भंग करने के लिए अर्जी दाखिल की है। कोर्ट ने इस जानकारी को अपने आदेश का हिस्सा बनाते हुए मामले का निपटारा कर दिया।
1994 में हुई थी शादी, 2009 से अलग रह रहे थे दोनों
उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला की शादी 1 सितंबर 1994 को हुई थी, और दोनों 2009 से अलग-अलग रह रहे हैं। उनके दो बेटे भी हैं। लंबे समय से चल रहे इस पारिवारिक विवाद ने कई कानूनी पड़ावों को पार किया।
फैमिली कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
उमर अब्दुल्ला ने शुरुआत में क्रूरता और परित्याग के आधार पर फैमिली कोर्ट में तलाक की मांग की थी, लेकिन 30 अगस्त 2016 को फैमिली कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, यह कहते हुए कि वे यह साबित नहीं कर पाए कि शादी अपूरणीय रूप से टूट चुकी है। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन दिसंबर 2023 में जस्टिस संजीव सचदेवा और विकास महाजन की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए उमर अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले में अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता केंद्र के पास भेज दिया था और दोनों पक्षों के वकीलों की संयुक्त अपील पर मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद जनवरी 2026 में भी मध्यस्थता प्रक्रिया के मद्देनजर सुनवाई टाली गई थी।
“दोनों ने आजादी को गले लगाया” — कपिल सिब्बल
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि दोनों पक्षों के बीच सभी विवाद सुलझ चुके हैं और एक-दूसरे के खिलाफ दाखिल सभी मामलों को वापस लेने पर सहमति बन चुकी है। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि अदालत इस जानकारी को अपने आदेश में शामिल करेगी और इसी आधार पर मामले का निपटारा करेगी।
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