From blue to saffron: हॉकी इंडिया ने ब्लू जर्सी बदली, खिलाड़ियों ने कहा- हमसे कोई सलाह नहीं ली; पूर्व कप्तान बोले- शर्मनाक फैसला

From blue to saffron: नई दिल्ली। हॉकी इंडिया ने पुरुष और महिला राष्ट्रीय टीम की पारंपरिक नीली जर्सी को केसरिया (सैफ्रन) रंग में बदल दिया है। लेकिन खिलाड़ियों का दावा है कि इस फैसले से पहले उनसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया। यह दावा हॉकी इंडिया के आधिकारिक बयान के बिल्कुल उलट है, जिसमें संघ ने कहा था कि खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ से विस्तृत चर्चा के बाद यह बदलाव किया गया।

सूत्रों ने पुरुष और महिला टीम के पांच खिलाड़ियों से बात की। सभी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि वे इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थे। एक खिलाड़ी ने साफ कहा, “मुझसे न तो पूछा गया और न ही सलाह ली गई। यह बात सही नहीं है।” खिलाड़ियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे पूरे समूह की तरफ से नहीं बोल रहे। हॉकी इंडिया के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और कार्यकारी समिति के सदस्यों को भी इस फैसले की जानकारी नहीं थी। एक कार्यकारी समिति सदस्य ने बताया, “मुझे जर्सी के रंग बदलाव की न तो जानकारी थी और न ही मैं किसी आधिकारिक बैठक का हिस्सा था जहां इस पर चर्चा हुई हो।”

हॉकी इंडिया का तर्क है कि नीली जर्सी नीले सिंथेटिक मैदान में घुलमिल जाती थी, जिससे खिलाड़ियों की स्पष्टता प्रभावित होती थी। कोच और खिलाड़ियों ने पीला और केसरिया रंग सुझाए, जिसके बाद केसरिया चुना गया। संघ ने केसरिया रंग को राष्ट्रीय ध्वज का प्रतीक बताते हुए साहस, बलिदान और राष्ट्रीय गौरव से जोड़ा। संघ ने याद दिलाया कि 2014 विश्व कप में पीली और 2018 में स्काई ब्लू जर्सी भी पहनी जा चुकी है। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने नए जर्सी को अच्छा बताया। उन्होंने कहा, “हमने ऑरेंज जर्सी में ट्रेनिंग मैच खेला। मुझे नया जर्सी अच्छा लग रहा है।”

पूर्व भारतीय कप्तान वीरेन रस्किन्हा ने इस बदलाव की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “@TheHockeyIndia ने भारतीय हॉकी के लिए कई अच्छे काम किए हैं। लेकिन यह शर्मनाक है। भारतीय टीम की विरासत और पहचान हमेशा ब्लू रही है। मैंने कई साल ब्लू जर्सी गर्व से पहनी। फैन्स टीम को ब्लू में देखना चाहते हैं। ऑरेंज का क्या लॉजिक है?” रस्किन्हा 2001 जूनियर विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे हैं और उन्होंने 2004 एथेंस ओलंपिक सहित कई बड़े टूर्नामेंट खेले। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय टीम की जर्सी सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि पहचान और विरासत का प्रतीक होती है। नीला रंग दशकों से भारतीय हॉकी से जुड़ा रहा है। हालांकि हॉकी इंडिया तकनीकी कारण और राष्ट्रीय प्रतीक का हवाला दे रही है, लेकिन खिलाड़ियों और पूर्व खिलाड़ियों के बयान से इस प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

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