नोएडा, हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में बसी बस्तियों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। लंबे समय से बिजली की वैध व्यवस्था न होने और हालिया अवैध कनेक्शन कटौती के बाद अंधेरे में डूबे इन परिवारों को अब नियमानुसार अस्थायी और मीटरयुक्त बिजली कनेक्शन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। नोएडा विधायक पंकज सिंह की लगातार पैरवी और लोगों की समस्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखने के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि डूब क्षेत्र की बस्तियों में वैध अस्थायी कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएं।
यह फैसला उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जो वर्षों से अव्यवस्थित, महंगी और कथित अवैध व्यवस्था पर निर्भर रहने को मजबूर थे। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब उम्मीद जगी है कि बिजली संकट का स्थायी समाधान निकालने की प्रक्रिया तेज होगी।
अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई के बाद गहराया संकट
हिंडन डूब क्षेत्र (छिजारसी, चोटपुर, पर्थला, सादुलपुर, सोरखा, गढ़ी चौखंडी आदि) में पिछले दिनों बिजली विभाग ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया था। मुख्यमंत्री की नाराजगी और स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की रिपोर्ट के बाद हुई इस कार्रवाई में 3,000 से अधिक (कुछ रिपोर्टों में 3,500+) अवैध कनेक्शन काटे गए और 40 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गईं। निजी ट्रांसफॉर्मर, अवैध तार और सिंडिकेट नेटवर्क भी जब्त किए गए।
कार्रवाई के बाद छिजारसी और चोटपुर जैसी बस्तियों में कई दिनों तक बिजली और पानी की भारी समस्या हो गई। गर्मी के मौसम में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं समेत हजारों लोग परेशान हुए। लोगों का कहना था कि वैध कनेक्शन उपलब्ध न होने के कारण उन्हें मजबूरी में वैकल्पिक और कथित अवैध माध्यमों पर निर्भर रहना पड़ता था।
मोमबत्ती मार्च से विधायक कार्यालय तक पहुंचा दर्द
बिजली संकट से परेशान निवासियों ने मोमबत्ती मार्च निकाला और नोएडा विधायक पंकज सिंह के कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने 24 घंटे वैध बिजली और पक्के मीटर की मांग की। विधायक ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मामले को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने उठाया। मानवीय आधार पर प्रभावित परिवारों को बिजली उपलब्ध कराने की मांग की गई। शासन स्तर पर इसे गंभीरता से लिया गया।
सीएम योगी के निर्देश: मीटरयुक्त अस्थायी कनेक्शन
लखनऊ में उच्च स्तरीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हिंडन डूब क्षेत्र की बस्तियों में रहने वाले लोगों को नियमानुसार वैध और अस्थायी मीटरयुक्त (प्रीपेड/आर्मर्ड केबल सहित) बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को बिजली चोरी के रास्ते पर जाने से रोकना और अधिकृत माध्यम से बिजली उपलब्ध कराना है। अस्थायी कनेक्शन होने के बावजूद खपत मीटर के माध्यम से दर्ज होगी और उपभोक्ता नियमानुसार बिल का भुगतान करेंगे। इससे लोगों को सुविधा मिलेगी और विभाग को वास्तविक खपत के अनुसार राजस्व भी प्राप्त होगा।
सरकार को राजस्व, जनता को राहत; अवैध वसूली पर अंकुश
अस्थायी कनेक्शन से मिलने वाला पूरा राजस्व सीधे बिजली विभाग/बोर्ड के खाते में जाएगा। इससे प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और उपभोक्ता-विभाग के बीच सीधा संबंध स्थापित होगा।
अब तक अनधिकृत व्यवस्था के कारण कई शिकायतें आती रहीं। कुछ निजी सिंडिकेट और दलालों पर बस्तियों के लोगों से कथित तौर पर ₹11 से ₹12 प्रति यूनिट तक अवैध वसूली के आरोप लगे थे (जबकि सरकारी दर इससे काफी कम है)। वैध मीटर कनेक्शन मिलने से बिचौलियों की भूमिका कम होने और ऐसी मनमानी वसूली पर अंकुश लगने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि बिजली चोरी या अवैध वसूली में संलिप्त किसी अधिकारी या बाहरी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वर्षों का अंधेरा खत्म हो सकता है
हिंडन डूब क्षेत्र में बिजली सिर्फ रोशनी नहीं, बल्कि पानी की मोटर, बच्चों की पढ़ाई और गर्मी से राहत जैसी मूलभूत जरूरत है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद स्थानीय लोगों में राहत और उम्मीद का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनधिकृत कनेक्शन काटने के साथ वैध वैकल्पिक व्यवस्था देने से बिजली चोरी की समस्या जड़ से कम हो सकती है।
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में अस्थायी कनेक्शन की प्रक्रिया, पात्रता, दस्तावेज, शुल्क और अवधि संबंधी नियम तय किए जाएंगे। इसके बाद पात्र परिवारों को कनेक्शन दिए जाने की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। लोगों की मांग है कि प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और बिचौलियों से मुक्त हो।
विधायक की पैरवी से मिली उम्मीद, अब अमल का इंतजार
इस पूरे मामले में विधायक पंकज सिंह की पैरवी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय स्तर से शासन तक पहुंचे मुद्दे पर सीएम के निर्देश से वैध अस्थायी कनेक्शन का रास्ता खुला है। अब निवासियों की नजर बिजली विभाग की अगली कार्रवाई पर है। आदेश के बाद असली परीक्षा जमीन पर लागू होने की है।
हिंडन डूब क्षेत्र के इस विवाद ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि अनधिकृत बस्तियों में रहने वाले लोगों की मूलभूत जरूरतों को कानूनी और प्रशासनिक दायरे में कैसे पूरा किया जाए। फिलहाल मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि लोगों को अवैध व्यवस्था, मनमानी वसूली और अंधेरे के बीच नहीं रहना पड़ेगा।
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