लखनऊ/नोएडा। नोएडा के सेक्टर-62 स्थित डेटा-सेंटर पार्क में अडानी समूह की कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) में शुक्रवार को जनसुनवाई हुई। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आवेदक कंपनी की वित्तीय क्षमता, वास्तविक पूंजी, तकनीकी व्यवहार्यता और वैधानिक पात्रता की पूरी जांच किए बिना लाइसेंस देने का विरोध किया है। अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस स्टेप इलेवन लिमिटेड (AESSEL) ने डेटा-सेंटर पार्क के भीतर बिजली की आपूर्ति और वितरण के लिए समानांतर वितरण लाइसेंस मांगा है। यह क्षेत्र अभी पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) की आपूर्ति-सीमा में आता है।
आपत्ति: पूंजी का स्रोत बताए कंपनी
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के समक्ष कहा कि कंपनी ने 211.10 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश और 63.33 करोड़ रुपये की इक्विटी का ब्योरा दिया है, लेकिन इसके लिए वास्तविक पूंजी कहां से आएगी, यह स्पष्ट नहीं है। परिषद ने शेष राशि जुटाने के ठोस वित्तीय स्रोत भी मांगे हैं। परिषद का तर्क है कि बिजली वितरण लाइसेंस केवल बड़े औद्योगिक समूह के नाम या निवेश के दावे के आधार पर नहीं दिया जा सकता। आवेदक कंपनी को स्वयं वित्तीय, तकनीकी और कानूनी शर्तें पूरी करनी होंगी।
तकनीकी योजना पर भी सवाल
उपभोक्ता परिषद ने विस्तृत बिजनेस प्लान और नेटवर्क विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विवरण बाद में देने की बात पर भी आपत्ति जताई। परिषद ने कहा कि जब वित्तीय और तकनीकी योजना के अहम पहलुओं की पूरी जांच नहीं हुई है, तो लाइसेंस देने का अंतिम निर्णय कैसे लिया जा सकता है। आपत्ति में 30 जून 2022 के शासनादेश, 10 मार्च 2023 की सरकारी अधिसूचना तथा आवेदक कंपनी की स्वतंत्र कानूनी पात्रता की जांच की भी मांग की गई है। परिषद चाहती है कि आम उपभोक्ताओं पर संभावित आर्थिक असर भी परखा जाए।
अडानी पक्ष ने मांगा एक सप्ताह
अडानी समूह की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ध अधिवक्ता संजय सेन ने आयोग से कंपनी को लाइसेंस देने की सिफारिश की। उन्होंने उपभोक्ता परिषद की आपत्तियों और सवालों का जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया। अब कंपनी का जवाब मिलने के बाद UPERC आगे की कार्रवाई और लाइसेंस पर निर्णय लेगा। यह आवेदन अभी जनता के सुझाव-आपत्तियों के चरण में जांचा जा रहा है; लाइसेंस अभी दिया नहीं गया है।
क्या है प्रस्ताव?
| पहलू | विवरण |
| आवेदक कंपनी | अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस स्टेप इलेवन लिमिटेड (AESSEL)
| प्रस्तावित क्षेत्र | नोएडा सेक्टर-62, प्लॉट नंबर 20 स्थित डेटा-सेंटर पार्क
| मांगा गया लाइसेंस | डेटा-सेंटर पार्क के भीतर बिजली की आपूर्ति और वितरण हेतु समानांतर वितरण लाइसेंस
| प्रस्तावित निवेश | 211.10 करोड़ रुपये |
| विवादित इक्विटी | 63.33 करोड़ रुपये |
| मौजूदा आपूर्तिकर्ता | पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL)
| अगला चरण | अडानी पक्ष का जवाब, उसके बाद UPERC का निर्णय
विरोध का बड़ा मुद्दा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और उपभोक्ता परिषद का कहना है कि निजी कंपनी को समानांतर वितरण लाइसेंस देने से राज्य की वितरण कंपनी PVVNL कमजोर हो सकती है और निजी हस्तक्षेप बढ़ सकता है। उनका तर्क है कि मौजूदा वितरण नेटवर्क से आपूर्ति संभव होने पर अलग लाइसेंस की आवश्यकता भी परखी जानी चाहिए। यह मामला UPERC की याचिका संख्या 2333/2025 के तहत चल रहा है। आयोग ने अगस्त में सार्वजनिक सूचना जारी कर 30 दिन में आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए थे; इसके बाद शुक्रवार को जनसुनवाई हुई।
यह भी पढ़ें: ऑडी ने भारत में लॉन्च की नई Q3, कीमत 51.99 लाख रुपये से शुरू

