नोएडा। नोएडा प्राधिकरण द्वारा जारी किए जाने वाले धारा-10 के नोटिस को लेकर शहर के विभिन्न सेक्टरों के आवंटियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई लोगों का आरोप है कि यह नोटिस, जिसका उद्देश्य प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन रोकना है, अब लोगों के बीच डर और असमंजस का कारण बनता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, प्राधिकरण उन आवंटियों को धारा-10 का नोटिस जारी करता है जिन्होंने फ्लैट या आवंटित संपत्ति में नियमों के विपरीत अतिरिक्त निर्माण किया हो या आवासीय इकाइयों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हों। हालांकि, कुछ आवंटियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और नोटिस जारी होने के बाद कुछ मामलों में कथित तौर पर अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आती हैं।
आवंटियों का कहना है कि अतिरिक्त निर्माण हटाने पर उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में कई लोग कार्रवाई के डर से समझौता करने को मजबूर हो जाते हैं। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में बिना निर्माण हटाए ही नोटिस समाप्त कर दिए जाते हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सेक्टर-34 स्थित धवलगिरी अपार्टमेंट, सेक्टर-12/22 के आवासीय परिसर तथा सेक्टर-71 के जनता, एलआईजी और एमआईजी फ्लैटों सहित कई इलाकों में बड़ी संख्या में आवंटियों को धारा-10 के नोटिस जारी किए गए हैं। इससे प्रभावित लोग चाहते हैं कि प्राधिकरण स्पष्ट और समान नीति अपनाए तथा प्रत्येक मामले में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करे।
आवंटियों का कहना है कि यदि किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और भेदभावरहित होनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि यदि भ्रष्टाचार या अवैध वसूली की शिकायतें हैं तो उनकी स्वतंत्र जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्राधिकरण का पक्ष:
इस संबंध में नोएडा प्राधिकरण की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि प्राधिकरण अपना पक्ष जारी करता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए, ताकि मामले का संतुलित पक्ष पाठकों के सामने रखा जा सके।

