मेट्रो विश्वविद्यालय के लिए नया अध्यादेश: यूपी सरकार ने उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश 2026 को दी मंजूरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रेटर नोएडा (ग्रेनो) में मेट्रो विश्वविद्यालय की स्थापना के रास्ते को साफ करने और राज्य में निजी विश्वविद्यालयों के विधिक ढांचे को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश 2026 के प्रख्यापन (promulgation) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस निर्णय से न केवल मेट्रो विश्वविद्यालय की स्थापना की बाधाएं दूर होंगी, बल्कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के निजी निवेश को भी अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रित और सुगम बनाया जा सकेगा।

विधेयक पास न होने के चलते सरकार ने दोबारा लिया फैसला

उच्च शिक्षा मंत्री ने इस संबंध में कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इससे पहले भी मेट्रो विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा की स्थापना के लिए ‘संशोधन अध्यादेश 2026’ लागू किया गया था। नियमों के मुताबिक, अध्यादेश को छह महीने के भीतर विधानमंडल के सत्र में विधेयक के रूप में पारित कराना होता है।

“पूर्व में लाया गया संशोधन अध्यादेश विधानमंडल के पिछले सत्र में अपरिहार्य कारणों से पारित नहीं हो सका था। अध्यादेश की समय-सीमा समाप्त होने और विश्वविद्यालय की स्थापना की प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए अब सरकार ने ‘द्वितीय संशोधन अध्यादेश 2026’ लाने का निर्णय लिया है।” – उच्च शिक्षा मंत्री

निजी विश्वविद्यालयों का विधिक ढांचा होगा और मजबूत

सरकार के इस फैसले का उद्देश्य केवल एक विश्वविद्यालय की स्थापना तक सीमित नहीं है। इस अध्यादेश के माध्यम से उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम के कानूनी ढांचे को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाया जा रहा है।

इस संशोधन के लागू होने से राज्य में निजी विश्वविद्यालयों को मिलने वाली मंजूरियों, उनके संचालन और शैक्षणिक मानकों की निगरानी की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे छात्रों को बेहतर वैश्विक स्तर की शिक्षा मिल सके।

मुख्य बिंदु: अध्यादेश की आवश्यकता क्यों पड़ी?

  • समयबद्धता: विधानमंडल के दूसरे सत्र में विधेयक पारित न होने के कारण कानूनी शून्यता से बचने के लिए।
  • शैक्षणिक विकास: ग्रेटर नोएडा जैसे बड़े औद्योगिक और एजुकेशनल हब में मेट्रो विश्वविद्यालय की स्थापना को गति देना।
  • नीतिगत सुधार: निजी विवि से जुड़े नियमों को आज की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक लचीला और जवाबदेह बनाना।

कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस अध्यादेश को राज्यपाल की सहमति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह पूरे राज्य में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा। ग्रेटर नोएडा में इस नए विश्वविद्यालय के आने से रोजगार और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे।

 

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