ममता की पार्टी में भूचाल, INDIA गठबंधन में दरारें और विपक्ष की एकजुटता का दावा
देश की राजनीति में सोमवार का दिन कई मायनों में बेहद उथल-पुथल भरा रहा। एक तरफ जहाँ विपक्षी INDIA गठबंधन ने नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अपनी रणनीतिक बैठक में एकजुटता का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी तरफ INDIA ब्लॉक की अहम सदस्य तृणमूल कांग्रेस (TMC) में ऐसा भूचाल आया जिसने पूरी राष्ट्रीय राजनीति को हिला कर रख दिया।
TMC में महाविद्रोह: 20 सांसद दिल्ली रवाना, स्पीकर ओम बिड़ला को लिखा अलग गुट का पत्र
तृणमूल कांग्रेस में जारी आंतरिक संकट अब एक बड़े विस्फोट का रूप ले चुका है। पार्टी के करीब 20 बागी सांसद राष्ट्रीय राजधानी पहुँच रहे हैं और अपने अगले कदमों की रणनीति तय करने के लिए अहम बैठकें कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर को एक औपचारिक पत्र सौंपने की तैयारी की है, जिसमें ममता बनर्जी के नियंत्रण से बाहर एक अलग संसदीय समूह को मान्यता देने की माँग की गई है। दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए लोकसभा में कम से कम 19 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। बागी गुट का दावा है कि उनके पास दोनों सदनों के मिलाकर 20 सांसद हैं और यह संख्या बढ़कर 30 तक पहुँच सकती है। इसी बीच, TMC के वरिष्ठ नेता सुखेन्दु शेखर रॉय ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर पार्टी भी छोड़ दी। रॉय का यह कदम बागी खेमे को बड़ी मजबूती देता है, और इसकी टाइमिंग भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि ममता बनर्जी स्वयं उस समय दिल्ली में थीं। TMC में बेचैनी के संकेत महीनों पहले से दिख रहे थे। कई वरिष्ठ नेताओं ने चुनावी हार के बाद पार्टी के आंतरिक कामकाज, संगठनात्मक ढाँचे और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इनमें चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार का नाम भी प्रमुख रहा, जिन्होंने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देकर खुलकर असंतोष जताया था। विधानसभा स्तर पर भी TMC की स्थिति कमजोर हुई है। रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी विधायकों के गुट ने 59 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा किया है और विधानसभा अध्यक्ष को भी पत्र सौंपा है।
INDIA गठबंधन की बैठक: 23 दल एकजुट, खड़गे ने गिनाए मुद्दे
इन सबके बीच कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में INDIA ब्लॉक की बैठक हो रही थी जिसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी भी शामिल हुए। 23 राजनीतिक दलों ने इस बैठक में हिस्सा लिया, जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी नेताओं से एकता मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 25 दलों ने बैठक में भागीदारी की, पाँच अहम मुद्दों पर सहमति बनी और यह तय हुआ कि हर दो महीने में बैठक होगी। अगली बैठक 8 अगस्त को प्रस्तावित है। खड़गे ने कहा कि विपक्षी दलों ने 17 अप्रैल को एकजुट होकर मोदी सरकार के परिसीमन से जुड़े विधेयक को लोकसभा में परास्त करके अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था। उन्होंने निर्वाचन नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर भी हमला बोला और कहा कि इससे लाखों लोगों का मताधिकार प्रभावित हो रहा है। खड़गे ने महँगाई, बेरोजगारी, परीक्षा घोटाले, MSME संकट, जाँच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग और सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे, राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी के अलावा ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती समेत कई विपक्षी नेता उपस्थित रहे। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे वर्चुअली जुड़े। हालाँकि DMK और AAP इस बार बैठक से दूर रहे।
विश्लेषण: INDIA ब्लॉक के लिए दोहरी चुनौती
यह स्थिति विपक्षी एकता के लिहाज़ से अत्यंत जटिल है। एक तरफ INDIA गठबंधन अपनी बैठकों में एकता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है, वहीं उसके एक प्रमुख घटक दल TMC में ही इतना बड़ा विद्रोह सामने आ गया है कि लोकसभा में अलग गुट बनाने तक की नौबत आ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी के लिए यह दोतरफा संकट है, एक तरफ विधानसभा स्तर पर बागी विधायक, दूसरी तरफ संसद में बागी सांसद। पार्टी का दिल्ली में INDIA ब्लॉक की बैठक में शामिल होना और उसी समय घर में इतना बड़ा विद्रोह फूट पड़ना, ममता के लिए राजनीतिक रूप से काफी असहज स्थिति है। अब सबकी नज़र इस पर है कि बागी TMC सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से मुलाकात करते हैं या नहीं, और क्या वे अलग संसदीय दल बनाने में कानूनी रूप से सफल होते हैं।

