Rum Ban India: डायजियो पहुंची कोर्ट, रम पर प्रतिबंध को बताया असंवैधानिक

Rum Ban India: नई दिल्ली। शराब क्षेत्र की दिग्गज ब्रिटिश कंपनी डायजियो (Diageo) की भारतीय इकाई यूनाइटेड स्पिरिट्स ने भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक द्वारा अपने लोकप्रिय ब्रांड “मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर्ड XXX रम” पर लगाए गए प्रतिबंध को अदालत में चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि यह प्रतिबंध बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए, जल्दबाज़ी में लगाया गया।

क्या है पूरा मामला?

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 29 जून 2026 को FSSA अधिनियम, 2006 के तहत एक आदेश जारी कर कई शराब ब्रांडों की बिक्री पर रोक लगाई थी, जिनमें यूनाइटेड स्पिरिट्स के रॉयल चैलेंज व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम भी शामिल हैं। इसके अलावा ओल्ड मॉन्क रम और बैगपाइपर व्हिस्की के कुछ संस्करणों पर भी रोक लगाई गई थी। नियामक ने अमानक प्रयोगशाला रिपोर्टों का हवाला देते हुए अनधिकृत फ्लेवर के इस्तेमाल और भ्रामक “एजिंग” (परिपक्वता) दावों का आरोप लगाया।

यह पिछले कई वर्षों की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा कार्रवाई मानी जा रही है, जिसमें नियामक ने 40 अरब डॉलर के इस उद्योग को झटका देते हुए डायजियो और भारत की इनब्रू कंपनी के कई व्हिस्की और रम ब्रांडों को कुछ राज्यों में बैन कर दिया, और मिसब्रांडिंग व अनुचित तरीके से आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाने का आरोप लगाया।

डायजियो की दलील

यूनाइटेड स्पिरिट्स ने अदालत में तर्क दिया कि जिस खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने यह प्रतिबंध आदेश जारी किया, उसे कानूनन ऐसा करने का अधिकार ही नहीं था, और उसने अनिवार्य न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया।

कंपनी की सबसे बड़ी दलील यह है कि FSSAI ने प्रतिबंध आदेश के कुछ ही दिनों बाद फ्लेवर लेबलिंग से जुड़े नियामक पहलुओं पर उद्योग जगत के साथ परामर्श शुरू कर दिया। 1 अगस्त को अदालत में दाखिल अपनी याचिका में डायजियो ने कहा कि जब मामला खुद FSSAI के सक्रिय विचाराधीन है, ऐसे में प्रतिबंध आदेश का जारी रहना समयपूर्व, अनुपातहीन और व्यावसायिक रूप से हानिकारक है।

विवाद की जड़ लेबल पर दर्ज जानकारी है। मैकडॉवेल्स की बोतल पर लिखा था कि उसमें आर्टिफिशियल फ्लेवर (रम) मिलाया गया है, जबकि FSSAI का तर्क है कि रम का फ्लेवर प्राकृतिक अवयवों, किण्वन प्रक्रिया और मैच्योरेशन तकनीकों पर आधारित होना चाहिए, न कि कृत्रिम रूप से जोड़ा गया।

सरकार का पक्ष

दूसरी ओर, एक सरकारी सूत्र ने डायजियो के रुख से असहमति जताते हुए रॉयटर्स को बताया कि FSSAI शराब कंपनियों के ही अनुरोध पर उद्योग जगत के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर रहा था, न कि इसलिए कि उसे नियमों में कोई कमी नज़र आई हो।

अदालत में क्या हुआ?

बॉम्बे हाईकोर्ट में सोमवार को इस याचिका पर संक्षिप्त सुनवाई हुई, लेकिन जज ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया और केंद्र सरकार को 19 अगस्त तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामला और गहराया – प्लास्टिक पैकेजिंग पर भी सवाल

इस बीच विवाद का दायरा और बढ़ गया है। बीते सप्ताह भारतीय निरीक्षकों ने कथित तौर पर सुरक्षित रीसाइकल्ड प्लास्टिक से बनी होने का उल्लेख न होने के आरोप में डायजियो की करीब 18,000 पेटी शराब की बोतलें ज़ब्त कीं, जिससे नियामकीय जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।

पृष्ठभूमि: महाराष्ट्र में पहले से जारी है टकराव

गौरतलब है कि डायजियो और नियामकों के बीच महाराष्ट्र में यह पहला टकराव नहीं है। इससे पहले डायजियो और पर्नोड रिकार्ड के भारतीय लॉबिंग समूह ने महाराष्ट्र सरकार पर उनके किफायती ब्रांडों पर भारी कर वृद्धि और स्थानीय कंपनियों के लिए बनाई गई कम टैक्स श्रेणी से विदेशी कंपनियों को बाहर रखने के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। फिलहाल सबकी निगाहें 19 अगस्त पर टिकी हैं, जब केंद्र सरकार को बॉम्बे हाईकोर्ट में अपना जवाब पेश करना है। इस मामले का नतीजा न सिर्फ डायजियो बल्कि भारत के पूरे शराब उद्योग में फ्लेवर लेबलिंग के भविष्य के नियमों को प्रभावित कर सकता है।

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