NEET-UG 2026: पेपर लीक के बाद दोबारा परीक्षा से पहले लाखों छात्र गहरे मानसिक तनाव में, टेलीग्राम पर लगा अस्थायी प्रतिबंध

देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में शुमार NEET-UG को एक बार पास करना ही मुश्किल हो, तो उसे दोबारा देना किसी छात्र के लिए कैसा अनुभव होगा? यही सवाल इस वक्त 22 लाख से अधिक मेडिकल अभ्यर्थियों के सामने है, जो रविवार, 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा से पहले गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं और इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीनगर की 20 वर्षीय छात्रा आलिया जलाल ने बताया कि वह अपने पहले प्रयास से बेहद संतुष्ट थीं, लेकिन दोबारा परीक्षा देने की नौबत ने उन्हें इतना चिंतित कर दिया कि उन्हें मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेनी पड़ी। इसी तरह आलिमा जावेद नाम की एक अन्य छात्रा ने कहा कि यह परीक्षा छात्रों को मानसिक रूप से थका देती है सालों की मेहनत के बाद पेपर लीक हो जाता है और नतीजे रद्द कर दिए जाते हैं।

क्या है पूरा मामला

NEET-UG 2026 परीक्षा पहली बार 3 मई को आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 22.7 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। 12 मई को परीक्षा परिणाम रद्द कर दिया गया, जब जांच एजेंसियों ने बाजार में घूम रहे “गेस पेपर” और असली प्रश्नपत्र के बीच चौंकाने वाली समानता पाई। मामले की जांच का जिम्मा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया, जिसने स्कूल प्रशासकों और कोचिंग सेंटर मालिकों समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया, जिन पर पेपर तक पहुंच बेचने का आरोप है। विपक्षी नेताओं और कुछ मीडिया रिपोर्टों ने यह भी दावा किया है कि इस पूरे विवाद के कारण कुछ छात्रों ने आत्महत्या जैसे कदम उठाए, हालांकि इन दावों की पुष्टि कठिन बताई जा रही है। बीते महीने विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की थी, और सोशल मीडिया पर “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम के एक समूह ने भी जवाबदेही की मांग करते हुए देशभर में प्रदर्शन आयोजित किए।

टेलीग्राम पर प्रतिबंध, अदालत ने ठहराया सही

परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के नाम पर केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर मेसेजिंग ऐप टेलीग्राम को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया है। NTA के अनुसार, यह प्रतिबंध 22 जून तक रहेगा, जबकि ऐप की मैसेज-एडिटिंग सुविधा 30 जून तक बंद रहेगी। सरकार का तर्क है कि टेलीग्राम की गुमनामी (anonymity) सुविधा और ब्लॉक किए गए चैनलों को आसानी से दोबारा बनाने की क्षमता इसे एक विशेष मामला बनाती है। टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इससे पेपर लीक के दोषियों के बजाय भारत के करीब 15 करोड़ सामान्य उपयोगकर्ताओं को सजा मिल रही है। शुक्रवार को टेलीग्राम ने इस प्रतिबंध को अदालत में चुनौती दी, लेकिन भारतीय अदालत ने सरकार के इस कदम को “उचित और कानूनी” ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्षधर संगठनों ने भी इस प्रतिबंध पर सवाल उठाए हैं।

सरकार का आश्वासन

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा दिलाया है कि अधिकारी इस बार “निष्पक्ष और पारदर्शी” पुनर्परीक्षा सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए 2027 तक NEET को पूरी तरह कंप्यूटर-आधारित परीक्षा प्रणाली में बदला जाएगा। गौरतलब है कि NEET-UG में हर साल लाखों छात्र मेडिकल कॉलेजों की महज 5 से 6 प्रतिशत सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं ऐसे में पहले से तनावग्रस्त इस परीक्षा प्रक्रिया में बार-बार आ रही गड़बड़ियों ने छात्रों और उनके परिवारों के भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद मौजूदा सरकार के सामने आए सबसे बड़े प्रशासनिक संकटों में से एक है।

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