Monsoon wreaks havoc: नोएडा। दिल्ली-एनसीआर में बीते कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश ने एक बार फिर नोएडा और ग्रेटर नोएडा की जल निकासी व्यवस्था की कलई खोल दी है। बीते 48 घंटों से जारी बारिश के चलते शहर के कई इलाकों में सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया, जबकि कई हाईराइज सोसायटियों की बेसमेंट पार्किंग और कुछ जगह लिफ्ट तक में पानी घुस गया। सेक्टर-76 की सिलिकॉन सिटी सोसायटी, सेक्टर-100 की गुलशन इकेबाना और सेक्टर-143 के आसपास भी सड़कों पर जलभराव देखा गया, वहीं ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अमरपाली गोल्फ होम्स सोसायटी में पानी लिफ्ट तक पहुंच जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
सेक्टर-57/58 को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर भी भारी जलभराव देखने को मिला, जहां कई फीट पानी जमा होने से वाहनों की रफ्तार थम गई और लंबा जाम लग गया। सेक्टर-49 और गांव बरौला में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जिससे कई वाहन बीच सड़क पर ही बंद हो गए और गहरे गड्ढों में फंस गए। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि नोएडा प्राधिकरण हर साल नालों की सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई असर नहीं दिखता।
बजट पर सवाल
गौरतलब है कि नोएडा प्राधिकरण का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट करीब 10,290 करोड़ रुपये से अधिक का है, बावजूद इसके शहर की बुनियादी जल निकासी व्यवस्था बारिश के आगे बेबस नजर आई। सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े बजट के बावजूद नालों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम में सुधार क्यों नहीं दिख रहा।
प्राधिकरण की सफाई और तैयारियां
आलोचनाओं के बीच नोएडा प्राधिकरण एक्शन मोड में आ गया है। नोएडा विधायक पंकज सिंह ने सेक्टर-27 स्थित क्लब में प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें बताया गया कि शहर में जलभराव वाले 28 स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां पंपिंग सेट लगाकर स्टाफ की तैनाती की जा चुकी है। इसके अलावा शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम (0120-2423795) भी सक्रिय किया गया है और सभी नालों की सफाई 15 जुलाई तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एन.जी. रवि कुमार के निर्देश पर अधिकारी बारिश के दौरान रातभर सड़कों पर डटे रहे और पंपों से पानी निकालकर कई जगह जलभराव को गंभीर होने से पहले ही नियंत्रित किया गया।
NGO ने प्रशासनिक विफलता करार दिया
इस बीच ‘नोएडा सिटीजन फोरम’ की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह ने बारिश के बाद बनी स्थिति को प्रशासन की मानसून तैयारियों की नाकामी बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने वातानुकूलित कार्यालयों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत देखनी चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी बारिश में ही शहर के ठप हो जाने को केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता माना जाना चाहिए। उन्होंने जवाबदेही तय करने, ड्रेनेज से जुड़े अनुबंधों को सार्वजनिक करने और चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। स्थानीय किसान नेता बी.सी. प्रधान ने भी सेक्टर-49 और गांव बरौला में वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई। निवासियों का कहना है कि हाईटेक शहर होने का दावा करने वाले नोएडा में हर मानसून में यही समस्याएं दोहराई जाती हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

